'सायनाइड मल्लिका': भारत की पहली महिला सीरियल किलर जो दोषी साबित हुई
बंगलूरू। इस बात के कोई आधिकारिक आंकड़े तो नहीं हैं, लेकिन ये कहा जाता है कि केडी केंपाम्मा यानी 'सायनाइड मल्लिका' भारत की पहली महिला सीरियल किलर थी, जो दोषी साबित हो पाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंपाम्मा बंगलूरू के पास स्थित कगालिपुरा गांव की रहने वाली थी।

उसने एक दर्जी से शादी की थी। वो अपना खुद का चिट फाइनेंस का कारोबार संभालती थी। बाद में केंपाम्मा का व्यापार बर्बाद हो गया, उसका पति उसे छोड़कर चला गया और उसे उसके घर से भी निकाल दिया गया। ये सब साल 1998 में और उससे पहले हुआ था।
पहली हत्या
साल 1999 में केंपाम्मा ने पहली हत्या कर अपराध की दुनिया में कदम रखा। उसने 30 साल की ममता राजन की हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि जिस वक्त ममता की हत्या हुई, तब वह प्रार्थना कर रही थी। यह उसका सामान्य तरीका भी साबित हुआ। वह मंदिरों में आने वाली महिलाओं को देखती थी और उन्हें निशाना बनाती थी, जो कष्ट में दिखाई देती थीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह परेशान महिलाओं से दोस्ती कर लेती थी और कहती थी कि वह उनकी समस्याओं का हल पूजा और अनुष्ठानों से कर सकती है। पूजा के बाद वो पीड़ितों को सायनाइड वाला पानी का गिलास देती थी, जिसके बाद वो पीड़ितों का कीमती सामान चुरा लेती थी।

सात ज्ञात हत्या
साल 2000 में केंपाम्मा को एक घर से महंगा सामान चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहां उसे अनुष्ठान करने के लिए बुलाया गया था। लेकिन जिस महिला को वो निशाना बनाना चाहती थी वह चिल्लाते हुए घर से निकल गई और उसे उसके परिवार ने बचा लिया। हालांकि केंपाम्मा इस अपराध के लिए महज 6 महीने ही जेल में रही।
साल 2007 में केंपाम्मा ने तीन महीने के भीतर ही तीन महिलाओं की हत्या कर दी थी और उनका सामान चुरा लिया। सभी मामलों में उसके सामान्य तरीके जैसे परेशान महिलाएं, एक पवित्र अनुष्ठान, सायनाइड-लैस पेय पदार्थ और डकैती शामिल थे। केंपाम्मा महिलाओं को बेटा पैदा होने, अस्थमा का इलाज करने और अन्य वादे कर लूटा करती थी।

2008 में गिरफ्तार
साल 2009 में पता चला कि पांच लापता लोगों के मामले इस सीरियल किलर से जुड़े हुए हैं। एक पीड़ित का शव बरामद हो गया था और इसे केंपाम्मा से जुड़ा हुआ पाया गया था। बाकी लापता लोगों के परिवार और पुलिस को संदेह हो रहा था कि इन मामलों में भी केंपम्मा ही जिम्मेदार है। क्योंकि उसका इन सभी से एक जैसा ही लिंक था।
उसे साल 2008 में गिरफ्तार कर लिया और उसने सबकुछ कबूल कर लिया। केंपम्मा ने कहा कि ये सब करने का उसका उद्देश्य केवल चोरी करना ही था। पुलिस को उसके सहयोगी का भी पता चला जो, जयअम्मा के नाम से काम कर रहा था। केंपम्मा को 60 साल की मुनियाम्मा और 30 साल की नागावेनी की हत्या करने पर दो उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद उसे कई अन्य मामलों में भी दोषी पाया गया। उसकी दूसरी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था।

शशिकला के बगल वाला बैरक
केंपम्मा का नाम साल 2017 में फिर से मीडिया में आया। वह तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की राजनीतिक सहयोगी शशिकला के बगल वाले बैरक में थी। जिन्हें कर्नाटक की परापान अग्रहारा जेल में रखा गया था और शशिकला को संपत्ति से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था।
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