Karnataka Election 2023: कर्नाटक के चुनाव में अहम हैं ऑटो ड्राइवर्स, क्यों लुभाने में जुटे हैं राजनीतिक दल?
Karnataka Election 2023, कर्नाटक विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राज्य के राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए हर तरह के हथकंडे आजमा रहे हैं।

कर्नाटक का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है। वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपने वोटरों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। चुनावी तापमान बढ़ने के साथ ही कांग्रेस, बीजेपी और जेडी (एस) राज्य के ऑटो ड्राइवरों को लुभाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कर्नाटक की राजनीति में ऑटो ड्राइवर्स काफी अहम स्थान रखते हैं।
राज्य चुनावों में ऑटो ड्राइवर एक बड़ा वोट बैंक है। पिछले चुनावों में ड्राइवरों ने नेताओं के लिए केवल प्रचार करने और अभियान सामग्री वितरित करने का काम किया था। लेकिन इस बार के चुनावों में वे एक बड़ा वोट बैंक हैं। इन्हें लुभाने के लिए पार्टियां लगातार उनके पक्ष में घोषणाएं कर रही हैं।

राजनीति और ऑटो ड्राइवर
इसकी एक बानगी हाल में की गई जेडी (एस) की घोषणा है। जेडी (एस) ने वादा किया था कि, कर्नाटक में अगर उनकी सरकार बनाती है तो वह राज्य के हर रजिस्टर्ड ऑटो ड्राइवर को 2,000 रुपये की मासिक सहायता देंगे।
वहीं बीजेपी ने भी ऑटो ड्राइवरों को लुभाने की कोशिश की है। बीजेपी ने रायता विद्या निधि योजना के तहत उन बिरादरी के छात्र-बच्चों को सहायता देने के अपने बजटीय वादे की याद दिला रही है।
लेकिन इस बार के चुनाव में सबसे आगे चल रही कांग्रेस ने ऑटो ड्राइवरों को अपने पक्ष में करने के लिए अलग ही रणनीति बनाई है। पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में ड्राइवरों के साथ बातचीत में भाग लिया था।

इस दौरान डीके शिवकुमार ऑटो ड्राइवरों की खाकी वर्दी पहनकर कार्यक्रम स्थल पर दिखे थे। इस दौरान डीके ने ऑटो भी चलाया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके वीडियो भी काफी वायरल हुए थे। बेंगलुरु में हुए इस कार्यक्रम में कम से कम 2,000 ऑटो रिक्शा चालकों ने भाग लिया।
बड़ा वोट बैंक हैं ऑटो ड्राइवर
टीओआई के आंकड़े के मुताबिक, राज्य में करीब 7.7 लाख ऑटो (फरवरी के मध्य तक) पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग छह लाख से अधिक ऑटो एक्टिव हैं। अगर बेंगलुरु की बात करें तो बेंगलुरु में 3 लाख पंजीकृत ऑटो में से करीब 2.2 लाख एक्टिव मोड में हैं।
इस हिसाब से राज्य में लगभग 8 लाख और अकेले बेंगलुरु में लगभग 4.5 लाख ड्राइवर ऑटो बिजनेस में लगे हुए हैं। फेडरेशन ऑफ कर्नाटक ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स यूनियन के प्रमुख बीवी राघवेंद्र ने कहा, 'हम एक बहुत बड़ा वोट बैंक हैं।

बीवी राघवेंद्र ने कहा, जब इस संख्या में ऑटो ड्राइवरों के परिवारों और अन्य आश्रितों जैसे पेंटर्स, मैकेनिक्स और टिंकरिंग वर्करों को जोड़ते हैं, तो यह संख्या बहुत बड़ी हो जाती है। राजनीतिक दल हममें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हम सरकार की परिवहन नीतियों और बाइक टैक्सी का विरोध करते रहे हैं।
पार्टियों के लिए क्यों अहम ये ऑटो ड्राइवर
ब्रांड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑटो ड्राइवर ग्राउंड पर मौजूद सबसे अच्छे एंबेसडर होते हैं। राजनीतिक सलाहकार वेंकटेश थोगरीघट्टा का कहना है कि, 'ये एक बड़ा प्रभावशाली हिस्सा है। उनका जनता के साथ बहुत उच्च स्तर का संपर्क होता है। जो दल उन्हें अपनी ओर कर लेगा। उसे सीधा फायदा होगा।

राजनीतिक दल इन ऑटो ड्राइवर्स की मदद से एक बड़े मतदाता बेस तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरा, सर्वव्यापी ऑटो राजनीतिक अभियानों के लिए एक उपकरण हैं, वे कम लागत पर शानदार कवरेज प्रदान करते हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में ऑटो पर पार्टी स्टीकर, बैनर और पोस्टर प्रचार का एक बहुत प्रभावी तरीका है।












Click it and Unblock the Notifications