जानिये भारत में महिलाओं के अधिकार, नहीं गिरफ्तार हो सकती हैं सूर्यास्त के बाद
लखनऊ। भारत में आज भी कई ऐसी महिलायें है जिन्हें अपने हक लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती है। नियमों की जानकारी नहीं होने की वजह से वह लाचार बेबस दूसरों से मदद की दरकार करती रहती है।
भारत में कई ऐसे नियम और कानून है जो महिलाओं को कानूनी अधिकार देते हैं। ये अधिकार ना सिर्फ संपत्ति से जुड़े हैं बल्कि पारिवारिक हिंसा से भी जुड़े हैं।

पिता की संपत्ति में है अधिकार
महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति पर भी अधिकार होता है। अगर पिता ने अपनी संपत्ति की वसीयत नहीं की है तो उनकी मृत्यु के उपरांत लड़की को उसकी मां और भाई के समान ही संपत्ति में अधिकार प्राप्त होता है। यही नहीं महिलाओं को यह अधिकार विवाह के बाद भी होता है।

पति की संपत्ति में है अधिकार
शादी के बाद महिलाओं को उनके घर की संपत्ति पर अधिकार होता है। पति से विवाद की उपस्थिति में महिलाओं को गुजारा भत्ता लेने का अधिकार है। वहीं अगर पति की मृत्यु हो जाती है तो वसीयत के हिसाब से महिला को संपत्ति में अधिकार मिलेगा।

मांग सकती है गुजारा भत्ता
अगर पति-पत्नी ने साथ नहीं रहने का फैसला लिया है तो सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पत्नी बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है। वहीं अगर दोनों के बीच तलाक होता है तो हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 24 के तहत पत्नी मुआवजे की भी मांग कर सकती है। ऐसी स्थिति में पति को अर्जित संपत्ति और वेतन के आधार पर पत्नी को गुजारा भत्ता देना होगा।

खुद के पैसे खर्च करने की आजादी
महिला को यह पूरा अधिकार दिया गया है कि वह पैतृक संपत्ति या खुद की अर्जित की गयी संपत्ति का जो चाहे कर सकती है। यदि महिला चाहे तो अपने बच्चों को भी संपत्ति से बेदखल कर सकती है।

पुलिस अधिकार
महिलाओं को पुलिस से भी संबंधित विशेष अधिकार प्राप्त हैं। किसी भी महिला को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। महिला को गिरफ्तार किये जाने के कारण को बताना अहम होता है। गिरफ्तार महिला के निकट संबंधी को तुरंत सूचना भी दी जानी चाहिए।

निशुल्क वकील की व्यवस्था
महिलाओं को गिरफ्तार किये जाने पर या किसी अन्य परिस्थिति में भी निशुल्क कानूनी मदद का प्रावधान है। सरकारी खर्च पर महिला अदालत से वकील की मांग कर सकती है।












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