क्या जस्टिस केएम जोसेफ़ का मामला सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार के बीच टकराव का कारण बन सकता है?

नई दिल्लीः न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पदोन्नति को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका आमने-सामने हैं। उत्तराखंड के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई है। केंद्र सरकार के कोई भी फैसला न लेने से केरल बार एसोसिएशन खुश नहीं है और उन्होंने सोमवार को सर्वसम्मति से जोसेफ के नाम पर कोई भी फैसला न लेने के कारण राष्ट्रपति को पत्र लिखकर गहरी चिंता व्यक्त की।

kerala Bar association sends unanimous resolution to PM, president over Justice KM Joseph

केरल बार एसोसिएशन की जनरल बॉडी ने सर्वसम्मति से सोमवार को जस्टिस के.एम. जोसेफ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र भेजा।

केरल बार एसोसिएशन का कहना है कि कॉलेजियम ने 10 जनवरी को जोसेफ का नाम सुप्रीम कोर्ट के लिए दिया था लेकिन एक महीने बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने इस पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की है।

पत्र में कहा गया है कि जस्टिस जोसेफ को उनकी ईमानदारी, कानून के, ज्ञान और अपने न्यायिक कर्तव्यों का स्वतंत्र निर्वहन के लिए जाना जाता है। किसी भी जस्टिस में इस तरह के गुण होना किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए निषेध नहीं हो सकते।

किसी भी जज को ईमानदार और निडर होने के लिए किसी भी तरह की सजा नहीं दी जा सकती। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार जोसेफ की पदोन्नति पर अपनी सहमति देने के लिए उत्सुक नहीं है।

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