कर्नाटक में कितने साल चलेगी गठबंधन की सरकार, कांग्रेस-जेडीएस की बैठक में हुआ फैसला
नई दिल्ली। कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ लेने के बाद कांग्रेस और जेडीएस के बीच विभागों के बंटबारे को लेकर जारी गतिरोध शुक्रवार को समाप्त हो गया। साथ ही यह भी तय हो गया कि कुमारस्वामी मुख्यमंत्री के रुप में अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। इसके साथ दोनों पार्टियों ने यह भी साफ कर दिया कि दोनों पार्टियों 2019 के लोकसभा को साथ मिलकर लड़ेंगी। कांग्रेस और जेडीएस के बीच की दूरियों को कम करने के लिए लिखित समझौते हुए हैं जिसके तहत अब यह भी तय हो गया है कि कुमारस्वामी पांच सालों तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। गठबंधन सरकार आज शाम चार बजे कैबिनेट की घोषणा भी करने वाली है।

गुरुवार रात दोनों पार्टियों में बनी सहमति
गुरुवार देर रात हुई बैठक में कांग्रेस की तरफ से गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, अशोक गहलोत और केसी वेणुगोपाल तथा जद(एस) की तरफ से दानिश अली शामिल हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि, अनुमानों के विपरीत इस बैठक में सिर्फ विभागों के बंटबारों के लेकर चर्चा नहीं हुई बल्कि लंबे समय तक दोनों दल एक दूसरे के साथ कैसे काम करेंगे जैसे कई आयामों पर बात हुई।

वित्त विभाग जेडीएस के पास और गृह मंत्रालय कांग्रेस की झोली में
इस बैठक में दोनों पार्टियों के बीच सरकार चलाने के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया गया, सरकार की स्थिरता को लेकर एक न्यूनतम साझा प्रोग्राम तय किया गया। गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस का ताजा फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी नेता और डिप्टी सीएम परमेश्वर ने कुछ दिनों पहले कहा था कुमारस्वामी का पांच साल तक समर्थन करने पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बैठक में तय हुआ कि, वित्त विभाग जेडीएस के पास रहेगा और गृह मंत्रालय कांग्रेस की झोली में गया।

सारी घोषणाएं लिखित समझौते के बाद ही की जाएंगी
जेडीएस के महासचिव दानिश अली ने बताया कि अब सारी घोषणाएं लिखित समझौते के बाद ही की जाएंगी और पार्टी पांच साल तक के लिए एक स्थाई सरकार देने के लिए वचनबद्ध है। यही वजह है कि हमने कोई भी घोषणा करने से पहले बहुत समय लिया है। हमारा हर समझौता लिखित है जिससे सरकार आराम से काम कर सके और पांच सालों तक सत्ता बनी रहे। गुरुवार को, कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल और जेडी (एस) के दानिश अली ने राष्ट्रीय राजधानी में वार्ता के पांच राउंड के बाद स्थानीय नेताओं के साथ अंतिम वार्ता के लिए बेंगलुरु गए। जिसके बाद गुरुवार को राहुल गांधी इसमें शामिल हुआ और मामले को सुलझाया।












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