Karnataka Corruption: दक्षिणी दुर्ग में जनता की राय चौंकाने वाली, भ्रष्टाचार सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं!
कर्नाटक में 10 मई को वोटिंग होनी है, 13 मई को नतीजों की घोषणा होगी। किन मुद्दों पर जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनेगी, इसका अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, एक रिपोर्ट के अनुसार जनता के लिए करप्शन सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है।

Karnataka Corruption के कारण भले ही कई बार सुर्खियों में रहा है लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनाव 2023 में करप्शन not biggest poll issue के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि सत्तारूढ़ BJP के साथ Congress और JDS के नेताओं ने भी एक-दूसरे पर जमकर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के आरोपों पर public opinion क्या है, ये जानना बेहद दिलचस्प है।
भ्रष्टाचार कर्नाटक में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं है ये बात NDTV के पब्लिक ओपिनियन में उभरी है। इसके अनुसार अगले हफ्ते विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में लोगों के लिए बेरोजगारी सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बनकर उभर रहा है।
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कर्नाटक चुनाव पर एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में जनता ने गरीबी को दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा माना है। विकास की कमी, मूल्य वृद्धि, शिक्षा और भ्रष्टाचार जनता के दिमाग में चल रहे अन्य मुद्दों में शामिल हैं।
कर्नाटक में वोटिंग से पहले सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के एक शोध कार्यक्रम, लोकनीति और एनडीटीवी ने जनता के मिजाज का अनुमान लगाने के लिए सर्वेक्षण किया है।
इसमें 28 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि बेरोजगारी उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है, 25 प्रतिशत ने कहा कि उनका सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा गरीबी है। सात प्रतिशत लोगों ने कहा कि विकास, मूल्य वृद्धि और शिक्षा की कमी जैसे मुद्दे भी अहम हैं।
बता दें कि भ्रष्टाचार को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की है। पार्टी "40 प्रतिशत कमीशन" स्लोगन के साथ बीजेपी पर प्रहार कर रही है। कांग्रेस ने इसे प्राथमिक चुनावी मुद्दा बना लिया है, लेकिन केवल छह प्रतिशत प्रतिभागी इसे मुद्दा मानते हैं।
हालांकि, ये भी चौंकाने वाला है कि पिछले पांच वर्षों में (जब भाजपा सत्ता में रही है) भ्रष्टाचार बढ़ा है या नहीं, इस सीधे सवाल पर, आधे से अधिक प्रतिभागियों ने कहा कि करप्शन बढ़ा है।
51 फीसदी ने कहा कि भ्रष्टाचार बढ़ा है, 35 फीसदी ने कहा कि यह पहले जैसा ही है। 11 फीसदी ने कहा, करप्शन कम हुआ है। गौरतलब है कि बीजेपी के परंपरागत समर्थक भी मानते हैं कि पिछले पांच सालों में भ्रष्टाचार बढ़ा है।
सर्वेक्षण में भाग लेने वाले कांग्रेस समर्थकों में से 50 प्रतिशत ने कहा कि भ्रष्टाचार बढ़ा है। 41 प्रतिशत भाजपा समर्थक उत्तरदाताओं ने भी कहा कि भ्रष्टाचार बढ़ा है। जनता दल सेकुलर (JDS) के 73 प्रतिशत समर्थकों ने करप्शन बढ़ने की बात स्वीकार की।
पार्टी संबद्धताओं में कुल 57 प्रतिशत गैर-प्रतिबद्ध रहे। मुद्रास्फीति पर इनमें से अधिकांश (67 प्रतिशत) ने कहा कि कीमतें बढ़ी हैं। एक चौथाई से भी कम (23 प्रतिशत) ने कहा कि कीमतें पहले जैसी ही हैं।
अल्पमत के 9 प्रतिशत लोग ये भी मानते हैं कि कीमतें घटी हैं। इनसे विशेष रूप से पूछा गया था कि क्या पिछले पांच वर्षों में उनके क्षेत्रों में कीमतों में वृद्धि या कमी हुई है। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि युवा मतदाताओं के लिए बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण कर्नाटक में गरीबी बड़ी समस्या है।
28 फीसदी मतदाताओं ने कहा कि बेरोजगारी उनके लिए सबसे बड़ी समस्या है। जवाब देने वाली 38 फीसदी जनता 18 से 25 साल की उम्र की थी। 25 फीसदी लोगों ने कहा कि गरीबी सबसे बड़ी चिंता है, उनमें से 30 फीसदी ग्रामीण कर्नाटक, जबकि 19 फीसदी शहरी इलाकों से हैं।
सर्वेक्षण 20 से 28 अप्रैल के बीच किया गया था। सर्वेक्षण के लिए रैंडम तरीके से 21 विधानसभा क्षेत्रों के 82 मतदान केंद्रों में पंजीकृत कुल 2,143 मतदाताओं की राय ली गई। प्रत्येक मतदाता से लगभग 15-20 मिनट तक बात की गई। हर वर्ग और क्षेत्र के मतदाता सर्वे का हिस्सा थे।
प्रत्येक मतदान केंद्र में, SRS (सिस्टमेटिक रैंडम सैंपलिंग) पद्धति का उपयोग करके मतदाता सूची से 40 मतदाताओं के नाम चुने गए। इनमें से 25 लोगों से सवाल पूछे गए। प्रशिक्षित क्षेत्रीय अन्वेषकों ने वोटर्स के घरों में आमने-सामने सवाल किए।
ज्यादातर कर्नाटक के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र थे। 224 सदस्यीय विधानसभा वाले कर्नाटक के मद्देनजर सैंपल अपेक्षाकृत छोटा है। इसके बावजूद मतदाताओं की कुल संख्या कर्नाटक के मतदाताओं की सामाजिक वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करती है।












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