'सड़कों पर सन्नाटा, बाजार-स्कूल बंद', Sonam Wangchuk की गिरफ्तारी के बाद लेह में कैसे हैं हालात?
Leh Sonam Wangchuk Arrest: एनवायरमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख के लेह में पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। शनिवार, 27 सितंबर को लगातार चौथे दिन भी लेह में कर्फ्यू जारी रहा और शहर में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने गश्त और चेकिंग तेज कर दी है।
यह कदम सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद उठाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पूरे इलाके में हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। बता दें कि वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद हालात ना बिगड़े इसके लिए पूरे लेह में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

Ladakh latest situation: 24 घंटे से कैसे हैं हालात?
अधिकारियों ने कहा कि बीते 24 घंटों में लद्दाख के किसी भी हिस्से से कोई अनहोनी की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्फ्यू और पाबंदियाँ जारी हैं। हालात सामान्य होने तक लेह में स्कूल और मार्केट बंद (Ladakh schools closed) हैं और चारो तरफ सन्नाटा फैला हुआ है। सड़कों पर पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात हैं।
सामाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, उपराज्यपाल काविंदर गुप्ता राजभवन में उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं। कर्फ्यू में ढील देने पर निर्णय इसी बैठक में लिया जाएगा। प्रशासन ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की गश्त बढ़ा दी गई है।
इसके साथ ही, हिंसा भड़काने वालों को पकड़ने के लिए छापेमारी भी की जा रही है। इनमें एक पार्षद भी शामिल है, जिस पर लोगों को भड़काने का आरोप है। अब तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। लेह के अलावा कारगिल समेत केंद्र शासित प्रदेश (UT) के अन्य बड़े शहरों में भी धारा 144 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लागू है।
वांगचुक की गिरफ्तारी पर क्या कहा?
शुक्रवार देर रात उपराज्यपाल (LG) ने एक बयान जारी कर वांगचुक की गिरफ्तारी को उचित ठहराया। बयान में कहा गया कि वांगचुक के कई भाषणों के चलते 24 सितंबर को लेह में हिंसा भड़की। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। प्रशासन ने कहा कि वांगचुक को हिरासत में लेना शांति बहाल करने और उन्हें ऐसी गतिविधियों से रोकने के लिए ज़रूरी था जो "सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हानिकारक" साबित हो सकती हैं।
प्रशासन का दावा - निजी महत्वाकांक्षा में उलझे रहे वांगचुक
बयान में कहा गया कि यदि वांगचुक सरकार के साथ संवाद बहाल होने पर भूख हड़ताल वापस ले लेते तो यह हिसा टल सकती थीं। प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ने अपनी "निजी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं" के चलते आंदोलन जारी रखा।
प्रशासन ने साफ किया कि वांगचुक को लेह में रखने से माहौल और बिगड़ सकता था। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उन्हें हिरासत में लेकर राजस्थान की जोधपुर जेल भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम "लेह जैसे शांति-प्रिय शहर में सामान्य स्थिति बहाल करने और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए आवश्यक" था।












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