Kargil War: कैसे एक सिक्के ने भारतीय जवान को PAK की गोली से बचाया? 23 साल बाद भी याद आता है वो खौफनाक मंजर
साल 1997 की फिल्म बॉर्डर आपको याद ही होगी। फिल्म में एक सीन था, जिसमें कैसे एक जवान को शादी की सुहागरात के दिन ही हेडक्वार्टर से बुलावा आ जाता है। जवान भारत माता के प्रति अपना फर्ज निभाने निकल पड़ता है। कुछ ऐसा ही किस्सा 1999 में कारगिल वॉर के हीरो योगेंद्र सिंह यादव के साथ भी हुआ था। इतना ही नहीं, कारगिल वॉर के दौरान एक सिक्के ने जवान की जान बचाई थी।
भले ही 23 साल इस वाक्य को बीत गए हों, लेकिन 20 मई की तारीख आते ही जवान की यादें फिर से हरी हो जाती हैं। कारगिल वॉर के हीरो योगेंद्र सिंह यादव बताते हैं कि 20 मई 1999 का दिन उनके लिए बेहद खास अहमियत रखता है। जिसे भुलाना उनके लिए नामुमकिन है। आइए जानते हैं कारगिल का किस्सा योगेंद्र की जुबानी...

योगेंद्र सिंह यादव बताते हैं कि 5 मई 1999 को मेरी तय थी। ढाई साल की नौकरी में छुट्टियां लेकर शादी के लिए घर पहुंचा। रीति रिवाजों के साथ शादी हुई। लेकिन, 20 मई को अचानक हेडक्वार्टर से कारगिल युद्ध के लिए बुलावा आया। सब कुछ छोड़कर हेडक्वार्टर लौट गया। पाकिस्तानी फौज ने तोलोलिंग पहाड़ी को अपने कब्जे में ले लिया था।
पाकिस्तानी फौज को दी टक्कर
योगेंद्र बताते हैं कि मेरी टीम के जांबाज फौजियों ने 22 दिन की लंबी लड़ाई के बाद तोलोलिंग पहाड़ी को पाकिस्तानी फौज से मुक्त करा लिया। फिर हमने तिरंगा फहराकर जश्न मनाया। अब अगला टास्क टाइगर हिल टॉप था। यह भी पाकिस्तानी फौज के कब्जे में थी। गोलीबारी के बीच जैसे-तैसे हमारी टीम आगे बढ़ती गई। पाकिस्तानी फौजी भाग खड़े हुए। मैंने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर लिया। लेकिन, कुछ मिनटों बाद पाकिस्तानी टीम ने फायरिंग शुरू कर दी।
पाक से लिया लोहा, सिक्के ने दिया जीवनदान
योगेंद्र के मुताबिक, मैं बुरी तरह घायल हो गया था। अचानक मैं वहीं धाराशाही होकर गिर गया। पाकिस्तानी फौजी जूतों से रौंदते हुए आगे बढ़ते गए। तभी एक पाकिस्तानी फौज ने मेरे हाथ और पैर पर गोली मारी। लहूलुहान मैं पड़ा था, पाक का एक फौजी आया और मेरे सीने पर गोली चलाई। लेकिन, मेरी जैकेट की जेब में रखे एक सिक्के ने गोली को मुझ तक पहुंचने नहीं दिया और मेरी जान बच गई।












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