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क्या वाक़ई नरेंद्र मोदी ये ‘प्रोटोकॉल’ तोड़ने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की दिल्ली एयरपोर्ट पर गले मिलने वाली तस्वीर 'पीएम मोदी के प्रोटोकॉल तोड़ने का नमूना' बताते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

मोहम्मद बिन सलमान अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर मंगलवार रात क़रीब 10 बजे दिल्ली पहुँचे थे जिनका स्वागत करने के लिए ख़ुद पीएम मोदी एयरपोर्ट पर मौजूद थे.

भारतीय जनता पार्टी के आलोचक और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता पीएम मोदी द्वारा मोहम्मद बिन सलमान के इस 'गर्मजोशी भरे' स्वागत पर सवाल उठा रहे हैं.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर मंगलवार रात से हज़ारों ऐसी पोस्ट की जा चुकी हैं जिनमें पीएम मोदी की वायरल तस्वीर के साथ लिखा है कि "उन्होंने क्राउन प्रिंस का स्वागत करने के लिए सरकारी प्रोटोकॉल को तोड़ा."

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इसी लाइन पर ट्वीट किये हैं.

उन्होंने लिखा है, "सरकारी प्रोटोकॉल तोड़कर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस का इस तरह स्वागत करना ये दर्शाता है कि पीएम मोदी की नज़र में भारतीय शहीदों के बलिदान की कितनी कद्र है. जिनका वो स्वागत कर रहे हैं उन्होंने कुछ ही घंटों पहले पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है."

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर विपक्षी पार्टी के इन ट्वीट्स को आधार बनाते हुए लिखा है कि 'सरकारी प्रोटोकॉल तोड़कर विदेशी मेहमानों को ख़ुद लेने पहुँचना, ऐसा करने वाले पहले पीएम बने नरेंद्र मोदी.'

लेकिन ये दावा सही नहीं है क्योंकि साल 2004 से लेकर 2014 के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह पाँच बार ऐसा कर चुके हैं.

...जब मनमोहन सिंह खड़े थे स्वागत में

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाँच अलग मौक़ों पर विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए एयरपोर्ट जाकर कथित सरकारी प्रोटोकॉल को तोड़ चुके हैं.

सबसे पहली बार तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने ये 'सरकारी प्रोटोकॉल' साल 2006 में सऊदी अरब के किंग और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के पिता सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के लिए ही तोड़ा था.

साल 2006 में ही मनमोहन सिंह ने दूसरी बार ये 'प्रोटोकॉल तोड़ा' और अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के स्वागत के लिए ख़ुद एयरपोर्ट पहुंचे थे.

साल 2006 में नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और साल 2013 में जापान के सम्राट अकीहितो के स्वागत के समय भी मनमोहन सिंह ने कथित प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया था और इन मेहमानों को लेने एयरपोर्ट पहुंचे थे.

पाँचवां मौक़ा साल 2010 का है जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्वागत के लिए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी पत्नी गुरशरण कौर के साथ दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचे थे.

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प्रोटोकॉल और प्रिंस का स्वागत

बुधवार सुबह कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने #PulwamaTerrorAttack के साथ एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है और दावा किया है कि पीएम मोदी ने सरकारी प्रोटोकॉल तोड़ा. इस स्क्रीनशॉट में लिखा है: 'विदेशी मेहमानों से संबंधित प्रोटोकॉल'.

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि कांग्रेस प्रवक्ता जिस स्क्रीनशॉट के साथ ये दावा कर रही हैं, वो आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया साइट 'कोरा' पर किसी साधारण यूज़र द्वारा लिखा गया जवाब है.

उन्होंने बताया कि आधिकारिक तौर पर भारत आने वाले विदेशी मेहमानों के स्वागत का सरकारी प्रोटोकॉल क्या है, इससे जुड़ा दस्तावेज़ विदेश मंत्रालय की साइट पर मौजूद नहीं है क्योंकि इसे गोपनीय दस्तावेज़ों की श्रेणी में रखा जाता है.

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए बीबीसी ने भारत के पूर्व राजनयिक कृष्ण चंद्र सिंह से बात की. उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों के स्वागत से जुड़ा प्रोटोकॉल कोई पत्थर की लकीर नहीं है जिसे देश का प्रधानमंत्री लांघ न सके.

उन्होंने कहा कि जो पीएम मोदी कर रहे हैं, वो मनमोहन सिंह भी कर चुके हैं. लेकिन मौजूदा सरकार में पीएम का एयरपोर्ट पर जाकर विदेशी मेहमानों का स्वागत करने का रिवाज़ बढ़ा है.

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केसी सिंह ने बताया, "किसी राष्ट्र प्रमुख या विदेश से आ रहे बड़े नेता के स्वागत के लिए भारत के प्रधानमंत्री को पहुँचना है या नहीं, इसका फ़ैसला इस बात पर निर्भर करते है कि मेहमान कितना ख़ास है. इसे हर बार की प्रैक्टिस नहीं बनाया जा सकता क्योंकि अगर ऐसा हर मेहमान के लिए होने लगा तो फिर इसमें कोई ख़ास बात नहीं रह जाएगी."

केसी सिंह के मुताबिक़ विदेशी मेहमानों का एयरपोर्ट पर जाकर स्वागत करने का चलन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंतिम कार्यकाल तक काफ़ी संजीदगी से निभाया जाता था. उस वक़्त सभी मेहमानों के लिए पीएम एयरपोर्ट पहुँचते थे. लेकिन बाद में जैसे-जैसे भारत का वैश्विक स्तर बढ़ने लगा और विदेशी मेहमानों का भारत आना ज़्यादा हुआ तो 90 के दशक में ये तय किया गया कि सिर्फ़ चुनिंदा मेहमानों के स्वागत के लिए ही पीएम एयरपोर्ट पहुँचें ताकि उनकी अहमियत अलग दिखे.

केसी सिंह ने कहा, "आदर्श स्थिति तो ये है कि देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति भवन में विदेशी मेहमान का इंतज़ार करें क्योंकि वहीं उनके स्वागत में औपचारिक समारोह का आयोजन किया जाता है."

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