... तो इसलिए हैं मोदी-जोशी के बीच दूरियां

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कानपुर में सोमवार की शाम प्रचार थम जाएगा। प्रचार थमने से एक दिन पहले मोदी ने यहां से 27 किलोमीटर दूर उन्नाव के अलावा पड़ोसी जिलों महोबा, फतेहपुर, झांसी में प्रचार किया, लेकिन उन्होंने कानपुर की तरफ झांका तक नहीं।
इस बारे में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि जब मोदी पड़ोस की अकबरपुर लोकसभा सीट पर पार्टी प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह भोले का प्रचार करने आये थे तो उन्होंने जोशी का भी प्रचार कर दिया था। लेकिन सच्चाई यह है कि उस सभा में मोदी ने केवल भोले के लिये ही वोट मांगे थे। वहीं एक दूसरे नेता का कहना है कि पिछले साल अक्टूबर 2013 में मोदी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पहली रैली कानपुर में की थी तो कानपुर को उसका कोटा मिल गया था।
गौरतलब है कि जब अक्टूबर में मोदी ने रैली की थी उस वक्त यह तय नहीं था कि कानपुर से कौन चुनाव लड़ेगा। यही नहीं जब तक जोशी ने मोदी की लहर नहीं बल्कि भाजपा की लहर वाला बयान भी नहीं दिया था।
तब तक शहर में जो भी पोस्टर या होर्डिंग लगी थी, उसमें केवल जोशी की ही तस्वीर होती थी और जोशी के नाम पर भाजपा के लिये वोट मांगे जा रहे थे। लेकिन इस बयान के बाद बवाल बढ़ने पर रातोंरात शहर में मोदी और जोशी के गले मिलते हुए की तस्वीरों वाली होर्डिंग लग गयी।
इसके विपरीत समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के प्रचार में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, बसपा प्रत्याशी के पक्ष में पार्टी सुप्रीमो मायावती आ चुकी हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज शाम कानपुर आ रहे हैं।












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