Joshimath sinking: बद्रीनाथ का प्रवेश द्वार अपने ही भार से क्यों धंस रहा है ?

देवभूमि उत्तराखंड में पवित्र बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब का प्रवेश द्वार कहलाने वाले जोशीमठ में जमीन में धंसने लगी है। वहां इमारतों में पड़ी दरारें चौड़ी हो रही हैं, पहाड़ों के हिस्से से जल रिसाव शुरू हो चुका है।

joshimath-uttarakhand-gateway-of-badrinath-is-sinking-under-its-own-load-why

उत्तराखंड के जोशीमठ के हजारों निवासियों की सांसें अटकी हुई हैं। उन्हें हर पल किसी 'प्रलय' की आशंका सता रही है। पता नहीं कब पवित्र बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब का प्रवेश द्वार कहलाने वाला यह सुंदर छोटा सा पहाड़ी शहर पूरा का पूरा जमीन के अंदर समा जाए! यह स्थिति अचानक नहीं, दशकों में पैदा हुई है। दिक्कत ये है कि इस समय यह समस्या बहुत ही भयावह शक्ल अख्तियार कर चुकी है। बिल्डिंगों में दरारें पड़ रही हैं। शहर में जमीन के अंदर और पहाड़ों से मटमैला पानी रिस रहा है। लोगों को अपना बसा-बसाया घर छोड़कर दूसरी जगहों पर शरण लेने की नौबत आ चुकी है।

Recommended Video

    Uttrakhand: Chamoli के Joshimath में घरों में दरारों के बाद निकलने लगा पानी | वनइंडिया हिंदी |*News

    जोशीमठ में दरारें चौड़ी हो रही हैं

    जोशीमठ में दरारें चौड़ी हो रही हैं

    दशकों पहले ही शोध में यह बात सामने आ चुकी थी कि जोशीमठ की सतह कमोजर है। लेकिन, इसके बावजूद ना तो इमारतों का निर्माण रुका और ना ही रोड बनने बंद हुए। ऊपर से बिजली परियोजनाओं पर भी जोरदार तरीके से अमल होता रहा। जोशीमठ में दरारों की समस्या नई नहीं है। यह कम से कम दो दशकों से नजर आती रहती है। लेकिन,पिछले कुछ दिनों में यह समस्या बहुत ही भयावह हो गई है। देखते ही देखते दरारें चौड़ी होने लगी है। यूं लगता है कि यहां बस अब धरती फटने ही वाली है और सबकुछ उसके अंदर समाने वाला है। इस भयानक स्थिति ने करीब 25,000 की आबादी वाले बद्रीनाथ धाम के प्रवेश द्वार कहलाने वाले देवभूमि के इस कस्बे के लोगों को डरा दिया है। 22 दिसंबर की बात है। इस इलाके की जीवन रेखा मानी जाने वाली हेलंग-जोशीमठ हाइवे मारवाड़ी के पास धंस गई।

    'करीब 500 घरों में दरारें पड़ गईं'

    'करीब 500 घरों में दरारें पड़ गईं'

    जोशीमठ उत्तराखंड के चमोली जिले में है, जो गढ़वाल हिमालय में 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। देवभूमि उत्तराखंड में स्थित इस जगह का महत्त्व इस वजह से है, क्योंकि इसे पवित्र बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब का प्रवेशद्वार माना जाता है। यही नहीं, स्कीइंग के लिए मशहूर औली और यूनेस्को (Unesco) के विश्व धरोहर फूलों की घाटी ( Valley of Flowers) का रास्ता भी यहीं से गुजरता है। टीओआई के एक रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ के पूर्व ब्लॉक प्रेसिडेंड 63 साल के ठाकुर राणा का दावा है कि 'पिछले 24 महीनों में करीब 500 घरों में दरारें पड गई हैं।' राणा का वहां एक होटल है, जिनके मुताबिक इलाके में 2021 में हुई रैनी डैम तबाही के बाद संकट और भयावह हो गया है और 'दरारें रोज चौड़ी होने लगी हैं।' बावजूद इसके इलाके में निर्माण का काम नहीं थमा है। दुर्गा प्रसाद सकलानी नाम के एक शख्स जो सबसे ज्यादा प्रभावित गांव में से एक सुनील में रहते हैं, उनका कहना है, 'मैंने 8-9 महीने पहले ही अपना नया घर बनाया है। फ्लोर में धंसाव की वजह से अब दो कमरे रहने लायक नहीं रह गए हैं और दीवारों में बहुत बड़ी दरारें पड़ गई हैं।' यहां के निवासी हाल ही में देहरादून जाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक को त्राहिमाम संदेश दे आए हैं, जिन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल रिपोर्ट देने और उचित कदम उठाने को कहा है।

    जोशीमठ ने चेतावनियों को किया नजरअंदाज!

    जोशीमठ ने चेतावनियों को किया नजरअंदाज!

    1976 में ही एक मिश्रा कमिटी ने क्षेत्र की भयानक स्थिति को लेकर चेतावनी दे दी थी। इसमें कहा गया था कि 'सड़कों की मरम्मत या बाकी निर्माणों के लिए पहाड़ों पर खुदाई करके या ब्लास्ट करके बोल्डर्स हटाना सही नहीं रहेगा....इस क्षेत्र में पेड़ों को बच्चों की तरह पालना-पोसना होगा।' हाल ही में स्थानीय निवासीयों ने एक स्वतंत्र कमिटी से सर्वे कराया था, जिसने जून 2021 में कहा था कि 'आगे और खुदाई कार्यों से जोशीमठ धंस जाएगा।' इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट से बहाल चारधाम प्रोजेक्ट पर नजर रखने वाले पैलन के सदस्य और जियोलॉजिस्ट नवीन जुएल भी शामिल थे। इसने मल्टीइंस्टीट्यूशनल एक्सपर्ट से व्यापक सर्वे करने का सुझाव दिया था।

    जोशीमठ अपने ही भार से क्यों धंस रहा है ?

    जोशीमठ अपने ही भार से क्यों धंस रहा है ?

    उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने इन्हीं सुझावों के आधार पर जियोलॉजिकल और जियोटेक्निकल सर्वे के लिए 2022 के अगस्त में मल्टीइंस्टीट्यूशनल टीम गठित भी की। इस टीम ने पिछले साल सितंबर में अपनी रिपोर्ट में कहा कि जोशीमठ 'एक अस्थिर नींव पर स्थित है- भूस्खलन सामग्री की एक मोटी परत पर, जो कि भारी बारिश,भूकंप के झटके, अनियमित निर्माण या ज्यादा लोगों के आने की स्थिति में बिखर सकता है...' इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्राकृतिक रूप से कमजोर नींव पर स्थित होने के साथ ही जोशीमठ-औली रोड पर जिस तरह से घरों, रिजॉर्ट और छोटे होटल बन गए हैं, उसमें इस छोटे से शहर की क्षमता का ख्याल नहीं रखा गया है, जिसकी वजह से यह धंसाव हो रही है।

    सुरंग भी बन रही है समस्या ?

    सुरंग भी बन रही है समस्या ?

    हालांकि, जोशीमठ के कुछ निवासियों का आरोप है कि एनटीपीसी के तपोवन-विष्णुगढ़ 520 मेगावॉट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए बन रही 12 किलोमीटर लंबी सुरंग भी समस्या बढ़ने का कारण है। 2021 के फरवरी में अचानक आई बाढ़ के चलते इसी प्रोजेक्ट में तबाही मची थी, जिसमें 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। यहां बन रही सुरंग तपोवन बैराज से शुरू होती है, जो कि जोशीमठ से 15 किलोमीटर दूर है और सेलंग पावरहाउस पर आकर खत्म होती है, जो कि जोशीमठ शहर से पांच किलोमीटर दूर है। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल साती ने कहा है कि 17 मार्च, 2010 को एनटीपीसी ने माना था कि 'एक जलभंडार (aquifer) पंक्चर होने से सुरंग में पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे जोशीमठ का जलस्रोत सूख जाएगा।'

    जोशीमठ का हो सकता है बलून वाला हाल ?

    जोशीमठ का हो सकता है बलून वाला हाल ?

    एक बड़े पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने उसी अखबार से कहा कि 'जोशीमठ पहाड़ी क्षेत्र के अंदर जलभंडार के पंक्चर होने का मतलब है कि यह बलून से रिसाव की तरह काम करेगा, जो कि धीरे-धीरे ढह जाता है।' चोपड़ा के मुताबिक 'जलभंडार (aquifer) अब पानी से रहित है और इसके ऊपर के भार को उठाने में सक्षम नहीं है।' वैसे हाल ही में एनटीपीसी के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया वालों को सुरंग में लेकर गए थे और दावा किया था कि यह सूखी है। मतलब, जोशीमठ में भू धंसाव इस प्रोजेक्ट की वजह से नहीं हो रही है।

    एक और जलभंडार फटने से बढ़ी दहशत

    एक और जलभंडार फटने से बढ़ी दहशत

    मंगलवार को जोशीमठ में धंसाव की समस्या तब और गंभीर हो गई जब एनटीपीसी के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के पास एक और जलभंडार (aquifer) फट गया। इसके बाद करीब 25 परिवारों ने दहशत में अपना घर-द्वार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर कूच करना शुरू कर दिया। शहर में मलबे वाले पानी के रिसाव शुरू होने से यह दहशत फैल गई कि ये कस्बा जहां बसा हुआ है, वह ढहने वाला है। 2010 में भी एक जलभंडार फटा था, जिससे जोशीमठ में पानी भर गया था। बुधवार को माउंट व्यू होटल के पीछे रहने वाला 6 परिवार नगरपालिक की इमारत में शिफ्ट कर गया। क्योंकि, वह होटल झुक गया है। वहीं करीब एक दर्जन लोगों को गांधीनगर से निकाला गया है। कुल मिलाकर वहां की स्थिति डरावनी हो चुकी है और कोई भी फैसला लेने के लिए ज्यादा समय नहीं रह गया लगता है।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+