Lok Sabha Election 2024: विधानसभा चुनावों में मिला जीत का कौन सा मंत्र? जिसे फिर अपनाएगी बीजेपी
बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों में तीन राज्यों में मिली जीत वाले फॉर्मूले को ही अपना सकती है। भाजपा को तीनों हिंदी भाषी राज्यों-मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अप्रत्याशित सफलता मिली है।
हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की दो दिवसीय बैठक हुई थी। इसमें जो तथ्य पार्टी के सामने आए हैं, उससे लोकसभा चुनावों के लिए उसे जीत का एक बड़ा मंत्र मिल गया है।

उम्मीदवारों के नाम की जल्द घोषणा, जीत की ज्यादा संभावना!
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के प्रदेश भाजपा अध्यक्षों ने जो प्रेजेंटेशन दिया है, वह चौंकाने वाला है। इसके अनुसार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा पहले किए जाने से पार्टी को जबर्दस्त फायदा मिला है।
बीजेपी ने हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में अपनी परंपरा तोड़कर चुनाव तारीखों की घोषणा से भी काफी पहले कई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए थे।
पहली दो लिस्ट वाले ज्यादातर उम्मीदवार आसानी से जीते-रिपोर्ट
अब पता चला है कि जिन उम्मीदवारों के नाम पहली दो लिस्ट में ही जारी कर दिए गए थे, उनमें से अधिकतर आसानी से चुनाव जीत गए हैं। यही वजह है कि सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी जनवरी के अंत तक उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर सकती है।
एक सूत्र के अनुसार, 'माहौल आपके पक्ष में है और आगे यह और बेहतर ही होने वाला है, इससे वही रणनीति दोहराने का सही समय है....इससे उन बड़े नामों को भी मैदान में उतारने का मौका है, जो अभी तक सीधे मुकाबले का सामना नहीं कर सके हैं....'
राज्यसभा सांसदों को भी लड़ा सकती है लोकसभा चुनाव
चुनाव आयोग की ओर से फरवरी या मार्च में आम चुनाव तारीखों की घोषणा किए जाने की संभावना है। यह भी संभावना है कि पार्टी कुछ राज्यसभा सांसदों को लोकसभा चुनाव लड़ने को भी कह सकती है।
इससे उन राज्यसभा सांसदों की जीत की स्थिति में पार्टी के सामने नए नेताओं को भी राज्यसभा भेजने की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। इन सांसदों में पार्टी के कुछ बड़े चेहरे भी शामिल हो सकते हैं।
विधानसभा चुनावों में यह प्रयोग भी सफल रहा है
हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी ने कई बड़े केंद्रीय मंत्री तक को एमपी में चुनाव लड़वाया है और अब वे प्रदेश में मंत्री और विधानसभा के स्पीकर तक बनाए गए हैं। इससे ऐसे सांसदों की उनके क्षेत्र में अगर कोई एंटी-इंकंबेंसी होगी तो पार्टी को उसका भी सामना नहीं करना होगा और उसे आसानी से नए चेहरे को उतारने का भी अवसर मिल गया है।
सूत्रों ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से काफी पहले उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करना काफी मायने रखता है। क्योंकि, पार्टी की नजर में सफलता के सबसे बड़े फैक्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता है।












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