क्या कर्नाटक में डर गई है बीजेपी, फजीहत की आशंका से प्रत्याशियों की लिस्ट नहीं कर रही जारी?
कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने अभी तक उम्मीदवारों के नाम नहीं जारी किए हैं। दरअसल, पार्टी को आशंका है कि ऐसा करने पर कुछ नेता पाला बदल सकते हैं। अगर किसी प्रत्याशी ने पाला बदला तो पार्टी की फजीहत हो सकती है।

कर्नाटक में बीजेपी ने अभी तक उम्मीदवारों की पहली लिस्ट भी जारी नहीं की है। जबकि, विपक्षी दल कांग्रेस और जेडीएस अब दूसरी लिस्ट को फाइनल करने वाले हैं। दरअसल, बीजेपी नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि अगर नाम जारी होने के बाद किसी उम्मीदवार ने पलटी मार दी तो बहुत ज्यादा किरकिरी हो सकती है। क्योंकि, कांग्रेस कह चुकी है कि कई सारे बीजेपी नेता उसके संपर्क में हैं। खुद मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी आशंका जता चुके हैं। तीन एमएलसी तो टिकट के चक्कर में बीजेपी छोड़ भी चुके हैं। कुछ एमएलए के भी ऐसा ही करने की आशंका है।

बीजेपी लिस्ट जारी करने में जानबूझकर कर रही है देरी
कर्नाटक में 10 मई को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 13 अप्रैल है। लेकिन, जानकारी के मुताबिक 10 या 11 अप्रैल से पहले बीजेपी के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी होने की संभावना नहीं लग रही है। सोमवार को बेंगलुरु में पार्टी के जिलाध्यक्षों से बातचीत के दौरान बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने लिस्ट जारी करने में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करने की बात कही है। कहा ये जा रहा है कि बीजेपी के नेता पार्टी प्रत्याशियों की सूची जारी करने से पहले एकबार कांग्रेस और जेडीएस के उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट देख लेना चाहते हैं, उसी हिसाब से प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

फजीहत की आशंका से डरी बीजेपी!
लेकिन, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की ओर से लिस्ट जारी करने में देरी करने की असल वजह ये है कि वह नहीं चाहती है कि जिस शख्स को वह टिकट दे, वह पाला बदलकर कांग्रेस में चला जाए। अगर एक भी उम्मीदवार ने ऐसा किया तो विश्व की सबसे बड़ी सियासी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा की बड़ी फजीहत हो जाएगी। क्योंकि, पिछले कुछ दिनों से ऐसा लगातार देखा जा रहा है। सोमवार को ही बीजेपी के तीसरे एमएलसी अयानूर मंजूनाथ ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की है। इससे पहले दो और एमएलसी बाबूराव चिंचानसुर और पुत्तन्ना भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। मंजूनाथ भी शिवमोगा से चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं और संभवत: उनकी भी बात कांग्रेस से चल रही है।

डीके शिवकुमार भी कर चुके हैं दावा
दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पिछले हफ्ते खुलेआम कह चुके हैं कि चुनावों से पहले बीजेपी और जेडीएस से दर्जन भर नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी कांग्रेस पर आरोप लगा चुके हैं कि वह उनकी पार्टी के नेताओं को तोड़ने का अभियान चला रही है। कहा जा रहा है कि 2019 में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए कुछ एमएलए भी अपनी पुरानी पार्टी के संपर्क में हैं। हाल ही में कांग्रेस के एक नेता ने अंग्रेजी अखबार ईटी से कहा था कि बीजेपी के कुछ मजबूत नेता अगले कुछ दिनों में कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
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बीजेपी असंतुष्टों को बगावत का समय नहीं देना चाहती
बीजेपी की रणनीति ये है कि आखिरी समय में लिस्ट जारी की जाए, ताकि असंतुष्टों के पास दूसरे दलों के साथ सेटिंग करने का समय न रहे। लेकिन, पार्टी के कुछ नेताओं को यह चिंता है कि इसके चलते उम्मीदवारों को चुनाव अभियान के लिए समय कम मिलेगा। हालांकि, राष्ट्रीय नेताओं ने प्रदेश और जिलास्तर के पदाधिकारियों को यही समझाया है कि बीजेपी काफी पहले से चुनाव मैदान में उतर चुकी है। वह अपनी ओर से चुनाव अभियान को धारदार तरीके से जारी रखें और जैसे ही नामों की घोषणा होती है, उम्मीदवार भी आगे बढ़कर प्रचार अभियान में जुट जाएंगे। बीजेपी से उलट कांग्रेस 224 में से 124 और जेडीएस 93 नामों की घोषणा कर चुकी है और अब वे दूसरी लिस्ट को फाइनल करने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस के भीतर भी मचा है घमासान
वैसे बाहरियों को टिकट देने की रणनीति को लेकर कांग्रेस के भीतर भी सबकुछ सामान्य नहीं है। पार्टी ने जैसे ही अपनी पहली लिस्ट जारी की कुछ कांग्रेसियों ने सोशल मीडिया पर विरोध में टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। उन्होंने वफादारों को नजअंदाज करके बाहरियों को टिकट दिए पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने टिकट का भरोसा देकर बीजेपी-जेडीएस नेताओं को पार्टी में शामिल करने के खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी। तब जाकर कांग्रेस की अनुशासन समिति को बयान जारी कर कहना पड़ा है कि यदि कोई पार्टी कार्यकर्ता या नेता किसी उम्मीदवार या नेता को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणियां करेगा तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि कांग्रेस में चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री बनने को लेकर सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच टकराव देखने को मिल रही है।













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