Telangana में पहले KCR की कुर्सी गई, अब BRS पर मंडराया टूट का संकट! क्या बदला लेगी कांग्रेस?

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चीफ के चंद्रशेखर राव (KCR) विधानसभा चुनावों में मिली हार के साथ चौतरफा संकटों में घिरे नजर आ रहे हैं।

पहले कुर्सी गई और सत्ता की हैट्रिक लगाने का सपना चकनाचूर हो गया। फिर पार्टी पर संकट मंडराने की सुगबुगाहट के बीच ही गुरुवार रात वह अपने एरावल्ली फार्महाउस में गिर पड़े। इसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ गया। फिलहाल उन्हें हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में रखा गया है।

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बीआरएस विधायकों के पलटी मारने से रोकने का संकट
उन्हें जो शारीरिक चोट लगी है, उससे कुछ हफ्ते में इलाज के बाद उनके पूर्ण स्वस्थ हो जाने की संभावना है। लेकिन, अब असली संकट उनकी पार्टी बीआरएस के सामने खड़ा हो गया है। यह संकट है पार्टी के जीते हुए सभी 39 विधायकों को बीआरएस के साथ जोड़े रखने का, जो कि बदले राजनीतिक हालात में बड़ी चुनौती बन सकती है।

कांग्रेस 70 से कम सीटों को शुरू से मान रही है 'असुरक्षित'
तथ्य यह है कि कांग्रेस शुरू से राज्य में अपने लिए 70 सीटों से एक भी कम को असुरक्षित मानकर चल रही थी। लेकिन, परिणामों में उसे सामान्य बहुमत से सिर्फ 4 सीटें ज्यादा मिली हैं। यह आंकड़ा देखकर उसके नेताओं को चाहे-अनचाहे कर्नाटक-मध्य प्रदेश वाला सीन याद आ सकता है।

कांग्रेस नेता मतगणना वाले दिन से दे रहे हैं संकेत
इन हालातों में ऐसे राजनीतिक संकेत मिल रहे हैं कि बीआरएस के कुछ एमएलए कथित रूप से कांग्रेस के साथ संपर्क साधने में जुटे हुए हैं। इस तरह की बातें तो कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी 3 दिसंबर को मतगणना के दौरान ही ऑन रिकॉर्ड भी कह चुकी हैं।

करीब एक दर्जन कांग्रेस विधायक बीआरएस में शामिल हो गए थे
यानि जिस बीआरएस ने 2018 में बड़ी जीत के बावजूद कांग्रेस के करीब एक दर्जन एमएलए को अपने पाले में कर लिया था, उसके सामने अब वही इतिहास दोहराए जाने का खतरा मंडराने लगा है। बीआरएस को 2014 में 119 में से 63 और 2018 में 88 सीटें मिली थीं। फिर भी पिछले कार्यकाल में कांग्रेस के 19 विधायकों में से करीब एक दर्जन को अपने साथ ले आई थी।

बीआरएस के कुछ विधायक हमारे साथ संपर्क में -कांग्रेस नेता
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है, '...यह भी तथ्य है कि टीआरएस (बीआरएस) के अंदर मूड बहुत ही अंधकारमय है और इसके कुछ चुने हुए विधायक सकारात्मक सहयोग के लिए हमारे साथ संपर्क में हैं।'

तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस के अपने 64 विधायक हैं और एक सीपीआई विधायक का उसे समर्थन प्राप्त है। जबकि बीआरएस के 39 एमएलए हैं और इससे दल-बदल करवाने के लिए कांग्रेस को कम से कम 26 एमएलए को तोड़ने की जरूरत पड़ेगी।

आया-राम-गया-राम वाले विधायकों पर कौन करे भरोसा?
कांग्रेस के रणनीतिकारों के दिमाग में शायद एक डर बैठ चुका है कि उसके कुछ विधायकों के आया-राम-गया-राम वाले चरित्र को देखते हुए उनका निश्चिंत बैठना जोखिम से कम नहीं होगा।

अभी कांग्रेस के टिकट पर जो 64 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, उनमें से कई वो लोग हैं, जो कांग्रेस से बीआरएस, बीआरएस से बीजेपी और वापस भाजपा से कांग्रेस की परिक्रमा पूरी कर चुके हैं।

यही वह वजह है कि कांग्रेस के रणनीतिकार पार्टी का अंकगणित और मजबूत बनाने की कोशिशों में लगे हो सकते हैं। क्योंकि, 119 सीटों वाले सदन में बहुमत का आंकड़ा 60 होता है और बीआरएस, बीजेपी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को मिलाकर 54 विधायक हो जाते हैं।

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