जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने उच्च वर्ग को बताया 'सड़ा आलू', जो शादी पर खर्च देते हैं 700 करोड़
जम्मू। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने देश के उच्च वर्ग के एक तबके की तुलना 'सड़े हुए आलू' से की है। उन्होंने कहा कि इस उच्च तबके में समाज के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है। वे एक रुपये का भी कोई धर्मार्थ कार्य नहीं करते। सशस्त्र सेना झंडा दिवस के उपलक्ष्य में जम्मू के अभिनव थियेटर में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में मलिक ने कहा कि, कश्मीरी नेताओं के पास बहुत पैसा है पर दान करने की हिम्मत नहीं है।

कश्मीरी नेताओं के पास बहुत पैसा है
राज्यपाल मलिक कई बार कश्मीर के अमीर नेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ मुखर हो चुके हैं। राज्यपाल ने कहा कि कश्मीरी नेता व नौकरशाह बहुत मालदार हैं, लेकिन वह धेला दान करने की काबलियत नहीं रखते हैं। उन्हें समाज से कुछ लेना-देना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से उच्च वर्ग में कुछ हैं। आप इसे बुरे तरीके से नहीं लें। ऐसे लोगों को वे इंसान नहीं सड़े आलू की तरह मानते हैं।

राज्यपाल ने फिर की तल्ख टिप्पणी
एक पत्रकार के पूछने पर कि देश का अमीरतम व्यक्ति जो अपनी बेटी की शादी में 700 करोड़ रुपये खर्च करता है, क्या वह कोई धर्मार्थ कार्य करता है। राज्यपाल ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि वह धर्मार्थ कार्य नहीं करता लेकिन देश के धन में इजाफा करता है। मलिक के कहा कि यूरोप और अन्य देशों में वे धर्मार्थ कार्य करते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के मालिक अपनी संपत्ति का 99 प्रतिशत धर्मार्थ कार्यों के लिए देते हैं। उन्होंने कहा कि 700 करोड़ रुपये से राज्य में 700 बड़े स्कूल बनाए जा सकते थे और शहीदों की 7000 विधवाएं अपने बच्चों का लालन पालन कर सकती थीं, लेकिन वे धर्मार्थ कार्य नहीं करेंगें।

समाज उच्च वर्ग से नहीं बनता
राज्यपाल ने कहा, समाज के इस तबके (उच्च वर्ग) में जो संवेदनशीलता होनी चाहिए वह इनमें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज उच्च वर्ग से नहीं बनता बल्कि किसानों ,कर्मचारियों, उद्योंगों में काम करने वाले लोगों और सशस्त्र बलों में काम करने वाले लोगों से बनता है। हमें इस वर्ग के लोगों की मदद करनी चाहिए।












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