Lok Sabha Election 2024: इन परीक्षाओं में फेल हुए जो सांसद, बीजेपी काट सकती है उनका टिकट

बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनावो को देखते हुए पार्टी के मौजूदा सांसदों की परफॉर्मेंस की छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक पार्टी कुछ मानदंड निर्धारित कर चुकी है और उसी के मुताबिक कई सांसदों का टिकट कट भी सकता है और उनकी जगह पार्टी नए चेहरों पर दांव लगा सकती है।

नए चेहरों पर दांव लगाना बीजेपी की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है। मसलन, पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में पहली बार चुने गए 158 सांसदों में से करीब 55 या 35% को टिकट नहीं दिया था। इसकी वजह ये रही कि 2014 में वे मोदी लहर में जीत तो गए थे, लेकिन उसके बाद अपने चुनाव क्षेत्र कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे।

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सांसदों की परफॉर्मेंस का आकलन कर रही है बीजेपी
सूत्रों के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी मौजूदा सांसदों के उनके चुनाव क्षेत्र में प्रभाव के आकलन के लिए कई तरह से जानकारियां जुटा रही है। इसके लिए बीजेपी विभिन्न एजेंसियों की भी मदद ले रही है और संगठन के व्यवस्थित चैनल का भी इस्तेमाल कर रही है।

इन परीक्षाओं में फेल हुए जो सांसद तो!
भाजपा सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा मौजूदा सांसदों का अपने क्षेत्र के लोगों के साथ कैसा संपर्क है, उन्होंने पार्टी के जनसंपर्क अभियानों में कितनी भागीदारी की है, मतदाताओं के बीच मौजूदा संसदों की लोकप्रियता कैसी है और साथ ही साथ वह सोशल मीडिया पर वोटरों के साथ किस तरह से जुड़े हुए हैं, पार्टी टिकट तय करते समय इन सब बातों का विश्लेषण करेगी।

कुछ राज्यसभा सांसदों को भी मिल सकता है लोकसभा का टिकट
यही नहीं पार्टी में यह चर्चा बहुत दिनों से चल रही है कि पिछली बार की तरह इस बार भी कुछ केंद्रीय मंत्रियों को टिकट दिया जा सकता है, जो अभी राज्यसभा के सांसद हैं। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इसपर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। उनके लिए सीट निर्धारित करते समय उनकी जीत की संभावनाओं का भी पूरा हिसाब-किताब देखा जाएगा।

2019 के चुनाव में भी बीजेपी कर चुकी है यह प्रयोग
बता दें कि 2019 में पार्टी ने तबके केंद्रीय मंत्रियों जैसे कि स्मृति ईरानी को अमेठी, रविशंकर प्रसाद को पटना साहिब और हरदीप सिंह पुरी को अमृतसर से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था। इनमें से पहले दोनों को अच्छी कामयाबी भी मिली थी।

कुछ सीटों पर स्थानीय विधायकों पर भी दांव लगा सकती है पार्टी
टिकट पर मंथन के लिए पार्टी देश की 166 लोकसभा सीटों को 40 से ज्यादा क्लस्टर में विभाजित करके विशेष मुहिम भी शुरू कर चुकी है। इन सीटों की जिम्मेदारियां केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौपी गई है। पार्टी सांसदों की परफॉर्मेंस को टिकट देने का एक प्रमुख आधार तो बना ही रही है, लेकिन जो सांसद उम्र के सात दशक पार कर चुके हैं, उनकी रिप्लेसमेंट भी खोजी जा सकती है। हो सकता है कि जातीय और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए ऐसी सीटों पर कुछ स्थानीय विधायकों पर दांव खेला जा सकता है।

2019 में कई मंत्रियों और पूर्व सीएम को भी नहीं मिला था टिकट
क्योंकि, 2019 में पार्टी ने कुछ केंद्रीय मंत्रियों से लेकर पूर्व सीएम तक का पत्ता काटने में परहेज नहीं किया था। जैसे कि शाहजहांपुर से कृष्णा राज, होशियारपुर से विजय सांपला, आगरा से पूर्व केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया और फतेहपुर सीकरी से चौधरी बाबूलाल को नहीं दोहराया गया था। इसी तरह गढ़वाल से पूर्व केंद्रीय मंत्री बीसी खंडूरी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी का भी नैनीताल से पत्ता कट गया था।

बीजेपी ने कई दिग्गजों को भी लोकसभा मैदान से किया था बाहर
और तो और बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट से पार्टी के संस्थापकों में शामिल एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा, करिया मुंडा और शांता कुमार का भी नाम गायब हो गया था। इन सबपर 75 वर्ष की उम्र सीमा लागू की गई थी। बाद में कुछ को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दी गई।

इस तरह से जब पार्टी चुनाव मैदान में उतरी तो उसे 37% से ज्यादा वोट मिले और 303 सीटें लेकर वापस सत्ता में लौटी। 2014 के मुकाबले यह 21 सीटों की बढ़ोतरी थी और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दूसरी बार था कि सत्ताधारी दल पहले भी ज्यादा सीटें लेकर सरकार में काबिज रह गई थी।

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