'लोन से नकदी पैदा रहे हैं, इसलिए चिंता की जरूरत नहीं', अडानी मामले में SBI प्रमुख का आया बड़ा बयान

अडानी मामले में SBI प्रमुख का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। लोन से नकदी और व्यापार पैदा किया जा रहा है।

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हिंडनबर्ग की रिसर्च रिपोर्ट के बाद देश में हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही को भी 6 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। साथ ही विपक्ष मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी से कराने की मांग कर रहा है। इसी बीच एसबीआई प्रमुख दिनेश खारा का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि एसबीआई का अडानी समूह में 27,000 करोड़ रुपये का समग्र जोखिम है जो 31 दिसंबर 2022 तक ऋण पुस्तिका का 0.88% है।

दिनेश खारा के मुताबिक यह ऋण संपत्ति और व्यवसायों के खिलाफ हैं जो नकदी पैदा कर रहे हैं। इसलिए, हमें कोई चुनौती नहीं दिख रही है, हमारे लिए चिंता का कोई कारण नहीं है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर बैंक ऑफ बड़ौदा का भी बयान आया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से कहा गया है कि अदानी समूह के लिए समग्र प्रदर्शनी एक व्यापक प्रदर्शनी के तहत निर्धारित सीलिंग का एक निर्धारण है। पिछले 3 वर्षों में एक्सपोजर कम हुआ है। 30% जोखिम या तो पीएसयू से परस्पर सुरक्षित है या पीएसयू के साथ एक संयुक्त उद्यम के लिए है।

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    आपको बता दें कि विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी बैंक SBI ने अडाणी ग्रुप को 21.38 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया है। जबकि फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनी LIC ने पिछले कुछ साल में अडाणी ग्रुप में 30,127 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। यह सब सरकार के इशारे पर हुआ है। ऐसे में सरकार मामले की जांच कराए।

    वहीं, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले LIC का ग्रुप के शेयरों से प्रॉफिट 81,000 करोड़ रुपए था, जो 2 फरवरी को 43,000 करोड़ रुपए रह गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शेयर बाजार का यह अमृतकाल का सबसे बड़ा महाघोटाला है।

    इधर, हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। यह याचिका एडवोकेट एमएल शर्मा ने दायर की है। याचिका के जरिए उन्होंने निवेशकों का शोषण करने और उन्हें ठगने के लिए हिंडनबर्ग रिसर्च के फाउंडर नाथन एंडरसन व उनके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने निवेशकों निवेशकों के लिए मुआवजे की भी मांग की है।

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