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बहुत क्रांतिकारीः AAP मेनिफेस्टो के मुताबिक चुनावी वादे पूरे नहीं हुए तो जिम्मेदार नहीं होंगे केजरीवाल ?

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बेंगलुरू। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में अब महज चंद दिन शेष हैं और बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच का मुकाबला अब दिलचस्प होता जा रहा है। दिल्ली में एक बार फिर सत्ता की वापसी के लिए कोशिश में जुटी आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को पार्टी का मेनिफेस्टो जारी किया है, जिसमें दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल राष्ट्रवाद को ही प्रमुखता से जगह दी गई है बल्कि पहली बार मेनिफिस्टों में वादों को पूरा करने के लिए जनता के सामने नियम और शर्त रख गए हैं।

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आम आदमी पार्टी के मेनिफेस्टो में राष्ट्रवाद का तड़का बताता है कि केजरीवाल एंड पार्टी को दिल्ली में अपनी सियासी जमीन खिसकती हुई दिख रही है, लेकिन मेनिफिस्टो में किए वादो को पूरा करने के लिए नियम और शर्तों को जोड़ने का मामला भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार देखा सुना गया है। जनता को सुपुर्द किए गए आम आदमी पार्टी के मेनिफिस्टो में लागू नियम और शर्त ऐसे हैं कि दिल्ली की जनता केजरीवाल को वोट देकर भी ठगी हुई महसूस कर सकती है।

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    गौरतलब है आम आदमी पार्टी के मुखिया ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 काम के आधार पर लड़ने की वकालत की थी, लेकिन शाहीन बाग प्रकरण और बीजेपी के आक्रामक राष्ट्रवादी कैंपेन से केजरीवाल को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी ने अपना मेनिफेस्टो सबसे अंत में जारी किया। मेनिफेस्टो में केजरीवाल ने राष्ट्रवाद को संभवतः पहली बार मेनिफेस्टो में शामिल किया है। आम आदमी पार्टी के 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव के मेनिफेस्टो में दूसरी दिलचस्प बात मेनिफेस्टो के वादों में जोड़ी गई शर्ते हैं।

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    दरअसल, केजरीवाल एंड पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए जारी मेनिफिस्टो में दिल्ली की जनता से किए वादों के साथ नियम और शर्ते लागू समझाए हैं। मसलन, अगर ऐसा हुआ तो वादा पूरा किया जाए और वैसा नहीं हुआ तो वादों को भूल जाने में ही जनता की समझदारी होगी। दिल्ली के निवर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मेनिफिस्टो में किए हर वादों के साथ एक शर्त जोड़ी है।

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    उनके मुताबिक आम आदमी पार्टी मेनिफेस्टो का वादा तभी पूरा करेगी जब दिल्ली पूर्ण राज्य बनेगा और अगर दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं बनती है तो उनके वादों की कोई गारंटी नहीं है। अब अगर आप पूछेंगे कि दिल्ली कैसे पूर्ण राज्य बनेगा तो केजरीवाल की अगली शर्त के लिए तैयार रहिए, क्योंकि दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए आम आदमी पार्टी की अगली शर्त है कि केजरीवाल को दिल्ली मुखिया चुनने के बाद लोकसभा चुनाव 2024 में आम आदमी पार्टी को वोट देना होगा। वरना भूल जाओ!

    मेनिफिस्टो में जनता को वोट देकर भूल जाने की सलाह दे रहे हैं केजरीवाल

    मेनिफिस्टो में जनता को वोट देकर भूल जाने की सलाह दे रहे हैं केजरीवाल

    केजरीवाल एंड पार्टी ने 2020 विधानसभा चुनाव का मेनिफेस्टो जारी करते हुए दुहाई दिया कि पिछले पांच वर्षों में उनकी पार्टी इसलिए दिल्ली को पूर्ण राज्य नहीं बना सकी, क्योंकि दिल्ली की जनता ने दिल्ली के सातों लोकसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी को नहीं, बल्कि बीजेपी को जितवा दिया। टर्म एंड कंडीशन वाले नए मेनिफेस्टो में केजरीवाल ने कहा है कि तब दिल्ली वाले मेनिफेस्टो में किए गए उन तमाम वादों को तकादा नहीं कर पाएगा जब तक दिल्ली की लोकसभा की कुल सातों सीटों पर दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को जितवा कर संसद नहीं भेजेगी।

    मेनिफिस्टो में किए वादों को पूरा करने के लिए जोड़ दी है अजीबोगरीब शर्त

    मेनिफिस्टो में किए वादों को पूरा करने के लिए जोड़ दी है अजीबोगरीब शर्त

    उल्लेखनीय है भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आम आदमी पार्टी पहली ऐसी पार्टी बन गई है, जो टर्म एंड कंडीशन के साथ मेनिफेस्टो लेकर आई है, क्योंकि 73-74 वर्ष के भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहले कभी कोई भी राजनीतिक दल ऐसे अजूबे कारनामें करने में नाकाम रही है। राजनीतिक पार्टियां मेनिफेस्टो के जरिए अपने मुद्दे और इरादों का मुजाहरा करती है, लेकिन अभी तक किसी भी दल ने उसमें शर्त नहीं जोड़ी थी, लेकिन केजरीवाल एंड पार्टी ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उसमें शर्त लागू कर दी हैं।

    केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है

    केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है

    केजरीवाल पर पिछले पांच वर्षों पर वादाखिलाफी का आरोप लगता रहा है, क्योंकि पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल एंड पार्टी द्वारा किए गए 70 वादों की सच्चाई किसी से छिपी नही है। आम आदमी पार्टी पर आरोप लगता रहता है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद आम आदमी पार्टी विश्वविजय की ओर उन्मुख हो गई और दिल्ली पर ध्यान देना छोड़ दिया। खुद मुख्यमंत्री पर आरोप है कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद पूरे भारत में आम आदमी पार्टी के विस्तार में लग गए और साढ़े चार साल बाद दिल्ली तब लौटे जब लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी की लुटिया पूरी तरह से डूब गई।

    AAP के मेनिफेस्टो और उसकी शर्तों ने वोटरों को कफ्यूज कर दिया है

    AAP के मेनिफेस्टो और उसकी शर्तों ने वोटरों को कफ्यूज कर दिया है

    दिलचस्प बात है कि दिल्ली की जनता के लिए जारी किए केजरीवाल एंड पार्टी के मेनिफेस्टो और उसकी शर्तों ने वोटरों को कफ्यूज कर दिया है। दिल्ली की जनता यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि अगर केजरीवाल की पार्टी को वोट दिया तो मेनिफेस्टो में किए शर्तों के अनुरूप उसे लोकसभा चुनाव 2024 में भी उसे आम आदमी पार्टी को ही वोट देने होंगे वरना वादे तो पूरे होने से रहे। माना जा रहा है कि वोटर पहली बार ऐसी दुविधा में फंसे होंगे जब उन्हें राज्यों वादे को पूरा कराने के लिए लोकसभा चुनाव का इंतजार करना पड़ेगा।

    जनता को नहीं होगा AAP के मेनिफेस्टो में किए वादों के तकादा का हक

    जनता को नहीं होगा AAP के मेनिफेस्टो में किए वादों के तकादा का हक

    कहने का मतलब यह है कि केजरीवाल एंड पार्टी को वोट करने वाली जनता को AAP के क्रांतिकारी मेनिफेस्टो में किए वादों का तकादा करने का हक तब तक नहीं होगा जब तक वह लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के सांसद नहीं चुन लेती है। यह जनता के लिए हास्यास्पद स्थिति है, क्योंकि सामान्यतया जनता विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री और लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री चुनती है, लेकिन केजरीवाल एंड पार्टी एक ही चुनाव में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों को चुनने की शर्त रख दी है।

    केजरीवाल एंड पार्टी का मेनिफेस्टो चौकाऊं ही नहीं, हास्यास्पद भी है

    केजरीवाल एंड पार्टी का मेनिफेस्टो चौकाऊं ही नहीं, हास्यास्पद भी है

    केजरीवाल एंड पार्टी के क्रांतिकारी मेनिफेस्टो के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के मेनिफेस्टों में किए वादों के पूरे होने की शर्त है दिल्ली पूर्ण राज्य होना और पूर्ण राज्य बनने की शर्त है दिल्ली के सातों लोकसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी उम्मीदार की जीत सुनिश्चिचत होनी चाहिए, वरना भूल जाओ और दिल्ली की जनता को वादों का तकादा करने का बिल्कुल हक ही नहीं होगा अगर जनता ने आम आदमी पार्टी के शर्तों की नाफरमानी करने की जरा भी कोशिश की। दिल्ली की जनता के लिए केजरीवाल एं पार्टी का मेनिफेस्टो चौकाऊं ही नहीं, हास्यास्पद भी है।

    चुनावी वादों को पूरा करने के लिए AAP ने लागू किया टर्म एंड कंडीशन

    चुनावी वादों को पूरा करने के लिए AAP ने लागू किया टर्म एंड कंडीशन

    केजरीवाल का नियमों व शर्तों वाला दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 का मेनिफेस्टो को दिल्ली की जनता कैसे लेती है, यह तो 8 फरवरी को होने वाले मतदान और 11 फरवरी को आने वाले नतीजों में पता चल जाएगा, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में आम आदमी पार्टी शायद पहली ऐसी पार्टी बन गई है, जो जनता को वादों को पूरा करने के लिए टर्म एंड कंडीशन लेकर आई है।

    वादे पूरे नहीं होने पर केजरीवाल को नहीं, खुद को कोसेगी दिल्ली?

    वादे पूरे नहीं होने पर केजरीवाल को नहीं, खुद को कोसेगी दिल्ली?

    दिलचस्प यह है कि अगर दिल्ली में एक बार केजरीवाल एंड पार्टी की सरकार बनती है और लोकसभा चुनाव में दिल्ली की जनता एक बार मोदी को प्रधानमंत्री चुनने के लिए दिल्ली के सातों सीटों पर बीजेपी को वोट करती है, तो 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता वादों के पूरा नहीं होने पर केजरीवाल को नहीं, खुद को कोस रही होगी। निःसंदेह वह नजारा कैसा होगा, कौतुहल भर देगा।

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    English summary
    The temper of nationalism in the Aam Aadmi Party's manifesto shows that the political land of Kejriwal and party is seen slipping in Delhi, but the matter of adding terms and conditions to fulfill the promises made in the manifesto is seen and heard for the first time in Indian democratic history. The rules and conditions applicable in the Aam Aadmi Party's manifesto handed over to the public are such that the people of Delhi can feel cheated by voting Kejriwal.
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