मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 17 दिसंबर को भोपाल में शपथ लेंगे कमलनाथ
नई दिल्ली। गुरुवार देर रात आखिरकार मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया और कमलनाथ को प्रदेश की कमान सौंपने का फैसला किया गया। राहुल गांधी के साथ चली लंबी बैठक के बाद कमलनाथ के नाम पर मुहर लगा दी गई। दिल्ली से भोपाल पहुंचे कमलनाथ ने विधायक दल की बैठक की। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ के नाम का ऐलान किया गया। कमलनाथ मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री होंगे। कमलनाथ 17 दिसंबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद कमलनाथ ने कहा, 'मध्य प्रदेश की जनता का आभारी हूं। मध्य प्रदेश का भविष्य सुरक्षित रहेगा। मेरी कोशिश होगी कि मैं जनता के विश्वास के काबिल बना रहूं। हमने अपने शपथपत्र में जो वादा किया वह पूरा करेंगे। मुझे पद की कोई भूख नहीं। मेरी कोई मांग नहीं थी। मैनें अपना पूरा जीवन बिना किसी पद की लालसा के कांग्रेस को समर्पित किया।'
कमलनाथ के नाम पर सहमति बनने से पहले कई दौर की बैठक हुई, भोपाल से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा थी कि आखिरकार मध्य प्रदेश के सीएम की बड़ी जिम्मेदारी राहुल गांधी किसे सौंपेंगे। अनुभव के मामले में कमलनाथ ज्योतिरादित्य पर भारी पड़े तो संगठन के काम-काज संभालने में दक्षता भी उनके पक्ष में रही। कमलनाथ संजय गांधी के करीबी रहे हैं और इंदिरा गांधी के साथ भी वे काम कर चुके हैं।












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