जिंदा होने का डिजिटल सबूत दे सकेंगे पेंशन धारक

नई दिल्ली। नवी मुंबई के ऐरोली में रहने वाली 62 वर्षीय ऊषा वर्मा का टेंशन नवंबर आते ही बढ़ जाता है। टेंशन होता है मुंबई से लखनऊ जाने का, क्योंकि उनके पैरों में तकलीफ रहती है। अब रेलवे स्टेशन जाना, वहां पुल चढ़ना, फिर उतरना और न जाने कितनी दिक्कतों का सामना उन्हें हर साल करना पड़ता है, क्योंकि अगर वो लखनऊ नहीं गईं, तो उनके अकाउंट में पेंशन नहीं आयेगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई सरकार ऊषा वर्मा जैसी लाखों महिलाओं और पुरुषों के लिये एक नई सुविधा लायी है, जिसके अंतर्गत वृद्ध लोगों को पेंशन कार्यालय तक खुद जाकर अपने जीवित होने का सबूत नहीं देना होगा, बल्क‍ि कंप्यूटर के माध्यम से वो जिंदा होने का डिजिटल सबूत दे सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही डिजीटल लाइफ सर्टिफिकेट स्कीम लॉन्च की है। हालांकि इसके लागू करने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि अभी यह स्कीम शुरूआती चरण में है।

रियलटाइम डेटा होगा तैयार

केंद्र सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ इलैक्ट्रॉनिक एंड इनफोरमेशन को इसके लिए एक नई एप्लीकेशन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। इस एप्लीकेशन के जरिए पेंशन धारकों का रियलटाइम डाटा बनाया जा सकेगा। आधार नम्बर और एप्लीकेशन को आपस में लिंक किए जाने के बाद एप्लीकेशन को पेंशन धारक के किसी डिवाइस या मोबाइल से जोड़ दिया जाएगा। जिससे जरूरत पड़ने पर यह जानकारी ली जा सकेगी कि जिस व्यक्ति के खाते में पेंशन डाली जानी है वह उस समय जिंदा है या नहीं।

क्या होगा पेंशनधारकों को फायदा

पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट के लिए दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लाइफ सर्टिफिकेट का डिजीटलीकरण हो जाने के बाद पेंशन देने वाले अधिकारी एक झटके में रियल टाइम डाटा देखकर पेंशनधारक के बारे में जानकारी ले सकेंगे।

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