क्या कांग्रेस के दबाव में है बीजेपी, अधिक से अधिक ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट देने की योजना?
विधानसभा चुनावों में इस बार लगता है कि बीजेपी को कांग्रेस की वजह से अपनी योजना बदलनी पड़ रही है। कांग्रेस ने जिस तरह से अभी जातिगत जनगणना का राग छेड़ा है और मध्य प्रदेश में 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में 39 ओबीसी प्रत्याशियों पर दांव लगाया है, भाजपा उसे पहले ही भांप कर कदम बढ़ाती दिख रही है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस जातिगत जनगणना को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाती नजर आ रही है। कम से कम पार्टी नेता राहुल गांधी के लिए अभी यही सबसे बड़ा जिताऊ मुद्दा है। एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वे जाति का मुद्दा जरूर उठा रहे हैं, आबादी के हिसाब से हक देने की अपनी नई योजना को भाजपा के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार मानकर चल रहे हैं।

ओबीसी उम्मीदवारों की लॉटरी लग रही!
बीजेपी भी इसी आधार पर अपनी रणनीति तैयारी करती दिख रही है। ज्यादा से ज्यादा ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट देने की तैयारी में जुटी लग रही है। पार्टी ने मध्य प्रदेश में अभी 136 उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उनमें से पार्टी ने 40 ओबीसी प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। यह पार्टी उम्मीदवारों की अभी तक की संख्या का 29% है।
लोध और कुर्मी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी
2018 के विधानसभा चुनावों में राज्य में बीजेपी ने 39% ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इस बार वह इस हिस्सेदारी को पार करने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी ने राज्य में अभी तक अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के जितने उम्मीदवारों का नाम घोषित किया है, उनमें से लोध और कुर्मी जातियों से 7-7 उम्मीदवार हैं, जो अभी तक की लिस्ट के हिसाब से पिछली बार की तुलना में 3 ज्यादा हैं।
छत्तीसगढ़ में भी ज्यादा ओबीसी उम्मीदवार
अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी ने 90 सीटों में से 85 पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें से 29 उम्मीदवार ओबीसी हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने यहां 28 ओबीसी उम्मीदवार उतारे थे। अभी पार्टी जिन 5 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित करने वाली है, संभावना है कि उनमें से 3 नाम ओबीसी से ही शामिल होंगे।
इस तरह से इसबार छत्तीसगढ़ में 90 में से बीजेपी के ओबीसी प्रत्याशियों की संख्या 32 हो सकती है, जो कुल उम्मीदवारों के 36% होंगे। कांग्रेस ने रविवार को छत्तीसगढ़ में जिन 30 सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा की है, उनमें 9 ओबीसी हैं। 2018 में इसने यहां कुल 26 ओबीसी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था।
राजस्थान में भी ओबीसी प्रत्याशियों की लिस्ट में भारी
इसी तरह राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जो 41 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है, उनमें से 15 नाम ओबीसी समाज के हैं। जानकारी के मुताबिक आने वाली लिस्ट में ओबीसी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ती ही जाएगी।
ओबीसी वोटरों के लिए विशेष चुनावी अभियान की भी योजना
ज्यादा से ज्यादा ओबीसी समाज के प्रत्याशियों को टिकट देने के अलावा पार्टी ओबीसी वोटर बहुल विधानसभा क्षेत्रों में विशेष चुनाव अभियान चलाने की भी योजना पर काम कर रही है। जिन सीटों पर जिस ओबीसी जाति की संख्या ज्यादा है, वहां पार्टी के उस जाति के बड़े नेता जाएंगे और पार्टी की सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की चर्चा करेंगे।
पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से कहा गया है वह जाति विशेष के वोटरों के बीच जाएं और 17 सितंबर से शुरू किए गए विश्वकर्मा योजना के बारे में जानकारी दें और इस समाज के वोटरों को केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारों में चल रही कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी बताएं।












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