Karnataka: आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के तर्क को कहा बेतुका, बताया हॉर्स ट्रेंडिंग को खुला निमंत्रण

नई दिल्ली। कर्नाटक में जिस तरह से सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस-जेडीएस और भाजपा के बीच नूराकुश्ती सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। आधी रात को कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कर्नाटक में एंटी डिफेक्शन लॉ यानि दल-बदल का कानून लागू नहीं होता है क्योंकि अभी तक नए चुने गए विधायकों ने शपथ नहीं ग्रहण की है। केंद्र सरकार के इस तर्क पर सुप्रीम कोर्ट ने बेतुका बताते हुए कहा कि इसका मतलब है कि खरीद-फरोख्त का खुला निमंत्रण है।

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आपको बता दें कि कर्नाटक में भाजपा के पास कुल 105 विधायक हैं, जिसमे एक निर्दलीय विधायक भी शामिल है, जिसके बाद वह महज 7 सीटों से पूर्ण बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन का ऐलान किया उसके बाद भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई। कांग्रेस-जेडीएस ने दावा किया कि उनके पास 116 विधायकों का समर्थन है। इस पूरे विवाद को लेकर कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और तर्क दिया था कि भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है फिर भी वह इसका दावा कर रही है, ऐसे में विधायकों की खरीद फरोक्त बढ़ सकती है, जिसपर कोर्ट ने कहा कि यह दल-बदल कानून के तहत आएगा।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की उस याचिका को देर रात खारिज कर दिया जिसमे येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग कई गई थी। हालांकि कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका पर मामले की सुनवाई शुक्रवार को करने की बात कही है। साथ ही भाजपा और कर्नाटक सरकार को विधायकों का समर्थन पत्र भी पेश करने को कहा है। इसी बीच आज सुबह सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिसके बाद तमाम दिग्गज कांग्रेसी नेता धरने पर बैठ गए हैं।

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