जेएनयू के वीसी को 11 दिसंबर को ही HRD मंत्रालय ने दिया था अल्टीमेटम, 'शांति फॉर्मूला अपनाओ या इस्तीफा दो'

नई दिल्ली। जेएनयू में जिस तरह से हाल ही में हिंसा हुई उसके बाद तमाम छात्र विश्वविद्यालय के वीसी जगदीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार जगदीश कुमार को तकरीबन एक महीने पहले 11 दिसंबर को अल्टीमेटम दिया गया था। उन्हें कहा गया था कि या तो छात्रों के साथ टकराव को खत्म करने के लिए जो फॉर्मूला दिया जा रहा है उसे स्वीकार करें या फिर अपने पद से इस्तीफा दे दें। वीसी को दिए गए इस अल्टीमेटम के दो दिन बाद ही तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

रखी गई थी शर्त

रखी गई थी शर्त

वीसी को मंत्रालय की ओर से जो फॉर्मूला दिया गया था उसमे कहा गया था कि जेएनयू प्रशासन सिर्फ कमरे के बढ़ी हुई फीस लेगा जबकि अन्य सेवाओं का चार्ज यूजीसी वहन करेगी। जिसके बाद छात्रों को अपना प्रदर्शन खत्म करना होगा और विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करेंगे। प्रदर्शन की वजह से पढ़ाई को हुए नुकसान की भरपाई के लिए विश्वविद्यालय से कहा गया कि सेमेस्टर को दो हफ्ते आगे बढ़ाया जाए। मंत्रालय की ओर से यह भी सुझाव दिया गया था कि यूनिवर्सिटी छात्र संगठनों को सुझाव दे और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस शिकायत वापस ले।

11 दिसंबर को मिला था अल्टिमेटम

11 दिसंबर को मिला था अल्टिमेटम

जानकारी के अनुसार 11 दिसंबर को जो अल्टीमेटम सरकार की ओर से वीसी को दिया गया था उसके लिए वीसी समझौते के लिए तैयार थे, लेकिन एक दिन बाद वह अपनी बात से पीछे हट गए। 13 दिसंबर को सुब्रमण्यम का तबादला कर दिया गया और उनकी जगह सूचना एवं प्रसारण सचिव अमित खरे ने ली। इसी बीच जिस तरह से जेएनयू कैंपस में नकाबपोश लोगों ने हमला किया उसके बाद वीसी जगदीश कुमार ने अमित खरे से बुधवार को मुलाकात की। मंत्रालय से जब यह पूछा गया कि कैंपस में हालात सामन्य करने के लिए वीसी को हटाया जा सकता है तो मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि नहीं, उनकी इस्तीफे मांग ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया है।

वीसी को सुझाव

वीसी को सुझाव

वीसी के साथ बुधवार को हुई बैठक में खरे ने उन्हें सुझाव दिया कि वह मीडिया से संपर्क साधे और शिक्षको से संवाद स्थापित करें, ताकि हालात सामान्य हो। प्रेस रीलीज जारी करने की बजाए वीसी को सुझाव दिया गया है कि वह सीधे मीडिया से बात करें। अगर उन्हें लगता है कि छात्र उनकी बात नहीं सुन रहे हैं और उन्हें शिक्षकों से बात करनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रविवार को जो हुआ वह कानून व्यवस्था का मसला नहीं बल्कि हम केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस तरह के हालात नहीं चाहते हैं।

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