मौर्य और योगी में सबकुछ ठीक है? क्या बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है यूपी बीजेपी?
उत्तर प्रदेश में इस बार के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने दिल्ली में बीजेपी को कमजोर कर दिया है। राज्य में पार्टी को सिर्फ 33 सीटें मिली हैं, इसकी वजह से लोकसभा में पार्टी अपने दम पर बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करने से चूक गई है।
सवाल है कि क्या पार्टी इसके लिए किसी पर गाज गिराएगी? अगर इसके लिए किसी को जम्मेदार माना जाएगा तो वह कौन होगा? इस तरह की कयासबाजियों का दौर लखनऊ से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से जारी है।

योगी सरकार से दूरी बना रहे हैं मौर्य?
ऊपर से इन हालातों में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अपनी सरकार की बैठकों से कथित दूरी बनाए रखने की वजह से और भी तरह-तरह की अटकबाजियों को हवा मिल रही है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब उम्मीदों से उलट नतीजों ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को निराश कर रखा है।
संगठन सरकार से बड़ा रहेगा- मौर्य
रविवार को यूपी भाजपा कार्यसमिति की बैठक में मौर्य ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, 'आपका दर्द मेरा भी दर्द है।' वे बोले, 'संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा बड़ा रहेगा।' उन्होंने कांग्रेस और सपा पर 'झूठ' फैलाने और 'धोखा' देने के भी आरोप लगाए। इसपर उन्हें कार्यकर्ताओं की काफी वाहवाही भी मिली।
अति आत्मविश्वास से हमें नुकसान हुआ- योगी आदित्यनाथ
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना था कि 'अति-आत्मविश्वास' से लोकसभा चुनावों में बीजेपी को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही 'हार' मान चुका विपक्ष अब फिर से 'कूदने' लगा है।
उन्होंने कहा, '2014 और उसके बाद के चुनावों में भाजपा के पक्ष में जितना वोट प्रतिशत था, बीजेपी 2024 में भी उतने ही वोट पाने में सफल रही है, लेकिन वोटों के शिफ्ट होने और अति आत्मविश्वास ने हमारी उम्मीदों को चोट पहुंचाई है।' हालांकि, इस दौरान सीएम ने यह भी कहा था कि सरकार जिस तरीके से काम कर रही है, उसपर इन नतीजों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
2019 में बीजेपी को यूपी की 80 सीटों में 62 सीटें मिली थीं। लेकिन, इस बार सपा ने अकेले 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतकर केंद्र सरकार में उसकी ताकत को कम कर दिया है।
'विपक्ष के झूठ को काउंटर करने में असफल रहे'
इस बैठक में यह बात निकलकर आई कि मौर्य और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं के मसलों पर फोकस किया। वहीं मुख्यमंत्री ने यह सवाल उठाया कि 'जब स्मार्टफोन में गुड मॉर्निंग संदेश भेजे जा सकते हैं तो विपक्ष की ओर से फैलाए गए झूठ का विरोध क्यों नहीं किया गया?' इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हुए थे।
केशव प्रसाद मौर्य की बढ़ सकती है जिम्मेदारी
कार्यसमिति वाली बैठक के अलावा मौर्य के बारे में कहा जा रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद उनका ज्यादातर समय अभी दिल्ली में ही गुजर रहा है। उनकी वहां पर पार्टी के केंद्रीय नेताओं से भी मुलाकातों की जानकारी है। मंगलवार को भी देर शाम वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा से मिलने के लिए बीजेपी हेडक्वार्टर पहुंचे। यह मुलाकात करीब एक घंटे चली। उनके ठीक बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी नड्डा से मिलने पहुंचे।
इन सबसे इस तरह का अंदाजा लग रहा है कि हो सकता है कि एक बार फिर से मौर्य को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है या उन्हें योगी कैबिनेट में उन्हें कुछ और बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
भागवत के लखनऊ दौरे की खबरों से भी बढ़ गई हैं अटकलें
यूपी में सत्ताधारी पार्टी के भीतर चल रहे हार पर मंथन के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ आने की चर्चा ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। उनके बारे में कहा जा रहा है कि लखनऊ प्रवास के दौरान वे सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगे।
हालांकि, यह साफ नहीं हो पा रहा है कि इसका बीजेपी संगठन और सरकार से कोई वास्ता है या फिर वह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात के तौर पर मुख्यमंत्री से मिलने आ रहे हैं।












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