अमेठी: जिगर में बड़ी आग है, जानिए क्यों सबसे हॉट है यूपी की ये सीट

लखनऊ। अमेठी के जिगर मा बड़ी आग है...जी हांं 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट सबसे “हॉट” है। ऐसी सीट जिसकी आग चुनाव नतीजों के बाद भी ठंडी होने वाली नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांंधी (Rahul Gandhi) ने अमेठी के साथ ही केरल की वायनाड सीट से भी नामांकन किया है। ऐसे में अटकलें हैं कि राहुल दोनों सीट जीत लेते हैं तो एक सीट छोडनी पड़ेगी। उस स्थिति में राहुल अमेठी सीट प्रियंका के लिए छोड़ सकते हैं। पिछली बार मोदी लहर में भी कांग्रेस ने अमेठी को बचा लिया था। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में यहांं की तीन सीट बीजेपी ने झटक ली थी। यह लोकसभा चुनाव अमेठी में कांग्रेस के लिए वजूद की लड़ाई है। अमेठी 1967 में अस्तित्व में आई, पर चर्चा 1980 से शुरू हुई जब गाँधी परिवार का नाम इसके साथ जुड़ा।

इसलिए हॉट है अमेठी लोकसभा सीट

इसलिए हॉट है अमेठी लोकसभा सीट

अमेठी हॉट है क्योंकि इसके साथ राहुल गांधी के चाचा, पिता और मां का नाम जुड़ा है। वैसे वाराणसी लोकसभा क्षेत्र की गिनती भी देश की सबसे हॉट सीटों में होती है लेकिन बनारस में नरेन्द्र मोदी के मुकाबले कोई नहीं और जो आग अमेठी में है वो बनारस में नहीं। अमेठी में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा की जंग है। अमेठी में जीत-हार के साथ बड़ा राजनीतिक संदेश जायेगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जीत- हार से उनका और कांग्रेस पार्टी, दोनों का भविष्य तय होगा। स्मृति ईरानी अगर जीततीं हैं तो संदेश जायेगा कि जनता बदलाव चाहती है। अमेठी संसदीय सीट को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता है। इस सीट पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है। वहीं, 1977 में लोकदल और 1998 में बीजेपी को जीत मिली है, जबकि बसपा और सपा अभी तक यहाँ खाता नहीं खुला।

स्मृति के आने से कांटे का हुआ मुकाबला

स्मृति के आने से कांटे का हुआ मुकाबला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जीत का अंतर 2014 के लोकसभा चुनाव में घटकर एक लाख वोटों तक आ गया था। कांग्रेस इस आंकड़े को बढ़ाने की कोशिश में है जबकि बीजेपी धुआंधार चुनाव प्रचार में जुटी है और अमेठी गाँधी छीनने की कोशिश में है। 2014 आम चुनाव में भाजपा ने अमेठी में राहुल के विरुद्ध स्मृति ईरानी को उतारा। स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की जीत के अंतर को घटाकर केवल एक लाख मतों तक ला दिया था जबकि 2009 में जीत का अंतर 3.7 लाख का था। इसके बाद से ही अमेठी का राजनीतिक पारा चढने लगा था। यह कांग्रेस के लिए आंख खोल देने वाला था। कांग्रेस ने गांव स्तर तक टीमों को भेजा और ऑनलाइन ऐप शक्ति के जरिए लगातार निगरानी रखी। अमेठी में पार्टी समन्वयकों ने कितने भी प्रयास किये हों लेकिन राहुल और प्रियंका पिछले कार्यकाल में स्मृति ईरानी की तुलना में अमेठी क्षेत्र में कम ही नजर आये।

अमेठी की जनता का हितैषी कौन ?

अमेठी की जनता का हितैषी कौन ?

कांग्रेस को अमेठी में मिलने वालो कड़ी चुनौती का अहसास है तभी अमेठी क्षेत्र में कम ही दिखाई पड़ने वाली प्रियंका अब कड़ी धूप और लू के थपेड़े झेलते हुए गाँवों की गलियाँ और घर छान रहीं। प्रियंका अमेठी के मतदाताओं को बार बार याद दिलाना नहीं भूलतीं कि कांग्रेस ही उनकी असली हितैषी है और लोग बीजेपी के छलावे में न आयें। प्रियंका ने तो यहाँ तक कह डाला कि अमेठी की जनता को जूते बाँट बीजेपी ने उनका अपमान किया है। जनता मान-सम्मान की भूखी है प्रलोभन की नहीं। कांग्रेस ने राहुल को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का कहना है कि अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नीचा दिखाने के लिये यहां लोगों को जूते बांटकर अमेठी का अपमान किया है।

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कौन सच्चा कौन झूठा

कौन सच्चा कौन झूठा

प्रियंका का कहना है कि स्मृति जनता से झूठ बोल रही हैं कि राहुल अमेठी नहीं आते। यहां के लोगों को सारी सच्चाई पता है। जनता यह भी जानती है कि किसके दिल में अमेठी है और किसके दिल में नहीं। लोगों को जूते बांटे, यह कहने के लिये कि अमेठी के लोगों के पास जूते भी नहीं हैं पहनने के लिये। वह सोच रही हैं कि ऐसा करके वह राहुल जी का अपमान कर रही हैं. सच तो यह है कि वह अमेठी का अपमान कर रही हैं। अमेठी और रायबरेली की जनता ने कभी किसी से भीख नहीं मांगी। प्रियंका गांधी के तेवर देखने लायक थे जब उन्होंने कहा कि आप बीजेपी वालों को सिखाइये कि अमेठी और रायबरेली के लोग अपना सम्मान करते हैं, किसी के सामने भीख नहीं मांगते। भीख मांगना है तो बीजेपी के लोग खुद आपसे वोटों की भीख मांगें। बताया जा रहा है कि स्मृति ने हाल में अमेठी में एक जनसभा में कहा था कि बरौलिया गांव के प्रधान जब उनसे मिलने के लिये दिल्ली गये थे तो उनके पैरों में ठीक से चप्पल भी नहीं थी। तब स्मृति ने उसकी व्यवस्था करायी थी और गांव के विकास के लिये 16 करोड़ रुपये दिलवाये थे ।

 फूड पार्क रुकवा दिया क्योंकि राहुल का नाम जुडा था

फूड पार्क रुकवा दिया क्योंकि राहुल का नाम जुडा था

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अमेठी में फूड पार्क बनने से क्षेत्र के पांच लाख किसानों को फायदा हो सकता था लेकिन फूड पार्क को रुकवा दिया क्योंकि इसके साथ राहुल का नाम जुडा था। प्रियंका ने कहा कि आपने देखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी अमेठी के गांव-गांव में जाते थे, आप अपने बुजुर्गों से पूछिये। उस वक्त ऐसा कोई नहीं था जिससे वह न मिले हों । वहीं, वाराणसी में क्या स्थिति है? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने ही संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के एक भी गांव में हाल लेने नहीं गये।

क्षेत्र में लगातार सक्रिय स्मृति ईरानी

क्षेत्र में लगातार सक्रिय स्मृति ईरानी

दूसरी तरफ बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी 2014 में हारने के बावजूद पूरे कार्यकाल में अमेठी में सक्रिय रहीं। हाल ही में गेहूं के खेत में आग लगने की सूचना पर अमेठी में जनसंपर्क के लिए निकलीं स्मृति ईरानी अपना प्रचार कार्यक्रम छोड़ घटनास्थल पर पहुंच गईं। स्मृति ईरानी ने ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिला कर आग बुझाने के लिए हैण्ड पम्प चलाया। खेतों की आग तो बुझ गई लेकिन सियासी आग जल्द ठंडी नहीं पड़ने वाली। स्मृति ईरानी और प्रियंका के वाकयुद्ध को अमेठी की जनता ध्यान से सुन रही है। इस जंग में जनता के दोनों हाथ में लड्डू है। उसे पता है जंग कोई भी जीते, फायदा इस विशिष्ट सीट की जनता को ही होगा।

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