Karnataka chunav 2023 result: दुविधा में मारी गई बीजेपी, लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों को लेकर उलटा पड़ा दांव
Karnataka election 2023 result: भाजपा के लिए न माया मिली न राम वाली स्थिति दिखाई पड़ रही है। वह लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों को खुश करने के चक्कर में पड़ी थी।

Karnataka chunav 2023 result in Lingayat and Vokkaliga belt: कर्नाटक चुनाव से कुछ समय पहले निवर्तमान सीएम बसवराज बोम्मई की सरकार का सबसे बड़ा फैसला था मुसलमानों के आरक्षण का 4 फीसदी कोटा खत्म करना। बीजेपी सरकार ने इसे प्रदेश की दो प्रभावशाली जातियों लिंगायत और वोक्कालिगा में बराबर-बराबर बांट दिया।
लिंगायत और वोक्कालिगा दोनों को लेकर उलटा पड़ा दांव
लेकिन, शनिवार को कर्नाटक के जो चुनाव परिणाम आए हैं, उससे लगता है कि मुस्लिमों का कोटा खत्म करके लिंगायत और वोक्कालिगा समाज को खुश करने वाला भाजपा का दांव उलटा पड़ गया। राज्य में लिंगायतों की जनसंख्या 17 फीसदी और वोक्कालिगा की 14 फीसदी बताई जाती है।
लिंगायत वोट बैंक में कांग्रेस ने लगाई सेंध
बीजेपी का लिंगायत सीटों पर पहले से अच्छा प्रभाव रहा है। इनकी आबादी ज्यादातर उत्तरी कर्नाटक इलाके में केंद्रित है। पर इस बार कांग्रेस ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे लगता है पार्टी ने भाजपा के कोर वोट बैंक में जबर्दस्त घुसपैठ की है। बीजेपी के लिए यह पूरी उम्मीद तोड़ देने वाला झटका है।
उत्तरी कर्नाटक में 56 सीटें हैं, जिनमें पिछली बार 40 सीटें बीजेपी के पास थीं। लेकिन, इस बार कहानी पटली हुई नजर आई है। बेलगावी, उत्तर कन्नड़, हावेरी, गडग, विजयपुरा, बागलकोट और धारवाड़ जैसे इलाके परंपरागत तौर पर भाजपा के समर्थन वाले माने जाते हैं। लेकिन, इस बार इन जगहों पर उनका पार्टी से मोहभंग हुआ दिखा है।
बीजेपी ने लिंगायत को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया था
गौरतलब है कि बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व की ओर से यह मांग की जा रही थी कि पार्टी लिंगायत सीएम उम्मीदवार के नाम की घोषणा करे। क्योंकि, सबसे बड़े लिंगायत चेहरे बीएस येदियुरप्पा पहले ही अपनी रिटायरमेंट की घोषणा कर चुके थे। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने सोचा कि मांग मानने पर वोक्कालिगा नाराज हो सकते हैं।
वोक्कालिगा के बीच अपना जनाधार बढ़ाना चाहती थी बीजेपी
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से यही कहा जाता रहा है कि लिंगायत ही मुख्यमंत्री हैं (बसवराज बोम्मई) फिर सीएम उम्मीदवार के नाम की घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है। दूसरी तरफ भाजपा ने इस बार वोक्कालिगा इलाकों में अपना जनाधार बढ़ाने की खूब कोशिश की थी। पुराने मैसुरु के इलाके में उसने बहुत उम्मीदें लगा रखी थीं। कई सारी विकास योजनाएं लॉन्च की गई थी।
वोक्कालिगा बेल्ट में भी कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन
लेकिन, लगता है कि भाजपा को वोक्कालिगा समाज से तो साथ नहीं ही मिल पाया, लिंगायत सीएम उम्मीदवार की उम्मीद टूटने से यहां भी गच्चा खाने की नौबत आ गई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और जेडीएस की फर्स्ट फैमिली वोक्कालिगा समाज से ही आते हैं। कांग्रेस ने यहां की 60 में से 30 से अधिक सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है।
बीजेपी को लगा दोहरा झटका
यानि लगता है कि वोक्कालिगा समाज ने बीजेपी को तो भाव नहीं ही दिया, जेडीएस से भी काफी हद तक मुंह फेर कर संभावित सीएम उम्मीदवार शिवकुमार के नाम पर कांग्रेस को समर्थन कर दिया। बीजेपी के लिए यह दोहरे झटके की तरह है।
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कांग्रेस ने काफी समय तक प्रचार के दौरान वोक्कालिगा चेहरे को सीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट किया और बीजेपी दुविधा में पड़ी रह गई और वह सत्ता से इतनी दूर चली गई कि पांच साल तक उसके लिए राज्य में कोई गुंजाइश ही नहीं बच गई है।












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