कर्नाटक: येदुरप्पा को ढाई दिन का सीएम बनाने वाले 8 किरदार

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नई दिल्ली। कर्नाटक की जनता ने किसी भी पार्टी को विधानसभा चुनाव में बहुमत नहीं दिया है। इसके बावजूद गवर्नर ने बीएस येदुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया। बिना पर्याप्त संख्या के बिना बीएस येदुरप्पा ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर तीसरी बार शपथ ली। लेकिन ढाई दिन बाद वह सदन में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए। जिसके चलते उन्होंने सदन में इस्तीफा दे दिया। बीएस येदुरप्पा के चेहरे से खुशियां छीनने में सबसे बड़ा हाथ कांग्रेसी नेता डीके शिवकुमार का माना जा रहे है। उन्होंने अपने चक्रव्यूह में येदुरप्पा को ऐसा फंसाया की उन्हें अंत में इस्तीफा ही देना बड़ा। कांग्रेस के ये वो आठ चेहरे हैं जिन्होंने बीजेपी के हाथ से कर्नाटक छीन लिया।

डीके शिवकुमार

डीके शिवकुमार

कर्नाटक में कांग्रेस के इस जीत का श्रेय अगर किसी एक शख्‍स को जाता है तो वो हैं डीके शिवकुमार। विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कांग्रेस ने शिवकुमार को सौंपी थी। इससे पहले गुजरात कांग्रेस के विधायकों को रखने का पूरा इंतजाम कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने किया था। एक बार फिर कांग्रेस विधायकों को बीजेपी की पहुंच से दूर रखने के लिए की जिम्मेदारी शिवकुमार को ही दी गई थी। जिसमें वे खरे उतरे। यही नहीं वे बीजेपी के चुंगल में फंसे कांग्रेसी विधायक आनंद सिंह, और प्रताप गौड़ा को निकलाने में सफल रहे। जिसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

गुलाम नबी आजाद

गुलाम नबी आजाद

राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के शीर्ष नेता गुलाम नबीं आजाद चुनाव परिणाम आने से पहले ही बेंगलुरु में डेरा डाले हुए थे। वह सुबह से ही चुनाव परिणामों पर नजर बनाए हुए थे। जब गुलाम नबीं आजाद को लगा कि कांग्रेस सरकार नहीं बना सकती है। तो उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सोनिया गांधी से बात की। हालांकि राहुल गांधी ने ऐसी स्थिति में फैसले लेने के अधिकार आजाद को दिए थे। सोनिया गांधी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एचडी देवगौड़ा से बात की। जिसके बाद राज्य की राजनीति का परिदृश्य ही बदल गया।

अशोक गहलोत

अशोक गहलोत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत काफी समय से कर्नाटक में मौजूद हैं। वह लगातार पार्टी को राज्य स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। पार्टी में नंबर दो का दर्जे रखने वाले गहलोत गुलाम नबीं को अपने सुझाव दे रहे थे। दरअसल कांग्रेस ने रणनीति बनाई थी अगर हम सत्ता से बाहर होते हैं तो बीजेपी को सत्ता में नहीं आने देगे। इस रणनीति को साकार करने के लिए गहलोत किसी भी तरह की कसर छोड़ना नहीं चाह रहे थे। जिसमें वे सफल भी रहे।

सोनिया गांधी

सोनिया गांधी

कर्नाटक में बीजेपी हाथों से सत्ता छीनने में सबसे बड़ा हाथ सोनिया गांधी का रहा है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी सर्वमान्य नेता है। सीनियर नेता होने के कारण सभी दलों में उनकी बहुत इज्जत है। गुलाम नबीं के फोन कॉल के बाद सोनिया गांधी ने जेडीएस संरक्षक एचडी देवगौड़ा को फोन किया औऱ उन्होंने उन्हें प्रस्ताव दिया। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

एचडी देवगौड़ा

एचडी देवगौड़ा

जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा और उनके बेटे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी किंग बनने के खेल में माहिर हैं। जेडीएस संरक्षक एचडी देवगौड़ा और सोनिया गांधी के बीच संबंध काफी अच्छे माने जाते हैं। इसके साथ ही विचारधारा के मामले में दोनों पार्टियां एक दूसरे के काफी नजदीक मानी जाती है। जिसका सीधा फायदा जेडीएस को मिला। सोनिया गांधी ने जब एचडी देवगौड़ा को फोन किया और उन्हें सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया तो वे झट से तैयार हो गए।

एचडी कुमारस्वामी

एचडी कुमारस्वामी

जेडीएस प्रमुख एचडी कुमारस्वामी को चुनावों से पहले एक किंगमेकर की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन अब खुद किंग बनने वाले हैं। कुमारस्वामी ने चुनाव प्रचार के दौरान गठबंधन की संभावनाओं से इंकार नहीं किया था। जिसका सीधा फायदा उन्हें सीएम की कुर्सी के तौर मिला।

सिद्धारमैया

सिद्धारमैया

कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया काफी कुशल राजनीतिज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने परिणाम आने से पहसे घोषणा कर दी थी कि अगर कोई दलित सीएम बनाया जाता है तो वह अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस के बहुमत से दूर रहने के बाद सिद्धारमैया ने कहा था कि, हम जेडीएस को समर्थन देंगे, वो सरकार बना सकते हैं। जेडीएस अपने मुख्यमंत्री का नाम तय कर सकती है।

मल्लिकार्जुन खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस पूरे घटनाक्रम की वह कड़ी हैं। जिसने सभी कड़ियों को आपस में जोड़कर रखा। राज्य की राजनीति की अंदर तक जानकारी रखने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे परिणामों पर लगातार नजर बनाए हुए थे। वह लगातार गुलाम नबीं आजाद को अपनी सलाह दे रहे थे। जिसके चलते गुलाम नबीं तत्काल सही फैसले लेने में सफल रहे।

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