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पहले चरण में 7 दिग्गजों की किस्मत दांव पर, देशभर की इन VVIP सीटों का क्या है हाल?

Lok Sabha Election First Phase VIP Seats 2024: पहले चरण का चुनाव 19 अप्रैल को हो रहा है। इस दौर में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान होगा। सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव में पहले दौर में देशभर में कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर लगी है।

पहले चरण में लोकसभा की 102 सीटों के लिए मतदान होना है। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सभी सात चरणों में चुनाव कराया जा रहा है। तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं और सभी में पहले पहले चरण में ही चुनाव करवाया जा रहा है।

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कोयंबटूर- के अन्नामलाई
तमिलनाडु की कोयंबटूर सीट इस बार देश की प्रमुख वीवीआईपी सीटों में शामिल हो चुकी है। इसकी वजह यहां से चुनाव लड़ रहे भाजपा के तेज-तर्रार प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस के अन्नामलाई हैं। अन्नामलाई की लोकप्रियता हाल के दिनों में इस कदर बढ़ी है कि उनकी वजह से वहां द्रविड़ राजनीति के लिए चुनौती पैदा हुई है।

यहां उनके मुकाबले डीएमके से गणपति पी राजकुमार और एआईएडीएमके से सिंगाई रामचन्द्रन चुनाव मैदान में हैं। यह सीट इस बार इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि सत्ताधारी डीएमके ने अपनी सहयोगी सीपीएम के मौजूदा सांसद को हटाकर अपना उम्मीदवार उतारा है।

बीजेपी पिछले दो लोकसभा चुनावों से यहां दूसरे स्थान पर रही है, जिसमें एक बार अन्नाद्रमुक से साथ गठबंधन था। 1999 में वह यह सीट जीत भी चुकी है। अन्नामलाई की चुनावी किस्मत यहां सिर्फ उनकी अपनी लोकप्रियता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और डीएमके सरकार के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी से तय होगी।

चेन्नई साउथ- तमिलिसाई सुंदरराजन
तमिलनाडु की चेन्नई साउथ सीट डीएमके की गढ़ मानी जाती है। लेकिन, जिस तरह से भाजपा ने तेलंगाना के गवर्नर तमिलिसाई सुंदरराजन को इस्तीफा देने के बाद यहां का टिकट थमाया है, चुनावी लड़ाई दिलचस्प हो गई है। स्थानीय मतदाताओं में उनको लेकर काफी चर्चा है और उन्हें एक अच्छा उम्मीदवार माना जा रहा है।

उनकी उम्मीदवारी की वजह से यहां इस बार डीएमके-एआईएडीएमके और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना लग रही है। तमिलिसाई पांच साल तक प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

बीजेपी उनपर पहले भी चुनावी दांव खेल चुकी है, लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। जानकार मानते हैं कि आम जनता में उनकी छवि बहुत ही अच्छी है, लेकिन डीएमके पर उनकी जीत एंटीं-इंकंबेंसी और अन्नामलाई फैक्टर पर ही ज्यादा निर्भर कर सकती है।

अरुणाचल वेस्ट- किरेन रिजिजू
19 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश की दोनों सीटें अरुणाचल ईस्ट और अरुणाचल वेस्ट में भी वोट डाले जाएंगे। बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू यहां से चौथी बार दांव लगा रहे हैं। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने अपने दिग्गज नबाम तुकी को फिर से उतारा है।

2019 के लोकसभा चुनावों में रिजिजू और तुकी में वोटों का अंतर बहुत ही अधिक था। बीजेपी को तब 62.02% वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस उम्मीदवार महज 14% पर ही अटक गए थे। रिजिजू इस सीट पर अभी भी एक लोकप्रिय प्रत्याशी नजर आ रहे हैं।

थूथुकुडी- कनिमोझी
डीएमके ने तमिलनाडु की थूथुकुडी की मौजूदा सांसद और पार्टी की दिग्गज नेता कनिमोझी पर ही फिर से दांव लगाया है। उनके खिलाफ एआईएडीएमके से आर शिवसामी वेलुमणि और तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार) के एसडीआर विजयसीलन उम्मीदवार हैं। टीएमसी (मूपनार) भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है।

कनिमोझी की सबसे बड़ी चुनौती डीएमके सरकार के खिलाफ पिछले साल आई बाढ़ को लेकर लोगों की निराशा और गुस्सा है। लेकिन, उनके पक्ष में यह बात जाती लग रही है कि उनके खिलाफ खड़े उम्मीदवार उनकी तुलना में कद्दावर नहीं हैं। 2019 में भी कनिमोझी बहुत बड़े अंतर से चुनाव जीती थीं।

कूचबिहार- निसिथ प्रमाणिक
उत्तर बंगाल की कूचबिहार सीट पर इस बार भी भाजपा ने केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक को उतारा है। यह सीट भाजपा की गढ़ मानी जाती है और राजबंशी समुदाय से आने वाले प्रमाणिक को सीएए लागू होने का भी फायदा मिल सकता है। इस सीट पर करीब 40% वोट राजबंशी समुदाय का है।

टीएमसी ने यहां से अपने विधायक जगदीश चंद्र बसुनिया को उतारा है। वहीं फॉर्वर्ड ब्लॉक ने नितिश चंद्र रॉय को और कांग्रेस ने पिया चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस यहां पूरा जोर लगा रही है, लेकिन बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

पीलीभीत- जितिन प्रसाद
बीजेपी ने यूपी की पीलीभीत सीट से अपने मौजूदा प्रत्याशी वरुण गांधी की जगह पर कांग्रेस से आए और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री जितिन प्रसाद को उतारा है। उनके खिलाफ इंडिया ब्लॉक से सपा ने भगवंत सरन गंगवार और बसपा ने अनीस अहमद खान को टिकट दिया है।

यह सीट मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी का गढ़ बन चुकी है। लेकिन, भाजपा ने इस बार जितिन को आजमाकर नया दांव चला है। समाजवादी पार्टी ने ओबीसी को टिकट देकर प्रसाद की चुनौती बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन बीएसपी ने मुस्लिम उम्मीदवार को उतारकर उसका खेल भी मुश्किल कर दिया है।

पीलीभीत में भाजपा के दबदबे और पड़ोस के इलाके से होने की वजह से जितिन की राह ज्यादा मुश्किल नहीं लग रही है।

छिंदवाड़ा- नकुल नाथ
मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट कांग्रेस के दिग्गज और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिवार का गढ़ बन चुकी है। जहां तक कांग्रेस की बात है तो वह यहां से 17 बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी है। इनमें से 11 बार कमलनाथ या उनके परिवार के सदस्य की यहां से जीत हुई है।

इस बार भी कांग्रेस ने यहां से कमलनाथ के बेटे और मौजूदा सांसद नकुलनाथ को टिकट दिया है। उनके खिलाफ बीजेपी ने विवेक बंटी साहू को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस को इस बार भी एमपी में अपनी इसी सीट पर पूरा भरोसा है।

लेकिन, बीजेपी ने इस बार हर हाल में इस सीट को कांग्रेस से छीनने के लिए जोर लगाया है। परिणाम जो भी आए, लेकिन मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।

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