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Justice BR Gavai: 52वें चीफ जस्टिस के रुप में कार्यभर संभालने वाले बीआर गवई के ऐतिहासिक फैसले

Justice BR Gavai Next CJI: सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई के नाम की सिफारिश कर दी है। यह सिफारिश परंपरा के अनुसार केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दी गई है जस्टिस गवई 14 मई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालेंगे।

CJI खन्ना के बाद वरिष्ठता सूची में जस्टिस गवई का नाम है। इसलिए जस्टिस खन्ना ने उनका नाम आगे बढ़ाया है। हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ 7 महीने का होगा।

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Justice Gavai Next CJI: संजीव खन्ना की सिफारिश

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में परंपरा रही है कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करते हैं बशर्ते कि कानून मंत्रालय उनसे ऐसा करने का अनुरोध करे। मौजूदा CJI संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हो रहा है। वरिष्ठता के क्रम में उनके बाद जस्टिस गवई का ही नाम आता है, इसलिए यह सिफारिश एक औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।

हालांकि, जस्टिस गवई का कार्यकाल सिर्फ सात महीने का होगा क्योंकि वे 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लेकिन इन सात महीनों में वे भारतीय न्याय व्यवस्था की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठकर इतिहास रचने वाले हैं।

Next CJI Justice BR Gavai: ऐतिहासिक फैसलों में भूमिका

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान, जस्टिस गवई कई बड़े और चर्चित फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इनमें दो निर्णय विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

  • नोटबंदी को माना संवैधानिक

केंद्र सरकार द्वारा 2016 में लागू की गई नोटबंदी को संवैधानिक मानते हुए इसे बरकरार रखा गया। इस फैसले में जस्टिस गवई की भूमिका निर्णायक रही।

  • चुनावी बॉन्ड योजना

इस योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले बहुचर्चित फैसले में भी वे शामिल रहे, जिसने राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी।भारत के सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई का नाम उन न्यायाधीशों में गिना जाता है जिन्होंने अपने निर्णयों से ना केवल भारतीय संविधान की गरिमा को बनाए रखा, बल्कि समाज के विभिन्न तबकों के हितों की भी रक्षा की।

जस्टिस गवई ने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं जो आने वाले वर्षों तक भारत की न्यायिक व्यवस्था की दिशा और दशा तय करेंगे। यह लेख उनके कुछ सबसे महत्वपूर्ण फैसलों, उनके सामाजिक प्रभाव और उनके कानूनी महत्व की गहराई से समीक्षा करता है।

  • सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर ऐतिहासिक टिप्पणी

जस्टिस बी.आर. गवई उस संवैधानिक पीठ का हिस्सा रहे जिसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर महत्त्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं। इस पीठ ने साफ कहा था कि न्यायपालिका किसी भी सत्तारूढ़ सरकार के दबाव में नहीं हो सकती। गवई ने कहा था, "न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल एक संवैधानिक सिद्धांत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है।" उनका यह कथन आज भी विधि विद्यार्थियों और न्यायिक चर्चाओं में उद्धृत होता है।

  • EWS आरक्षण को संवैधानिक ठहराने वाला फैसला

भारत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को दिए गए 10% आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक संवैधानिक चुनौती आई थी। पाँच जजों की बेंच में शामिल जस्टिस गवई ने इस आरक्षण को संवैधानिक मान्यता दी थी उन्होंने कहा कि आरक्षण अब केवल सामाजिक या शैक्षणिक पिछड़ेपन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।

  • पर्यावरण और विकास के संतुलन पर फैसला

जस्टिस गवई ने पर्यावरण से जुड़े एक फैसले में लिखा था कि "विकास आवश्यक है, लेकिन उस विकास की कीमत प्रकृति की तबाही नहीं हो सकती।" यह निर्णय उन मामलों में आया जहाँ सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए वन भूमि का हस्तांतरण किया था।

  • प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्य

एक मीडिया हाउस के खिलाफ दायर मानहानि मामले में जस्टिस गवई ने प्रेस की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, "स्वतंत्र प्रेस किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है। उसे डराने-धमकाने के प्रयास अस्वीकार्य हैं।" इस फैसले ने मीडिया को राहत देते हुए एक मिसाल कायम की कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी अन्य कानून से ऊपर है जब तक वह सार्वजनिक व्यवस्था या नैतिकता का उल्लंघन न करे।

  • दलित अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की पक्षधरता

जस्टिस गवई स्वयं एक दलित समुदाय से आते हैं और उनके निर्णयों में सामाजिक न्याय की स्पष्ट झलक दिखती है। एक फैसले में उन्होंने कहा कि "जाति आधारित भेदभाव केवल संवैधानिक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा के खिलाफ है।"
उन्होंने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के संरक्षण अधिनियम (SC/ST Act) को लेकर आए फैसलों में इसकी शक्ति को बनाए रखा और कहा कि इसकी आवश्यकता अब भी बनी हुई है।

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