अफरा के जज्बे को सलाम: भाई के इलाज के लिए जुटाए 46 करोड़, खुद उसी बीमारी से हो गई मौत की शिकार

कोच्चि, 02 अगस्त: स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए)बीमारी से पीड़ित 16 साल की अफरा की मौत हो गई। मौत से पहले अफरा अपने भाई को जीवनदान दे गईं। अफरा का भाई मोहम्मद भी इसी बीमारी के पीड़ित था। अफरा ने अपने भाई के इलाज के लिए लोगों से मदद की अपील की थी। जिसके चलते अफरा अपने भाई के इलाज के लिए क्राउड फंडिंग से 46 करोड़ रुपए इकट्ठे करने में सफल रहीं। लेकिन सोमवार को उनकी खुद उस बीमारी से मौत हो गई।

भाई के लिए जटाए 46 करोड़ रुपए

भाई के लिए जटाए 46 करोड़ रुपए

कन्नूर के मट्टूल की रहने वाली अफरा ने कोझीकोड के एक निजी अस्पताल में बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। एसएमए से संबंधित जटिलताएं विकसित होने के बाद पिछले कुछ दिनों से खुद अफरा का भी अस्पताल में इलाज चल रहा था। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित अफरा ने भाई मोहम्मद के इलाज के लिए मुहिम चलाकर करीब 46 करोड़ रुपए जोड़े थे। अफरा और इसका भाई दोनों ही एक ही आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित थे।

भाई को लगा 18 करोड़ का इंजेक्शन

भाई को लगा 18 करोड़ का इंजेक्शन

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, भाई की जान बचाने के लिए अफरा ने दुनिया भर से मदद की अपील की थी। जिसका असर भी हुआ अफरा अपने भाई के लिए पैसे जुटाने में सफल रहीं। अफरा के भाई मोहम्मद को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक दुर्लभ बीमारी कमजोर मांसपेशियों का पता चला था। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा था कि, उसे दो साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही 18 करोड़ रुपये की खुराक की दवा जोल्गेन्स्मा देनी पड़ेगी।

वीडियो में की थी भावुक अपील

वीडियो में की थी भावुक अपील

खुद व्हीलचेयर के सहारे अपना जीवन जी रही अफरा ने पिछले साल जून में एक वीडियो के जरिए लोगों से पैसे जुटाने के लिए मदद मांगी। भाई की जिंदगी बचाने को आगे आई अफरा का यह वीडियो दुनिया भर में खासा वायरल हुआ था। जिसके बाद लोगों ने दिल खोलकर अफरा की मदद की थी। अफरा ने लोगों से अपील करते हुए कहा था कि, इस बीमारी के कारण मेरे पैर और रीढ़ की हड्डी मुड़ गई है। मेरे लिए लेटना और सोना भी मुश्किल है।

उन पैसों से दो और बच्चों का हुआ इलाज

उन पैसों से दो और बच्चों का हुआ इलाज

अफरा ने आगे कहा कि, लेकिन मेरे छोटे भाई की हालत अब वैसी नहीं है। वह फर्श और सब पर रेंग रहा है। अगर उसे अभी यह दवा मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि अगर आप सभी मदद के लिए आगे आएंगे तो उसे बचाया जा सकता है। वह मेरी तरह खत्म नहीं होना चाहिए। यह अपील उन हजारों लोगों के दिलों को छू गई, जिन्होंने दवा के आयात के लिए परिवार को 18 करोड़ रुपये इकट्ठा करने की उम्मीद के बजाय 46 करोड़ रुपये इकट्ठा करने में मदद की। उसके दो खातों में 7.7 लाख लोगों ने पैसे भेजे।

अफरा के ये थे सपने

अफरा के ये थे सपने

एसएमए जैसी दर्दनाक बीमारी के साथ लड़ रही अफरा की लंबी और दर्दनाक लड़ाई उसके बड़े सपने देखने और गायन और ड्राइंग में अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने से नहीं रोक पाई। इसके अलावा अफरा अपने डेली लाइफ को हर दिन यूट्यूब पर अपलोड करती रहती थीं। इसके जरिए अफरा अपने जीवन, यात्रा और पढ़ाई के बारे में वीडियो शेयर करती रहती थीं। यही नहीं वह अपने भाई के इलाज का अपडेट भी शेयर करती रहती थीं। वह एक डॉक्टर बनने का सपना देखती थी।

अफरा सफा इंग्लिश मीडियम स्कूल की दसवीं की छात्रा थी

अफरा सफा इंग्लिश मीडियम स्कूल की दसवीं की छात्रा थी

रफीक और मरियम्मा की बेटी अफरा सफा इंग्लिश मीडियम स्कूल की दसवीं की छात्रा थी। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में मट्टूल सेंट्रल जुमा मस्जिद कब्रिस्तान में अफरा का अंतिम संस्कार किया गया। अफरा के भाई मोहम्मद को पिछले साल 24 अगस्त को दवा दी गई थी और उसकी फिजियोथेरेपी चल रहा है। वहीं क्राउड फंडिंग से जमा हुई अतिरिक्त धनराशि से समिति ने दो अन्य एसएमए प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है और शेष 12 करोड़ रुपये एसएमए प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए राज्य सरकार को सौंप दिए।

फोटो साभार: सोशल मीडिया

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