रथ यात्रा से पहले महाप्रसाद को लेकर मचा बवाल, गजपति महाराज ने ISKCON से जताई नाराजगी, अब हुई सियासी एंट्री
Jagannath Mahaprasad Controversy: पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपराएं सिर्फ एक आस्था नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और विश्वास की बुनियाद हैं। यहां महाप्रसाद केवल भगवान को चढ़ाया गया भोजन नहीं, बल्कि भगवान का प्रत्यक्ष आशीर्वाद माना जाता है। यह भोग भगवान को विशिष्ट विधि से अर्पित होता है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल के दिघा में बने ISKCON के जगन्नाथ मंदिर को लेकर महाप्रसाद और रथ यात्रा की परंपराओं पर विवाद खड़ा हो गया है। पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब ने इस मामले में मुखर होकर कहा कि पुरी के बाहर परोसे जा रहे भोजन को 'महाप्रसाद' कहना गलत है।

ISKCON की गतिविधियों को लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और कहा कि जगन्नाथ की परंपराओं की गहरी समझ जरूरी है। इस धार्मिक बहस में अब राजनीति भी जुड़ गई है। TMC और बीजेपी के नेता आमने-सामने आ गए हैं। ऐसे में यह विवाद सिर्फ मंदिर की दीवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का रूप ले चुका है।
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महाप्रसाद को लेकर गजपति महाराज का बयान
पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब ने महाप्रसाद को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "जैसे हर जगन्नाथ मंदिर को 'धाम' कहना सही नहीं है, वैसे ही हर जगह मिलने वाले प्रसाद को 'महाप्रसाद' कहना भी गलत है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरी की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार जो भोग जगन्नाथ मंदिर में विशेष विधि से अर्पित होता है, वही महाप्रसाद कहलाता है।
गजपति महाराज ने इस बात पर नाराजगी जताई कि दीघा में ISKCON की ओर से जो प्रसाद बांटा जा रहा है, उसे 'महाप्रसाद' कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, "ISKCON के लोग खुद जगन्नाथ सेवा में हैं, उन्हें इस परंपरा की पूरी जानकारी होनी चाहिए। यह चौंकाने वाली बात है कि वे इस तरह की गलती कर रहे हैं।"
#WATCH | Puri, Odisha: On 'Mahaprasad' issue, Gajapati Maharaja Dibyasingha Deba says, "Just like calling every Jagannath temple as dham is wrong, similarly, calling Prasad that is served out of Jagannath Puri as mahaprasad is wrong- that is Jagannath prasad. Mahaprasad is… pic.twitter.com/S6bE5bzRZu
— ANI (@ANI) June 23, 2025
अलग-अलग तारीख पर ISKCON की रथ यात्रा पर महाराज ने जताई आपत्ति
गजपति महाराज ने ISKCON द्वारा वर्षभर अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा निकालने को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "1967 में ISKCON ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में पहली बार रथ यात्रा निकाली थी, जो 9 दिनों तक होती थी। लेकिन अब वे कभी भी रथ यात्रा और स्नान यात्रा कर लेते हैं।"
उन्होंने सवाल उठाया, "क्या वे कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर ऐसा कर सकते हैं? अगर नहीं, तो फिर जगन्नाथ की परंपरा के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है?" महाराज ने इसे श्रद्धालुओं की भावनाओं का अपमान बताया।
#WATCH | Puri, Odisha: On ISKCON conducting Jagannath Rath Yatra on different dates, Gajapati Maharaja Dibyasingha Deba says, "From 1967, ISKCON's rath yatra started in San Francisco; majorly, all the rath yatras were completed in 9 days only... but after some time, when ISKCON… pic.twitter.com/HAAFGdH6A9
— ANI (@ANI) June 23, 2025
'प्रसाद पर सवाल उठाने वाले नकली हिंदू'
TMC नेता कुनाल घोष ने दिघा मंदिर के प्रसाद विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "जो लोग खुद को हिंदू कहकर प्रसाद पर सवाल उठा रहे हैं, वे असली हिंदू नहीं हैं।"
कुनाल घोष ने कहा, "प्रसाद भगवान का आशीर्वाद होता है। जब कोई भोजन भगवान को अर्पित कर दिया जाता है, तभी वह प्रसाद बनता है। यह हमारी सनातन परंपरा है। लेकिन कुछ लोग TMC से लड़ते-लड़ते भगवान से ही लड़ने लगे हैं।"
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का पलटवार
TMC नेता के बयान पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "कुनाल घोष कौन होते हैं प्रमाणपत्र देने वाले? जिस दुकानदार को प्रसाद बनाने का आदेश दिया गया, उसने खुद कैमरे पर कहा कि वह हलाल मिठाई बेचता है।"
मजूमदार ने कहा, "हलाल मिठाई को भगवान जगन्नाथ का प्रसाद कैसे कहा जा सकता है? यह पूरी तरह से गलत है और आस्था के साथ खिलवाड़ है।"
विवाद में राजनीति का तड़का
दिघा जगन्नाथ मंदिर को लेकर विवाद अब सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। एक तरफ गजपति महाराज परंपरा और नियमों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ TMC और बीजेपी नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है।
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