Sharad Yadav Family:शरद यादव के परिवार में कौन-कौन है? बेटी सुभाषिनी बढ़ा रही हैं उनकी राजनीतिक विरासत
शरद यादव ने 1989 में रेखा यादव से शादी की थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है।

Sharad Yadav Family, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद नेता शरद यादव का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार को तबियत खराब होने के बाद उन्हें फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शरद यादव लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। शरद यादव जदयू के पूर्व अध्यक्ष रहे और 7 बार लोकसभा के सांसद चुने गए। शरद यादव गैर-कांग्रेसी सरकारों में सत्ता की धुरी माने जाते रहे।

इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल थे शरद यादव
मध्य प्रदेश के होशांगाबाद में जुलाई 1947 में जन्मे शरद यादव बबाई गांव में हुआ था। साल 1964 में जबलपुर के साइंस कॉलेज से बीएससी और साल 1970 में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग जबलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था। इंजीनियर की पढ़ाई के दौरान ही वह कॉलेज के प्रेसिडेंट चुने गए थे। पिता नंद किशोर यादव किसान थे और मां सुमित्रा यादव गृहिणी। शरद के बड़े भाई रविशंकर यादव थे।

शरद पवार के परिवार में बेटा और बेटी हैं
शरद यादव ने 1989 में रेखा यादव से शादी की थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है। बेटे का नाम शांतनु बुंदेला और बेटी का नाम सुभाषिनी राजा राव हैं। शांतनु ने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से की है। शरद यादव की बेटी राजनीति में एक्टिव हैं। 2020 में बिहार के विधानसभा चुनाव में सुभाषिनी कांग्रेस की टिकट से बिहारीगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ी थीं। वह इस सीट से चुनाव हार गईं थीं।

पिता की विरासत को सुभाषिनी बढ़ा रही हैं आगे
सुभाषिनी को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है। उनकी शादी हरियाणा में एक राजनीतिक परिवार में हुई है। सुभाषिनी ने 2020 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। सुभाषिनी ही उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। शरद यादव की जन्मभूमि भले ही मध्य प्रदेश थी लेकिन उनकी कर्मभूमि बिहार रही।शरद यादव सबसे पहले 1974 में जबलपुर से लोकसभा सांसद चुने गए थे।

शरद यादव तीन राज्यों से चुने गए सांसद
वे बिहार की मधेपुरा सीट से चार बार, मध्य प्रदेश के जबलपुर से दो बार और उत्तर प्रदेश के बदायू से एक बार लोकसभा पहुंचे। शरद पवार लोहिया और जेपी के समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वह जेपी के पहले शिष्य थे। 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह पर मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने के पीछे भी शरद यादव की अहम भूमिका थी। वह देश के पहले ऐसे नेता बने, जिन्हें तीन अलग-अलग राज्यों एमपी, यूपी और बिहार से सांसद चुने जाने का मौका मिला।
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