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रेप-विरोधी कार्टून पर पत्रकार को मिली धमकियां

By Bbc Hindi
रेप-विरोधी कार्टून पर पत्रकार को मिली धमकियां

भारत की पत्रकार और कार्टूनिस्ट स्वाति वडलामुडी ने अपने एक कार्टून के लिए सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने के बाद कहा है कि वे किसी के आगे नहीं झुकेंगी.

स्वाति वडलामुडी ने एक कार्टून बनाया था, जिसमें हिंदू भगवान राम और उनकी पत्नी सीता के बीच का एक वार्तालाप का ज़िक्र है.

इसका मकसद हाल के कुछ बलात्कार के मामलों में अभियुक्तों का समर्थन करने वाले दक्षिणपंथी तत्वों की आलोचना करना था.

कार्टून में सीता अपने पति राम से कहती हैं कि वह खुश हैं कि उनका अपहरण दानवों के राजा रावण ने किया न कि उनके पति के भक्तों ने.

वडलामुडी कहती हैं कि इन धमकियों ने उन्हें मज़बूत किया है.

कार्टून हुआ वायरल लेकिन हुआ विवाद

इस कार्टून को सोशल मीडिया पर हज़ारों बार शेयर किया गया है.

लेकिन उन्होंने जिस तरह हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामायण के पात्रों का इस्तेमाल किया है, उससे विवाद पैदा हो गया है.

वडलामुडी ने बीबीसी तेलुगू सेवा के संवाददाता पृथ्वी राज से बातचीत में कहा है कि इस तरह के व्यंग्य कार्टून बनाना उनकी आदत में शुमार है और ये कार्टून बीते हफ़्ते ख़बरों में आए दो रेप केसों की निंदा करने के लिए बनाया गया था.

भारत प्रशासित कश्मीर के कठुआ ज़िले में आठ साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या के अभियुक्तों के समर्थन में आयोजित रैली में बीजेपी के दो मंत्रियों के पहुंचने के बाद पूरे देश में आक्रोश देखा गया था.

इसी तरह उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में लड़की ने बीजेपी विधायक पर रेप का आरोप लगाने के बाद आत्मदाह की कोशिश की थी.

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अगर 'राम भक्तों' ने किया होता 'सीता-हरण'?

स्वाती वडलामुडी ने बीबीसी से कहा है कि दोनों मामलों में भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी शामिल है, चाहें नेताओं ने अपराध किया हो या उनके समर्थक जिन्होंने अपराधियों का समर्थन किया है."

वह कहती हैं कि जिन लोगों ने, अभियुक्तों का बचाव किया या उनकी बेगुनाही पर जोर दिया, अपने आपको राम भक्त कहते हैं.

स्वाती वडलामुडी बताती हैं कि इन अपराधों की वीभत्सता को देखते हुए वह इस सोच में पड़ गईं कि अगर इन कथित राम भक्तों ने सीता का अपहरण किया होता तो क्या होता?

कार्टून छपने के बाद उन्हें इंटरनेट पर कई धमकियां मिलीं और कई लोगों ने उनकी गिरफ़्तारी की मांग भी की है.

कुछ धमकियों में कट्टर हिंदुत्व की आलोचना के लिए चर्चित पत्रकार गौरी लंकेश का भी ज़िक्र था, जिनकी हत्या कर दी गई थी.

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'धमकियां रात में सोने भी नहीं देतीं'

स्वाती वडलामुडी कहती हैं कि उन्हें धमकियां मिलने के बाद से उनका परिवार काफ़ी चिंतित है. "धमकियां मिलने के बाद से मैं रात में सो भी नहीं पाती हूं."

पुलिस ने एक दक्षिणपंथी समूह की शिकायत के बाद स्वाति के ख़िलाफ़ एक केस दर्ज किया है.

दक्षिणपंथी समूह की शिकायत है कि इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

महिला संगठनों और भारतीय पत्रकार संघ ने इसे प्रेस के ऊपर हमला करार दिया है.

बीते कुछ सालों में कट्टर हिंदुत्व की आलोचना करने वाले पत्रकारों को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा है.

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट नाम की एक एनजीओ के मुताबिक़, भारत में साल 1992 से अब तक अपना काम करते हुए 27 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है.

BBC Hindi
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English summary
Journalist threats against anti-rape cartoon

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