Karnataka elections 2023: जनाधार बढ़ाने में जुटी है जेडीएस, इन दोनों समुदाय के वोटरों पर है नजर
कर्नाटक चुनाव 2023 में जनाधार बढ़ाने में कुमारस्वामी की जेडीएस जुटी हुई है। इस बार के चुनाव मेंवीरशैव-लिंगायत वोटों पर नजर-लिंगायत वोटों पर भी उसकी नजर है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव मई महीने में होने वाले हैं। इस बार के चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। राज्य के हर समुदाय के वोटरों को लुभाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पुरजोर कोशिश कर रही है ताकि उसकी बहुमत की सरकार बने। वहीं कर्नाटक पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की पार्टी जनता दल एस की जनाधान बढ़ाने में अन्य समुदायों को टारगेट कर रही है। जनता दल (सेक्युलर) या जेडी (एस), जो परंपरागत रूप से वोक्कालिगा वोट बैंक पर निर्भर है अब अपने मतदाता आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है।
कुमारस्वामी ने वीरशैव मतदाताओं से माफी मांगी
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल-सेक्युलर (JDS) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने हाल ही में वीरशैव-लिंगायत समुदाय को लुभाने के लिए,वीरशैव मतदाताओं से माफी मांगी थी। मैसूरु में वीरशैव-लिंगायत समुदाय को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने 'पुरानी घटनाओं को भूल जाने' की अपील की और 2007 में बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद नहीं सौंपने के लिए समुदाय से माफी मांगने से भी नहीं चूके।
जानिए क्यों कुमास्वामी से क्यों नाराज है ये समुदाय
बता दें जब कुमारस्वामी और येदियुरप्पा 2006 ने मिलकर सरकार बनाई थी, जिसके कारण धरम सिंह के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिर गई थी। दोनों दलों के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते के तहत जेडीयू कुमारस्वामी सरकार के कार्यकाल के पहले 20 महीनों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने, जिसके बाद भाजपा के येदियुरप्पा शेष 20 महीने सीएम बनकर सत्ता संभालनी थी लेकिन जब समय आया तो जेडीएस नेता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण 2008 में सरकार गिर गई।
उम्मीदवारों की सूची में लिंगायत उम्मीदवारों के नाम शामिल
उस समय से ही यह माना जाता है कि वीरशैव-लिंगायत समुदाय ने जेडीयू और कुमारस्वामी के खिलाफ शिकायत है। 2018 में हालांकि जेडी (एस) जिसे बड़े पैमाने पर वोक्कालिगा की पार्टी के रूप में देखा जाता है, उसने 33 लिंगायत उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिनमें से चार ने चुनाव जीता था। इस बार उन्होंने 93 उम्मीदवारों की पहली सूची में 15 लिंगायत उम्मीदवारों के नाम शामिल किए है।
ये समुदाय भाजपा का है वोट बैंक
गौरतलब है कि वीरशैव-लिंगायत समुदाय, जिन्हें भाजपा का मुख्य मतदाता आधार माना जाता है, कुल पांच करोड़ मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है। 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास सबसे अधिक वीरशैव-लिंगायत विधायक (38) हैं। हालांकि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार वोक्कालिगा नेता और समुदाय से सीएम चेहरे के रूप में उभर रहे हैं, जद (एस) अपने मतदाता आधार का विस्तार करने की पूरी कोशिश कर रहा है।












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