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2021 में पुलिसकर्मियों के लिए आतंकवादियों से ज्यादा खूंखार साबित हुए वामपंथी उग्रवादी, NCRB का डेटा देखिए

नई दिल्ली, 30 अगस्त: जम्मू-कश्मीर से आए दिन आतंकवादियों की ओर से पुलिसकर्मियों पर हमले की रिपोर्ट आती रहती है। लेकिन, अगर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले साल का आंकड़ा देखें तो पुलिसकर्मियों के लिए देश-विरोधी आतंकियों से ज्यादा वामपंथी उग्रवादी घातक साबित हो रहे हैं। पिछले साल आतंकियों के हाथों जितने पुलिस वाले वीर गति को प्राप्त हुए हैं, उससे दोगुनी से भी ज्यादा तादाद उन पुलिसकर्मियों की है, जो वामपंथी उग्रवादियों या माओवादियों के हमले में मारे गए हैं। देश को वामपंथी उग्रवाद की विचारधारा कितनी भारी पड़ रही है,यह रिपोर्ट उसका काला चिट्ठा खोलने के लिए काफी है।

ज्यादा खूंखार साबित हुए वामपंथी उग्रवादी-रिपोर्ट

ज्यादा खूंखार साबित हुए वामपंथी उग्रवादी-रिपोर्ट

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वार्षिक 'भारत में अपराध' पर 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक जितने पुलिसकर्मियों की हत्या आतंकवादियों के हाथों हुई है, उससे दोगुनी से भी ज्यादा संख्या में वामपंथी उग्रवादियों की हिंसा में मारे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में आतंकवादियों या चरमपंथियों के हाथों कुल 18 पुलिस वालों की हत्या की गई, जबकि इसी दौरान वामपंथी उग्रवादियों ने 40 पुलिस वालों की हत्या कर दी। इसी तरह 11 पुलिस वालों की हत्या सीमा पर फायरिंग में हुई, एक की दंगाई भीड़ ने कर दी और 11 अपराधियों के हाथों मारे गए। सात पुलिसकर्मी अपने ही हथियारों से हादसे का शिकार हो गए और 339 की दुर्घटनाओं में मौत हो गई। लेकिन, एक भी पुलिसकर्मी की जान पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के हाथों नहीं हुई।

कुल 427 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान हत्या-रिपोर्ट

कुल 427 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान हत्या-रिपोर्ट

एनसीआरबी का डेटा यह भी बताता है कि पिछले साल जिन कुल 427 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान हत्याएं हुईं, उनमें सबसे ज्यादा (233) कॉन्टेबल रैंक के थे। उसके बाद हेड कॉन्सटेबल (88),असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (37), सब-इंस्पेक्टर (26), इंस्पेक्टर (4) और एक गजेटेड ऑफिसर के अलावा दो अन्य थे। इस अवधि में विभिन्न रैंक के कुल 1,632 पुलिसकर्मियों के जख्मी होने की भी रिपोर्ट है।

छत्तीसगढ़ में 40 पुलिसकर्मी वामपंथी उग्रवादियों के हाथों मारे गए

छत्तीसगढ़ में 40 पुलिसकर्मी वामपंथी उग्रवादियों के हाथों मारे गए

जिन राज्यों में सबसे ज्यादा पुलिसकर्मियों की मौत हुई, उसमें सबसे ऊपर तमिलनाडु है, जहां 56 पुलिस वालों की सड़क दुर्घटना में जान चली गई और दो को अपराधियों ने मार दिया। छत्तीसगढ़ में 40 पुलिसकर्मी वामपंथी उग्रवादियों के हाथों मारे गए और सात की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली गई। बिहार में 38 पुलिस वालों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई और एक को दंगाइयों की भीड़ ने मार डाला।

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने की 18 पुलिसकर्मियों की हत्या

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने की 18 पुलिसकर्मियों की हत्या

केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो जम्मू और कश्मीर में 18 पुलिसकर्मियों की हत्या आतंकवादियों ने कर दी तो दिल्ली में दो की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो गई। ओडिशा में अपराधियों के खिलाफ अभियान में सबसे ज्यादा पुलिसकर्मियों के जख्मी होने की रिपोर्ट है। यहां जो 188 पुलिसकर्मी जख्मी हुए, उनमें 176 को अपराधियों ने घायल कर दिया और 12 को दंगाइयों की भीड़ ने चोटिल कर दिया। केरल में 159 पुलिस वाले जख्मी हुए, जिनमें 90 को अपराधियों ने घायल किया और 68 को हिंसक भीड़ ने जख्मी किया। एक पुलिसकर्मी सड़क दुर्घटना में घायल हुआ।

दिल्ली में 156 पुलिसकर्मियों को दंगाइयों ने जख्मी किया

दिल्ली में 156 पुलिसकर्मियों को दंगाइयों ने जख्मी किया

तमिलनाडु में कुल 133 पुलिसकर्मियों के जख्मी होने की रिपोर्ट है, जिसमें 96 को दुर्घटनाओं में चोटें लगीं, 30 को अपराधियों ने जख्मी किया और तीन अपने ही हथियारों से दुर्घटना के शिकार हो गए। केंद्र शासित प्रदेश में सबसे ज्यादा जख्मी पुलिस वालों की संख्या दिल्ली से है। यहां कुल 156 पुलिकर्मी दंगाई भीड़ के हमले में जख्मी हुए, 22 को अपराधियों ने घायल किया और 17 दुर्घटनाओं में चोटिल हुए। (एएनआई इनपुट) (तस्वीरें- फाइल)

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