भोपाल में दिग्विजय सिंह के लिए प्रचार करेंगे कन्हैया कुमार

नई दिल्ली- भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार उनके पक्ष में प्रचार करने भोपाल आएंगे। उन्होंने कन्हैया कुमार के लिए पार्टी प्रत्याशी नहीं हटाने के लिए आरजेडी की भी आलोचना की है।

कन्हैया को लेकर महागठबंधन में मतभेद

कन्हैया को लेकर महागठबंधन में मतभेद

दिग्विजय सिंह के बयान से जाहिर हो गया है कि बिहार में एनडीए विरोधी गठबंधन में कन्हैया कुमार को लेकर गहरे मतभेद हैं। गौरतलब है कि जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को सीपीआई ने बिहार के बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया है। आरजेडी ने वहां से फिर तनवीर हसन को टिकट दिया है, जिनके पास अपना एक अच्छा-खासा जनाधार है। गौरतलब है कि एंटी मोदी राजनीति के तहत बॉलीवुड के गीतकार जावेद अख्तर ने भी आरजेडी से उम्मीदवार हटाने की गुहार लगाई थी, जिसे पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया था।

मैं कन्हैया कुमार का समर्थक- दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि, "मैं कन्हैया कुमार का समर्थक हूं। और मैं अपने पार्टी में इस बात को कहा कि आरजेडी ने बहुत बड़ी गलती की है और मैंने कोशिश की बात करने की ये सीट सीपीआई को देना चाहिए। और मुझे इस बात की खुशी है 8 और 9 को वो प्रचार करने भोपाल आ रहे हैं।" जाहिर है कि कन्हैया के भोपाल में दिग्विजय के लिए प्रचार करने के लिए पहुंचने पर बीजेपी को उनपर निशाना साधने का एक और बड़ा मौका मिल जाएगा।

कन्हैया बनाम गिरिराज

कन्हैया बनाम गिरिराज

बता दें कि बिहार के बेगूसराय संसदीय सीट में सोमवार को चौथे दौर में वोटिंग हो रही है। यहां सीपीआई के कन्हैया कुमार का मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से है। लेकिन, यहां आरजेडी उम्मीदवार के चलते कन्हैया की लड़ाई बहुत कठिन हो गई है और मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कन्हैया कुमार की जीत सुनिश्चित कराने के लिए पूरे देश के वामपंथी विचारधारा के समर्थक लोग कई दिनों तक आरजेडी पर अपना प्रत्याशी हटाने के लिए दबाव बनाए हुए थे। लेकिन, लालू के बेटे यह सीट छोड़ने के लिए कत्तई तैयार नहीं हुए। बेगूसराय बिहार का एक भूमिहार जाति बहुल क्षेत्र है और गिरिराज एवं कन्हैया दोनों उसी जाति से आते हैं। अगर आरजेडी अपना उम्मीदवार हटा लेती, तो यहां का मुस्लिम वोट कन्हैया को मिल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण ही कन्हैया समर्थक नेता और बुद्धिजीवी परेशान हैं। गौरतलब है कि कन्हैया पर 2016 के फरवरी में जेएनयू में लगे देशद्रोही नारेबाजी के आरोप हैं, जिनपर चार्जशीट दायर करने में दिल्ली की आम आदमी सरकार के फैसले के चलते देरी हो रही है और यह मामला अदालत में है।

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