Kanchanjunga Train Accident: बंगाल ट्रेन हादसे में किसकी गलती? दुर्घटना को लेकर हुआ बड़ा खुलासा
Kanchanjunga Express Accident: पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के पास एक भीषण ट्रेन हादसे में 15 लोगों की जान चली गई। अगरतला से सियालदह जा रही कंचनजंगा एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13174) में एक मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी। इस जोरदार टक्कर में कंचनजंगा एक्सप्रेस के करीब 4 डब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर है जबकि अन्य 60 लोग घायल हो गए हैं।
दुर्घटना के बाद से ही इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हादसा कैसे हुआ? पटरी पर खड़ी ट्रेन को मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर कैसे मार दी? इस भीषण ट्रेन हादसे को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जानकारी के अनुसार ट्रेन के लोको पायलट ने सिग्नल को नजरअंदाज कर दिया था, इस कारण ये भयंकर हादसा हुआ।

रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने बताया, "आज कंचनजंगा ट्रेन का एक्सीडेंट हुआ है। मालगाड़ी के ड्राइवर ने यात्री ट्रेन को टक्कर मारी। शुरुआती जानकारी से पता चला है कि मालगाड़ी के चालक ने सिग्नल की अनदेखी की थी। इस वजह से पैसेंजर ट्रेन के सबसे पीछे का गार्ड का डिब्बा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और आगे दो पार्सल वैन के डिब्बे थे, जो क्षतिग्रस्त हुए।"
उन्होंने बताया, "बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है। मालगाड़ी के ड्राइवर (लोको पायलट) ने सिग्नल को पूरी तरह से नजरअंदाज किया था। इस दुर्घटना में मालगाड़ी के चालक और कंचनजंगा के गार्ड की भी मौत हुई है। अगरतला-सियालदाह रूट पर सभी रेलवे स्टेशनों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं।"
मानवीय चूक की वजह से हुआ हादसा
जया वर्मा सिन्हा ने बताया कि दुर्घटना मानवीय चूक की वजह से हुई प्रतीत हो रही है। उन्होंने कहा, "प्रथम दृष्टया इस दुर्घटना में मानवीय चूक सामने आई है। लेकिन सही जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगी। हमारी पूरी कोशिश है कि ट्रेन दुर्घटनाओं को रोका जा सके, इसके लिए कवच हमारी प्राथमिकता है। इसे मिशन मोड में बढ़ाया जा रहा है।"
कब और कैसे हुआ बंगाल में ट्रेन हादसा
सियालदह जाने वाली कंचनजंघा एक्सप्रेस सुबह करीब 8:55 बजे पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के कटिहार डिवीजन में रंगपानी-छत्तर हाट खंड के पास एक जीएफसीजे कंटेनर मालगाड़ी से टकरा गई। टक्कर के कारण कंचनजंघा एक्सप्रेस के पिछले चार डिब्बे और सामने के इंजन सहित मालगाड़ी के पांच कंटेनर क्षतिग्रस्त हो गए। सहायता के लिए हावड़ा इस्पात एक्सप्रेस का पिछला इंजन भेजा गया।
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