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घाटी के स्थायी निवासी बनने वाले गैर कश्मीरियों को सुरक्षा देना क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं?

श्रीनगर। Jammu Kashmir Domicile Certificate: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में गुरुवार को एक सर्राफा व्यापारी सतपाल निश्चल की हत्या ने कई सारी आशंकाओं को जन्म दे दिया है। आतंकियों ने दिन-दहाड़े ही व्यापारी को दुकान में ही गोली मार दी। ये हत्या जितनी दहलाने वाली है इसकी वजह इससे ज्यादा दहलाने वाली है। जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक आतंकियों ने सतपाल की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार के हाल ही लाए गए कानून के तहत जम्मू-कश्मीर का मूल निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल सर्टिफिकेट) हासिल किया था। एक आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली है। इस घटना के 90 के दशक की याद दिला दी है जब इसी तरह कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से भगाने के लिए ऐलान करके उन्हें मारा गया था।

हाल ही में सतपाल ने लिया था डोमिसाइल सर्टिफिकेट

हाल ही में सतपाल ने लिया था डोमिसाइल सर्टिफिकेट

पिछले साल ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भूमि सुधार कानून को लागू कर दिया था जिसके तहत अब देश के दूसरे भाग में रहने वाला नागरिक भी अब जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। इसके तहत उसे मूल-निवास प्रमाण पत्र भी हासिल करने का अधिकार मिला था। ये कानून 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा संसद में खत्म किए गए अनुच्छेद 370 की कार्यवाही का हिस्सा थे।

इस कानून के लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में लोगों ने मूल-निवास को लेकर काफी उत्साह दिखाया है। जानकारी के मुताबिक अभी तक 10 लाख लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इनमें अधिकांश लोग स्थानीय ही हैं जो लंबे समय से यहां रह रहे हैं। सतपाल निश्चल भी उन्ही लोगों में से एक थे। 65 वर्षीय सतपाल निश्चल युवावस्था में ही पंजाब से यहां पहुंच गए थे और यहां अपना व्यापार जमा रखा था। नए कानूनों के तहत उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर का मूल-निवास प्रमाण पत्र हासिल किया था और यही उनकी हत्या की वजह बन गया।

आतंकी संगठन ने हत्या के बाद दी है धमकी

आतंकी संगठन ने हत्या के बाद दी है धमकी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक द रेजिसटेंस फ्रंट (TRF) नामक आतंकी गुट ने उनकी हत्या की जिम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया पर दिए कथित बयान में इस संगठन ने आरोप लगाया है कि सतपाल निश्चल हिंदूवादी ताकतों की कश्मीर में बाहरी लोगों को बसाकर जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिशों का हिस्सा है। इसलिए उसकी हत्या की गई है। संगठन ने चेतावनी भी जारी की है कि जो भी बाहरी व्यक्ति डोमिसाइल हासिल करेगा उसकी हत्या कर दी जाएगी।

इस खुलेआम धमकी ने कश्मीर में बाहरी लोगों के बसने की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये 90 के दशक की आहट जैसा है जब घाटी में कश्मीरी पंडितों को भगाने के लिए आतंकियों ने इसी तरह धमकी देकर उनकी हत्या की थी। लेकिन इसके साथ ही ये सवाल केंद्र सरकार की नीति पर भी बनता है कि क्या धारा 370 हटा देने भर से उसकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?

मोदी सरकार से जरूरी हैं ये सवाल

मोदी सरकार से जरूरी हैं ये सवाल

ये सवाल केंद्र की मोदी सरकार से इसलिए भी जरूरी है क्योंकि धारा 370 खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है और वहां पर प्रशासन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। सतपाल निश्चल की हत्या के बाद से कश्मीर में व्यापार करने वाले लोग सदमें हैं। खास तौर पर वे लोग जो बाहर से आकर यहां लंबे समय से आबाद थे और उन्हें उम्मीद थी कि अब उन्हें भी मूल-निवास प्रमाण पत्र मिल जाएगा जिसके बाद वे अपनी बाकी की जिंदगी घाटी में बसर कर सकेंगे।

आतंकियों ने जिस तरह से हत्या के बाद खुलेआम धमकी दी है वह लोगों को डराने के लिए काफी है। सरकार ने कानून ला दिया है तो उसे सुरक्षित लागू करने की जिम्मेदारी भी उसी की है। जबकि पहले से ही कश्मीर में अतिवादी तत्व डोमिसाइल कानून को लेकर सख्त रुख रखते रहे हैं। ऐसे में क्या सरकार की ये जिम्मेदारी नहीं बनती कि ऐसे जो लोग प्रमाण पत्र पा रहे हैं उनकी सुरक्षा का इंतजाम भी करे।

संविधान को चुनौती दे रहे आतंकी

संविधान को चुनौती दे रहे आतंकी

आतंकियों की धमकी सिर्फ वहां रहने वाले लोगों के लिए ही नहीं बल्कि संविधान को चुनौती भी है। घटना के बाद से परिवार वाले डरे हुए हैं और किसी भी तरह से कोई बयान देने से डर रहे हैं। अभी कश्मीर में डोमिसाइल प्राप्त करने वाले लोगों में ज्यादातर वही लोग हैं जो लम्बे समय से वहां रह रहे हैं। इनके स्थानीय निवासियों से अच्छे संबंध हैं। सतपाल की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में उनके पड़ोसी भी पहुंचे थे। जिन्होंने कहा था कि सतपाल उनके भाई और परिवार जैसे थे। जाहिर है अभी लोगों में आपसी ताना-बाना बना हुआ है और ऐसा करने वाले कुछ मुठ्ठी भर लोग हैं। अगर सरकार इन आतंकियों से वहीं पर रहने वालों को सुरक्षा नहीं दे पाएगी तो बाहर से जाकर बसने की सोचने वाले पहले ही दहशत में आ जाएंगे। वहीं सरकार को इसे सिर्फ एक घटना समझकर हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। कश्मीर एक बार 90 की आग में जल चुका है जिसकी चिंगारी ऐसी ही एक घटना से भड़की थी जिसके बाद आज तक घाटी सुलग रही है।

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