यहां 250 रुपए की 250 ग्राम लीची, क्या आप खरीदेंगे?

Litchi is becoming less sweeter
मुजफ्फरपुर। हम खबर की शुरुआत करेंगे बेंगलुरु और चेन्नई से जहां पर गर्मियों का मौसमी फल लीचल 250 रुपए प्रति 250 ग्राम यानी ढाई सौ रुपए पाव मिल रही है। यानी दक्ष‍िण भारत में रह रहे तमाम लोग इस साल लीची का स्वाद नहीं चख पायेंगे। ऐसा इसलिये क्योंकि इस फल के सबसे बड़े गढ़ मुजफ्फरपुर में खेती नष्ट होने की कगार पर है।

मुजफ्फरपुर में बड़े पैमाने पर लीची की खेती होती है। यहां सैकड़ों एकड़ में लीची के बाग पसरे हैं। परंतु, अब तक बारिश नहीं होने व प्रचंड गर्मी के कारण लीची की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। इससे लीची बगान के मालिक और व्यावसायियों में निराशा है। बेगूसराय में मुख्य रूप से शाही एवं करैलिया लीची की पैदावार होती है।

जिसमें शाही लीची पहले तैयार हो जाती है और इसके बाद करैलिया के फल तैयार होते हैं। परंतु, शाही और करैलिया दोनों मौसम के बदले मिजाज की भेंट चढ़ गयी है। अधिकांश फल झड़ने लगे हैं। जो बचे हैं, उसमें भरपूर मिठास नहीं आ पाई है। फसल को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है।

वही बात चित करने पर व्यापारियों ने बताया कि, किसानों से प्रति बीघा लीची बगीचा 20 से 30 हजार रुपये की दर पर खरीदा। परंतु, इस वर्ष लीची की फसल मार चली गई है। लागत खर्च निकलना भी मुश्किल हो गया है। लीची के फल 35 डिग्री से अधिक तापमान पर झुलसने लगता है। बारिश नहीं हुई है। किसान लीची के पौधे के चारों ओर एक फीट का गड्ढा खोदकर पटवन करें। फल झड़ रहे हैं, तो कृषि अधिकारी व वैज्ञानिक से संपर्क कर उचित दवा का छिड़काव करें।

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