विश्व पर्यावरण दिवस: भारत में हर साल वायु प्रदूषण के चलते पांच वर्ष भी नहीं जी पाते 1 लाख बच्चे

नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस पर जारी एक स्टडी के मुताबिक, भारत में हर साल पांच वर्ष से कम उम्र के एक लाख बच्चों की मृत्यु होने के कारण वायु प्रदूषण एक राष्ट्रीय आपदा बन गई है। यह देश में होने वाली 12.5 प्रतिशत मौतों के लिए भी जिम्मेदार है। इस धरती की रक्षा और संरक्षण के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1974 में हुई थी और अब दुनिया भर के 100 से अधिक देश पर्यावरण को बचाने के अपने तमाम कैंपेन और पहल के जरिए इसका हिस्सा बन चुके हैं।

kill 1 lakh children under the age of five in India every year due to Air pollution

पर्यावरण थिंक टैंक सीएसई के स्टेट ऑफ इंडियाज इन्वायरन्मेंट (एसओई) रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषित हवा के कारण भारत में वायु प्रदूषण से देश में 5 साल से कम उम्र के हर 10,000 बच्चों में औसतन 8 से ज्यादा बच्चों की मौत हो रही है। लड़कियों में यह अनुपात और भी ज्यादा है। प्रत्येक वर्ष हर 10 हजार लड़कियों में औसतन 9 से ज्यादा लड़कियां पांच साल की होने से पहले ही प्रदूषण की वजह से दम तोड़ रही हैं। सीएसई की रिपोर्ट में कहा गया है कि, भारत में होने वाली कुल व्यक्तियों की मौत में से प्रदूषण की वजह से भारत में 12 फीसदी से ज्यादा लोगों की मौत हो रही हैं।

थिंक टैंक का कहना है कि, वायु प्रदूषण से लड़ने की सरकार की योजनाएं अब तक असफल साबित हुई हैं और इस तथ्य को पर्यावरण मंत्रालय ने भी स्वीकार किया है। हाल ही में मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया था कि स्थिति एक अच्छी नहीं थी और योजनाएं भी उतनी सफल नहीं रहीं जितनी की उन्हें सफल होने की उम्मीद थी। इससे पहले वायु प्रदूषण पर वैश्विक रिपोर्ट में सामने आया था कि 2017 में इसके चलते भारत में 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक नयी दिल्ली पूरी दुनिया में सबसे प्रदूषित राजधानी शहर है। हालाँकि, रिपोर्ट्स को पिछले पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने खारिज कर दिया था, जो अब स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनका कहना था कि इस तरह के अध्ययनों का उद्देश्य केवल लोगों में घबराहट पैदा करना है और यह सच नहीं है। भारत ने 2013 में संकल्प लिया था कि गैर इलेक्ट्रिक वाहनों को हटा दिया जाएगा और 2020 तक 1.5 से 1.6 करोड़ हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा था।

सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक ई-वाहनों की संख्या मई 2019 तक महज 2.8 लाख थी जो तय लक्ष्य से काफी पीछे है। हालांकि भारत पहले ऐसे देशों में से एक था, जिसने गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों से चरणबद्ध तरीके से शपथ ली थी, लेकिन ई-वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए उसकी राष्ट्रीय योजना अभी तक लागू नहीं हो सकी है।

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