Jammu Kashmir Terrorist Attack: जम्मू में क्यों बढ़ने लगा है आतंकवाद? क्या चुनावों से है कोई खास कनेक्शन?
Why are Terrorist Attacks increasing in Jammu: जम्मू और कश्मीर के जम्मू डिविजन में आतंकवादी हमले और आतंकियों से मुठभेड़ में 8 दिनों में ही सेना के आठ जवान और एक अफसर शहीद हो चुके हैं। अगर एक महीने पीछे चलें तो 9 जून से हुई आतंकी वारदात में सुरक्षा बलों के 9 लोगों के साथ ही 10 नागरिकों की जानें जा चुकी हैं।
जम्मू इलाका पिछले कुछ दशकों तक शांत रहने के बाद कुछ सालों में अचानक अशांत नजर आने लगा है। लेकिन, लोकसभा चुनावों के बाद जिस तरह से जम्मू इलाके में आतंकी हमले की 5 वारदातें हो चुकी हैं, वह हैरान करने वाली हैं। यह ऐसे समय में बढ़ी है, जब पवित्र अमरनाथ यात्रा चल रही है और यहां विधानसभा चुनावों की तैयारी हो रही है।

लोकसभा चुनावों के बाद बढ़ा हमलों का सिलसिला?
4 जून को लोकसभा चुनावों के नतीजे आए थे और आतंकवादियों ने 9 जून को ही जम्मू के रियासी में एक बस को निशाना बना दिया था, जिसकी वजह से वह खाई में गिर गई और 9 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और 42 अन्य जख्मी हो गए।
आर्टिकल 370 हटने के बाद
सरकार के दावों के अनुसार जम्मू और कश्मीर से 2019 में आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश में आमतौर पर खासकर कश्मीर घाटी में सुरक्षा के हालात काफी बेहतर हुए हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग इतिहास में तब्दील हो चुकी हैं। एक तरह की जो वहां पहले 'अराजकता' की स्थिति बनी रहती थी, बेवजह की हड़तालों से आम जनजीवन ठप रहता था, उसमें निश्चित तौर पर कमी आई है।
जम्मू में कैसे इलाके को निशाना बना रहे हैं आतंकवादी?
जम्मू के इलाकों में कहीं ऊंचे पहाड़ हैं तो कहीं मैदानी इलाके। यह डिविजन घने जंगलों से भी घिरा हुआ है। विविधता वाले इस क्षेत्र में कई बार आतंकवादी-विरोधी अभियानों के संचालने में सुरक्षा बलों के लिए खास चुनौतियां खड़ी होती हैं। 8 जुलाई को कठुआ में हुआ आतंकी हमला और उसके बाद सर्च ऑपरेशन में आई चुनौतियां उसके उदाहण हैं।
जम्मू में क्यों बढ़ने लगा है आतंकवाद?
द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर घाटी मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र है। जबकि, जम्मू के इलाके में ऐसा नहीं है। यहां विभिन्न समुदायों का बसेरा है। इस वजह से आतंकवादी कश्मीर घाटी में अपने दहशतगर्दों को पांव जमाने देने के लिए जम्मू क्षेत्र में 'असुरक्षा का माहौल खड़ा करने' की कोशिश कर रहे हैं। उनको लगता है कि इससे जम्मू क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव को भी हवा दी जा सकती है।
इसी रिपोर्ट के अनुसार 20 से 25 कट्टर आतंकवादियों के पाकिस्तान से घुसपैठ कर लेने की आशंका है। इनके दो ग्रुप हैं, जिनमें से एक के जम्मू के पुंछ-राजौरी सेक्टर में सक्रिय होने की आशंका है और दूसरा ग्रुप पूरब में कठुआ-डोडा-बसंतगढ़ इलाके में सक्रिय है।
हम जंग के लिए मजबूर होंगे- फारूक अब्दुल्ला
कठुआ में सेना के वाहन पर घात लगाकर किए गए हमले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुला ने कहा था, 'अगर पड़ोसी मुल्क सोचता है कि यहां पर आतंकवादी भेजकर जमीन पर चीजें बदली जा सकती हैं, तो ऐसा नहीं होगा। वे फेल हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'हम जंग के लिए मजबूर होंगे। उस देश (पाकिस्तान) की हालत पहले ही खराब है।'
जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव से घबराया पाकिस्तान?
जम्मू और कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस समेत कई पार्टियां सीधे तौर पर इन हमलों को यहां होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं। उमर अब्दुल्ला तक को आशंका होने लगी है कि कहीं इसकी वजह से विधानसभा के चुनाव न टाल दिए जाएं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आतंकवादी घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी के पीछे कहीं इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को टलवाना तो नहीं है? खासकर लोकसभा चुनावों में जिस तरह से कश्मीर में भारी मतदान हुआ है, उससे भी भारत के दुश्मनों की नींदें उड़ चुकी हैं।
लोकसभा चुनावों से क्या हो सकता है कनेक्शन?
कई सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से खबरें आ चुकी हैं कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उसपार आतंकवादियों का लॉन्च पैड तैयार है। भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान में घुसकर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की ओर से इस तरह की गतिविधियों में लगाम लगते महसूस हो रहा था।
लेकिन, जिस तरह से 4 जून के बाद अचानक आतंकवादी जिस तरह से खासकर जम्मू में सक्रिय हुए हैं, उससे सवाल उठता है कि कहीं लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिलने से तो पाकिस्तान उत्साहित नहीं हो गया है? उसे यह तो नहीं लग रहा है कि अब मोदी सरकार पाकिस्तान में घुसकर मारने वाली पहले जैसी स्थिति में नहीं रह गई है?












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