'सदन चलना चाहिए, संविधान पर चर्चा होनी चाहिए', संसद के शीतकालीन सत्र पर बोले नेता विपक्ष राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद के सुचारू संचालन और लोकतांत्रिक बहस की आवश्यकता पर जोर देते हुए संविधान पर निर्धारित बहस के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अपने खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से किए गए संवाद का हवाला दिया और सदन में शिष्टाचार और सार्थक चर्चाओं को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराया।

राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े आरोपों पर चर्चा से भाजपा की अनिच्छा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विषय राष्ट्रीय हित से संबंधित है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने मणिपुर में बिगड़ती स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया। जिसमें राज्य में लोगों की दुर्दशा और बुनियादी सेवाओं के टूटने की बात प्रमुखता से उठाई गई।

rahul gandhi

संसद में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

मणिपुर की स्थिति और जॉर्ज सोरोस के साथ कांग्रेस के कथित संबंधों पर तीखी बहस के बीच विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए हंगामे के कारण लोकसभा को बुधवार को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मणिपुर की भयावह स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इन मुद्दों पर तुरंत जवाब देना चाहिए।

वहीं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मणिपुर के मामले में सरकार की कार्रवाई का बचाव किया और कांग्रेस पर बाहरी ताकतों के साथ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने खास तौर पर अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस और कांग्रेस के कथित संबंधों का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

राज्यसभा में सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

संसदीय गतिरोध केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहा। विपक्षी गठबंधन इंडिया द्वारा राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद उच्च सदन में भी तनाव बढ़ गया। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस प्रस्ताव के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष पीठासीन अधिकारियों की आवश्यकता पर बल दिया।

संविधान बहस पर राहुल गांधी का जोर

राहुल गांधी ने संविधान पर बहस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि इस बहस के माध्यम से न केवल संविधान के सिद्धांतों को रेखांकित किया जाएगा। बल्कि राष्ट्र के सामने आने वाले ज्वलंत मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

राजनीतिक गतिरोध के बीच शीतकालीन सत्र

संसद का शीतकालीन सत्र जो 25 नवंबर को शुरू हुआ। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीव्र टकराव से भरा रहा। इन व्यवधानों के कारण कई बार कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। यह सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होगा। लेकिन अब तक की कार्यवाही विवादों और असहमति से भरपूर रही है।

संविधान और मणिपुर मुद्दे पर बहस की मांग

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष जहां संविधान और मणिपुर जैसे मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष ने जॉर्ज सोरोस के कांग्रेस से कथित संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।

संसद के इस सत्र ने लोकतंत्र के कामकाज के जटिल संतुलन को उजागर किया है। जिसमें शासन की जिम्मेदारियों और राजनीतिक रणनीतियों का टकराव स्पष्ट रूप से सामने आया है। इन गतिरोधों के बावजूद संसद अपनी भूमिका निभाने और देश के सामने आने वाले मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में प्रयासरत है।

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