खतरे में पड़ी कंगना रनौत की सांसदी, कोर्ट ने नोटिस भेजकर मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला
हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कंगना रनौत को उनके चुनाव को लेकर नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस लायक राम नेगी की याचिका पर कोर्ट ने जारी की है। राम नेगी का दावा है कि उनके नामांकन पत्र को गलत तरह से खारिज किया गया था। जस्टिस ज्योत्सना रेवाल ने कंगना रनौत को निर्देश दिया है कि वह नोटिस का 21 अगस्त तक जवाब दें।

चुनाव को चुनौती
बता दें कि राम नेगी पूर्व सरकारी कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से नौकरी से रिटायरमेंट ली थी, उन्होंने नो ड्यूस सर्टिफिकेट भी अपने विभाग से हासिल किया था। इसे उन्होंने अपने नामांकन पत्र में भी लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तमाम जरूरी दस्तावेज लगाने के बाद भी उनके नामांकन को खारिज किया गया।
मांगे गए गैर जरूरी दस्तावेज
नेगी ने कहा कि उनसे बिजली बिल, पानी का बिल, टेलीफोन का बिल का भी नो ड्यूट विभाग की ओर से लाने के लिए कहा गया। नियमानुसार होने के बाद भी उनके नामांकन को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उनके साथ हुए इस बर्ताव की वजह से उन्हें चुनाव में जीतने का मौका गंवाना पड़ा।
नेगी ने 14 मई को एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया और 15 मई तक सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए। उन्होंने बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके दस्तावेजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यही वजह है कि उन्होंने चुनाव परिणामों को चुनौती देने का फैसला लिया है।
कंगना ने विक्रमादित्य सिंह को हराया
बता दें कि कंगना रनौत ने मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को 74,755 वोटों से हराया था। रनौत को 5,37,002 वोट मिले, जबकि विक्रमादित्य सिंह को 4,62,267 वोट मिले। इस जीत के साथ ही कंगना की राजनीति में एंट्री हुई और वह चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची।
गलत तरीके से खारिज हुआ नामांकन
लेकिन नेगी का कहना है कि अगर उनका नामांकन स्वीकार कर लिया जाता तो वे चुनाव जीत सकते थे। अब उन्होंने अपील की है कि चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाए क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी उम्मीदवारी को अनुचित तरीके से खारिज किया गया है।
21 अगस्त तक दें जवाब
वहीं न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल ने कंगना रनौत को 21 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत नेगी के आरोपों पर विचार करेगी और यह निर्धारित करेगी कि उनके नामांकन पत्र को खारिज करने में कोई गलत काम हुआ था या नहीं।
यह मामला नामांकन प्रक्रिया में चुनावी निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उजागर करता है। यह सुनिश्चित करने के महत्व को दर्शाता है कि सभी उम्मीदवारों को बिना किसी अनुचित बाधा के चुनाव लड़ने का निष्पक्ष अवसर दिया जाए।
दरअसल कोर्ट ने इस पूरे मामले में कंगना रनौत से जवाब मांगा है। ऐसे में अगर कोर्ट इस मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया को रद्द करता है। कंगना रनौत की सांसदी खतरे में पड़ सकती है।












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