'गारंटियों' ने कांग्रेस को नहीं दी जीत की गारंटी! तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल में यू-टर्न की तैयारी?

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की ओर से बाटें गए गारंटी कार्ड को लेकर शहर-शहर हंगामें की खबरें आ रही हैं। इसी दौरान यह चर्चा भी शुरू है कि जिन राज्यों में कांग्रेस इन गारंटियों की वजह से सरकार बना चुकी है, वहां क्या उन्हें वापस लेने की भी सोच सकती है?

कांग्रेस पार्टी बीते तकरीबन डेढ़ वर्षों में पहले हिमाचल प्रदेश, फिर कर्नाटक और पिछले साल के अंत में तेलंगाना में 'गारंटियों' वाले वादों के दम पर सत्ता पा चुकी है। पार्टी ने इसे ऐसा जिताऊ हथियार समझा कि लोकसभा चुनावों में घर-घर जाकर गारंटी कार्ड बांट आई। लेकिन, अब कर्नाटक में ही गारंटी योजनाओं पर फिर से विचार करने की मांग पार्टी के अंदर से ही उठने लगी है।

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कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर गारंटी योजना के पुनर्मूल्यांकन की मांग
कर्नाटक कांग्रेस के प्रवक्ता एम लक्ष्मण ने राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से कहा है कि सरकार गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों का पुनर्मूल्यांकन करे। लक्षमण मैसुरु से चुनाव हार गए हैं। उनका कहना है कि गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों ने भी बीजेपी को वोट दे दिया है।

लक्षमण ने कहा, 'अगड़ी जाति के मतदाताओं ने जिन्हें गारंटी योजनाओं का फायदा मिला है, बीजेपी का समर्थन किया है, जो कि योजनाओं का विरोध करती है। इसलिए, मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूं कि वे कांग्रेस की अगुवाई वाली राज्य सरकार की ओर से पेश की गई पांच गारंटी योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन और समीक्षा करें।'

लोकसभा चुनावों में फेल हो गई कांग्रेस की हर 'गारंटी'
कांग्रेस ने इस बार लोकसभा चुनावों में भी वोटरों से तरह-तरह के वादे किए थे। इसके लिए पार्टी की ओर से गारंटी कार्ड भी बांटे गए। इसमें से एक गारंटी थी, हर परिवार की मुख्य महिला को हर महीने 8,500 रुपए सीधे बैंक खाते में डालने की गारंटी। कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें कांग्रेस के कुछ नेता कथित रूप से कहते सुने जा रहे हैं कि यह वादा प्रत्येक महिलाओं और लड़कियों के लिए है।

अपनी चुनावी गारंटियों की वजह से घिर चुकी है कांग्रेस!
लेकिन, कांग्रेस तीसरी बार भी चुनाव हार गई है। लेकिन, इन वादों का परिणाम ये हुआ है कि लखनऊ से लेकर कर्नाटक तक में कांग्रेस दफ्तरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है और पार्टी से वादे के मुताबिक उनके खातों में 8,500 रुपए डालने की मांग हो रही है।

कर्नाटक में नहीं चली कांग्रेस की गारंटी
दरअसल, पिछले साल मई में कांग्रेस को उसकी 5 गारंटियों ने कर्नाटक की सत्ता में जबर्दस्त बहुमत के साथ उसकी वापसी करवाई थी। लेकिन, लोकसभा चुनावों में वहां सरकार में होने के बावजूद पार्टी भाजपा को रोक नहीं पाई। वहां की 28 सीटों में से बीजेपी को 17 और उसकी सहयोगी जेडीएस को 2 सीटें मिल गई हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी को सिर्फ 9 सीटें ही मिल पाईं।

हिमाचल में भी निकली कांग्रेस की हवा
कर्नाटक से पहले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने बीजेपी को हरा कर सत्ता में वापसी की थी। वहां भी पार्टी की गारंटियों ने उसे सत्ता दिलाई थी। लेकिन, लोकसभा चुनावों में बीजेपी इस बार भी सभी चार सीटें जीत गई है। हिमाचल में बीजेपी 2019 में भी चारों सीटें जीत थी। लेकिन, उपचुनाव में एक सीट कांग्रेस को मिल गई थी। लेकिन, इस बार भाजपा ने वह सीट भी कांग्रेस से छीन ली है।

तेलंगाना में भाजपा ने पहली बार 8 सीटें जीती
तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी ने पिछले साल नवंबर में एक दशक बाद सत्ता का स्वाद चखा था। वहां भी गारंटी योजनाओं ने कांग्रेस पार्टी को जीत की गारंटी दिलाई थी। लेकिन, करीब 6 महीने बाद ही वहां के वोटरों पर उन गारंटियों का असर फीका पड़ गया; और पार्टी की नई गारंटियां भी उस हद तक असर नहीं डाल पाई।

तेलंगाना में बीजेपी और कांग्रेस को 8-8 सीटें मिलीं। भाजपा को पहली बार दक्षिण भारत के इस राज्य में इतनी सीटें मिली हैं। जबकि, वहां कांग्रेस की सरकार है।

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