'हम देश के साथ हैं', JNU ने तुर्की यूनिवर्सिटी से तोड़ा रिश्ता, जानिए क्या था ये समझौता?
JNU Turkey MoU Suspended: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच तुर्की ने खूब कमाई की। सैन्य टकराव में तुर्की ने सशस्त्र ड्रोन और ऑपरेटर पाकिस्तान को मुहैया करवाए। अब वक्त आ गया है, इसकी कीमत तुर्की को चुकानी होगी।
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने तुर्की की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपना शैक्षणिक समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सस्पेंड कर दिया। जेएनयू ने कहा कि हम देश के साथ हैं।

क्या था यह समझौता?
3 फरवरी को JNU और इनोनू यूनिवर्सिटी (तुर्की) के बीच एक MoU यानी समझौता ज्ञापन साइन हुआ था। इसका मकसद था -
- स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम
- फैकल्टी एक्सचेंज
- और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाना
अब क्यों सस्पेंड कर दिया गया?
JNU ने सोशल मीडिया पर लिखा - 'राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से यह समझौता अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है।' इसका सीधा संबंध है तुर्की के उस रुख से, जिसमें उसने भारत के ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना की थी और पाकिस्तान का समर्थन किया था।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। यह हमला कश्मीर के पहलगाम हमले के जवाब में किया गया, जिसमें पाकिस्तान की आयोजित आतंकियों ने 26 टूरिस्ट्स को मौत के घाट उतार दिया।
तुर्की क्यों विवाद में आया?
तुर्की और अजरबैजान ने भारत की इस कार्रवाई की आलोचना की। कहा गया कि यह पाकिस्तान के खिलाफ 'अत्यधिक प्रतिक्रिया' थी, इतना ही नहीं, तुर्की के बनाए कामिकेज़ ड्रोन का इस्तेमाल भी पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए किया।
भारत में तुर्की के खिलाफ गुस्सा क्यों?
जब तुर्की में भूकंप आया था, तो भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत वहां मदद भेजी थी - डॉक्टर, राहत टीम, मेडिकल सपोर्ट सब कुछ। अब वही तुर्की भारत के दुश्मन के साथ खड़ा नजर आया, जो देशवासियों को नागवार गुजरा।
व्यापार और टूरिज्म पर असर
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में व्यापारियों ने तुर्की के सामान का बहिष्कार किया। ट्रैवल कंपनियों ने तुर्की और अजरबैजान की बुकिंग्स रद्द कर दीं। कई वकीलों और संस्थानों ने अपनी विदेश यात्राएं कैंसिल कर दीं और कहा - अब देश के पर्यटन को बढ़ावा देंगे।












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