कर्नाटक चुनाव: लिंगायत को सीएम चेहरा प्रोजेक्ट करने से क्यों बच रही बीजेपी?
Karnataka polls:भाजपा नेतृत्व ने कर्नाटक में लिंगायत चेहरे को ही सीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। पार्टी नहीं चाहती कि इसकी वजह से बाद समाज उससे नाराज हों।

कर्नाटक बीजेपी की ओर से केंद्रीय नेतृत्व से कहा जा रहा था कि वह लिंगायत समाज का भरोसा बनाए रखने के लिए इसी वर्ग से मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट कर दे। खासकर जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावडी के कांग्रेस में जाने से पार्टी काफी दबाव में है। लेकिन, गृहमंत्री अमित शाह ने ऐसे किसी प्रस्ताव पर विराम लगा दिया है।

लिंगायत चेहरा प्रोजेक्ट नहीं करेगी बीजेपी
शनिवार को शाह ने बेंगलुरु में सार्वजनिक तौर पर यह बात दोहराई कि शेट्टार और सावडी जैसे प्रभावशाली लिंगायत चेहरे के पार्टी छोड़ने से भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि इनके निकलने के बाद भी पार्टी को बहुमत के आंकड़े से '15-20 सीटें ज्यादा' लाने से कोई नहीं रोक सकता।

प्रदेश के नेताओं ने नेतृत्व को दिया था सुझाव
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ शुक्रवार की बैठक में शामिल भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, 'किसी भी संभावित नुकसान (कुछ लिंगायत नेताओं के पार्टी छोड़ने) से बचने के लिए हमने नेतृत्व को सुझाव दिया था कि पार्टी यह घोषणा कर दे कि यदि सत्ता में रहती है तो लिंगायत मुख्यमंत्री होगा...'

लिंगायत को सीएम चेहरा प्रोजेक्ट करने से क्यों बची बीजेपी?
उनके मुताबिक, 'लेकिन, शाह ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे गैर-लिंगायत वोट इकट्ठा हो जाएंगे।' प्रदेश में लिंगायत के बाद दलित-आदिवासी और वोक्कालिगा वोट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं; और पार्टी को लगा कि प्रदेश नेताओं की बात मानने का उल्टा असर हो सकता है।

शाह ने तय कर दिया चुनावी एजेंडा
लिंगायत को मुख्यमंत्री बनाने का वादा करने के बजाए शाह ने प्रदेश नेतृत्व से कहा कि वह विकास, डबल इंजन की सरकार और आरक्षण के मुद्दे पर ज्यादा फोकस करे। शाह ने यह भी कहा कि प्रदेश के नेता 30 अप्रैल के बाद होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करीब 20 रैलियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं।
शाह के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, बीएस येदियुरप्पा, कर्नाटक में बीजेपी के प्रभारी अरुण सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। दरअसल, कांग्रेस इसबार भाजपा पर लिंगायत-विरोधी होने का आरोप लगा रही है।
इसी बैठक में गृहमंत्री ने पार्टी नेताओं से कहा कि शेट्टार, सावडी और अयानूर मंजूनाथ के खिलाफ जमकर प्रचार करें और लोगों को यह बताएं कि पार्टी में महत्वपूर्ण पद मिलने के बावजूद उन्होंने बीजेपी के साथ 'विश्वासघात' किया है।
कर्नाटक में लिंगायत वोट बैंक महत्वपूर्ण है
कर्नाटक में लिंगायत समाज एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। इनकी करीब 17 फीसदी आबादी है। यही वजह है कि बीएस येदियुरप्पा जब पार्टी में 75 वर्ष की उम्र सीमा के चक्कर में सीएम पद से हटे तो भाजपा ने दूसरे लिंगायत चेहरे बसवराज बोम्मई को ही उनका उत्तराधिकारी बनाया।
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2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी बीजेपी
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होना है और 13 मई को वोटों की गिनती होनी है। 2018 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी थी, लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने तालमेल करके उसे सत्ता से दूर कर दिया था।
2019 में कांग्रेस और जेडीएस के बागियों को अपने साथ जोड़कर बीजेपी सरकार बनाने में सफल हो गई थी।












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