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MeToo:जानें कौन हैं MJ अकबर, जिन पर सबसे ज्‍यादा महिलाओं ने लगाए हैं यौन शोषण के आरोप

नई दिल्‍ली। मुबशर जावेद अकबर दुनिया एमजे अकबर के नाम से जानती है। देश के जाने-माने पत्रकारों में शुमार एमजे अकबर इस समय केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री हैं। एमजे अकबर भाजपा के सदस्‍य हैं। MeToo मूवमेंट के तहत अब तक सबसे ज्‍यादा महिलाओं ने अगर किसी शख्‍स पर आरोप लगाए हैं तो वह हैं- एमजे अकबर। मामला सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में होने के साथ ही राजनीतिक भी हो गया है। कांग्रेस अकबर के नाम पर बीजेपी को घेर रही हैं। यह बात सच है कि एमजे अकबर आज बीजेपी में हैं, लेकिन वह कांग्रेस में भी रह चुके हैं। वह भी छोटे-मोट पद पर नहीं, एमजे अकबर एक समय राजीव गांधी के प्रवक्‍ता थे।

बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे अकबर, राजीव गांधी के प्रवक्‍ता भी रहे

बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे अकबर, राजीव गांधी के प्रवक्‍ता भी रहे

1989 लोकसभा चुनाव से पहले एमजे अकबर ने जर्नलिज्‍म छोड़कर राजनीति में आने का फैसला लिया था। अकबर ने बिहार के किशनगंज से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, जो वह जीत भी गए थे। राजीव गांधी के प्रवक्‍ता थे, लेकिन उस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्‍छा नहीं रहा था। हालांकि, एमजे अकबर की स्थिति पार्टी में मजबूत थी। राजीव गांधी से उनकी करीबी थी, इसलिए एमजे अकबर का रुतबा कायम रहा। 1991 में राजीव गांधी की हत्‍या हो गई। राजीव गांधी के बाद अकबर राजनीति में असहज महसूस करने लगे और 1992 में कांग्रेस पार्टी छोड़कर वापस पत्रकारिता में लौटे।

राजनीति छोड़ने के बाद पत्रकारिता में लौटे अकबर, बीजेपी के करीब आ गए

राजनीति छोड़ने के बाद पत्रकारिता में लौटे अकबर, बीजेपी के करीब आ गए

1990 के दशक में भारतीय जनता पार्टी जोर पकड़ने लगी थी। इसी दौरान एमजे अकबर मशहूर अंग्रेजी अखबार द एशियन एज की स्‍थापना की। यही वो समय था जब एमजे अकबर बीजेपी के शीर्ष नेताओं के करीब आने लगे। हालांकि, उनका अखबार हिंदुत्‍ववादी पॉलिटिक्‍स की आलोचना करता था, लेकिन इसके बाद भी लालू कृष्‍ण समेत टॉप बीजेपी लीडर्स के साथ अकबर के रिश्‍ते अच्‍छे रहे। 2004 में कांग्रेस किसी प्रकार से सत्‍ता में वापसी करने में कामयाब रही। आने वाले वर्षों में अकबर की स्थिति द एशियन एज में कमजोर होने लगी और उन्‍हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद कुछ समय के लिए उन्‍होंने इंडिया टुडे में काम किया और द संडे गार्जियन नाम का अखबार भी शुरू किया। पत्रकारिता में लौटने के बाद अकबर का रुतबा वैसा नहीं था जैसा द टेलिग्राफ की लॉन्चिंग के वक्‍त उनका कद हुआ करता था।

2014 में मोदी के करीब आ गए एमजे अकबर

2014 में मोदी के करीब आ गए एमजे अकबर

2014 में एमजे अकबर नरेंद्र मोदी के करीब आ गए और पत्रकारिता को अलविदा कहकर वह एक बार फिर औपचारिक तौर पर राजनीति में आ गए। बीजेपी ज्‍वॉइन करने पर अकबर को पार्टी प्रवक्‍ता बनाया गया। हालांकि, बीजेपी में भी अकबर को नापंसद करने वालों नेताओं की लंबी लिस्‍ट है, लेकिन वह विरोध को दरकिनार करने में कामयाब रहे और विदेश राज्‍य मंत्री बना दिए गए।

अकबर के दादा हिंदू थे, जिन्‍होंने इस्‍लाम कबूल कर लिया था

अकबर के दादा हिंदू थे, जिन्‍होंने इस्‍लाम कबूल कर लिया था

एमजे अकबर का जन्‍म 11 जनवरी 1951 को हुआ। उनके दादा रहमतुल्‍ला धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने थे। वह हिंदू थे, लेकिन उनकी शादी मुस्लिम महिला से हुई थी। एमजे अकबर ने एक नॉवेल लिखा है, जिसका नाम है- ब्‍लड ब्रदर्स। यह नॉवेल उनके निजी जीवन से प्रभावित है। इस कहानी कुछ इस प्रकार है: कैसे एक बिहारी हिंदू मुसलमान बन जाता है। नॉवेल के मुताबिक, अकबर के पिता बंटवारे के वक्‍त पाकिस्‍तान चले जाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद वापस भारत लौट आते हैं। कुछ महीने बाद ही उनके घर में पुत्र का जन्‍म होता है, जिसका नाम रखा गया- मोबशर जावेद अकबर यानी एमजे अकबर। अकबर की शुरुआती शिक्षा कोलकाता बॉयज स्‍कूल में हुई, इसके बाद उन्‍होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। नॉवेल में अकबर लिखते हैं कि उनके पिता कांग्रेस के सदस्‍य थे और चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार भी किया करते थे।

लंबी है यौनशोषण के आरोपों की सूची

लंबी है यौनशोषण के आरोपों की सूची

एमजे अकबर के खिलाफ जर्नलिस्‍ट गजाला वहाब, ने 'द वायर' में आर्टिकल लिखकर पूरी आपबीती बयां की है। गजाला वहाब फोर्स न्‍यूज मैग्‍जीन की एग्‍जीक्‍यूटिव एडिटर हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया है कि एमजे अकबर उन्‍हें घूरते थे, अश्‍लील मैसेज भेजते थे। यहां तक कि आर्टिकल लिखते वक्‍त उन्‍हें अपने सामने बिठाते थे।

  • एमजे अकबर पर आरोप है कि वह महिलाओं का इंटरव्यू होटल के एक कमरे में लिया करते थे। एक महिला ने दावा किया कि एमजे अकबर ने उन्हें इंटरव्‍यू के दौरान शराब भी ऑफर की थी।
  • एमजे अकबर पर एक महिला ने आरोप लगाया है कि 1990 में वह जिस अखबार के संपादक थे, वहां ऑफिस में अधिकतर युवा लड़कियां ही थीं। महिला ने बताया, 'सबसे अजीब बात थी कि वह अखबार में केवल युवा महिलाओं को नौकरी देते थे। वहां पुरुषों से ज्यादा युवा महिलाएं अधिक थीं और उसे 'अकबर का हरम' कहा जाता था। उसकी ऐसी छवि थी।'

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