क्या इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे के खिलाफ भाजपा,कांग्रेस और NCP हो चुकी है एकजुट

नई दिल्ली-देश में कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल कोविड-19 संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। कई दिनों तक अस्पताल इलाज करवा चुके मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान पहले की तरह अपने काम में जुट चुके हैं। गृहमंत्री अमित शाह को तो पहले कोविड-19 की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और फिर पोस्ट-कोविड लक्षणों की वजह से एम्स में लंबा वक्त गुजारना पड़ गया। ऐसा इसीलिए हुआ, क्योंकि इन लोगों ने संक्रमण के जोखिम के बावजूद लोगों से संपर्क पूरी तरह से बंद नहीं किया था। प्रधानमंत्री मोदी भी मई महीने में अम्फान तूफान प्रभावित पश्चिम बंगाल और ओडिशा का दौरा कर चुके हैं। वो राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास के लिए अयोध्या भी जा चुके हैं। बाद में उनके संपर्क में आए कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए। लेकिन, प्रधानमंत्री का कोई काम प्रभावित नहीं हुआ है। वह पहले की तरह ही निरंतर ऐक्टिव बने रहे हैं। लेकिन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने कोरोना के डर से खुद को मातोश्री के अंदर ही 'सेल्फ-क्वारंटीन' कर लिया है। अनलॉक-4 में भी वो 'वर्क फ्रॉम होम' मोड से बाहर नहीं निकले हैं।

उद्धव के 'वर्क फ्रॉम होम' पर उठ रहे सवाल

उद्धव के 'वर्क फ्रॉम होम' पर उठ रहे सवाल

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव के कोरोना से बहुत ज्यादा डरने की एक वजह ये हो सकती है कि एंजियोप्लास्टी के बाद उन्हें 8 स्टेंट लग चुके हैं। लेकिन, इसके चलते वह विपक्षी बीजेपी ही नहीं, सत्ताधारी एनसीपी और कांग्रेस की ओर से भी आलोचनाओं के शिकार हो रहे हैं। क्योंकि, ढलती उम्र और हाई रिस्क में होने के बावजूद एनसीपी चीफ शरद पवार ने ना तो कभी जनसंपर्क बंद किया और लगातार पूरे राज्य का दौरा करते रहे हैं। लेकिन, उद्धव ठाकरे बीते 5 महीनों में कभी-कभार ही मंत्रालय गए हैं और ज्यादातर कैबिनेट मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए ही किया करते हैं। अगर किसी खास वजह से सीधे अधिकारियों से मिलते भी हैं तो वह या मातोश्री में मिल लेते हैं या फिर दादर वाले बाल ठाकरे मेमोरियल में। बस यही वजह है कि उनपर घर से बाहर नहीं निकलने और राज्य का दौरान नहीं करने के आरोप लग रहे हैं।

पवार भी उठा चुके हैं सवाल

पवार भी उठा चुके हैं सवाल

यहां तक कि महाविकास अघाड़ी सरकार में उनके राजनीतिक गुरु बनकर बैठे शरद पवार भी उनकी ओर इसके लिए उंगली उठा चुके हैं। एक मराठी चैनल को जुलाई में दिए इंटरव्यू में मराठा नेता ने कहा था, 'क्योंकि वो सरकार के प्रमुख हैं, उनसे उम्मीद की जाती है कि वह एक जगह से हालात पर नजर रखें। हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि उन्हें स्थायी तौर पर ही ऐसा करना चाहिए। बीच-बीच में उनसे राज्य का दौरा करने और लोगों से मुलाकात करने और उन्हें भरोसे में लेने की भी उम्मीद की जाती है, लेकिन ये अभी तक होना बाकी है।' जब गुरु से दीक्षा मिली तो उद्धव ठाकरे कुछ इलाके में गए भी थे।

विपक्ष और सहयोगियों से भी तंज

विपक्ष और सहयोगियों से भी तंज

लेकिन, जब सहयोगियों को भी कहना पड़ रहा है तो विपक्षी भाजपा के पास तो मौके ही मौके हैं। पार्टी नेता प्रवीण दारेकर ने उद्धव को ऐसा मुख्यमंत्री बताया जो, 'महाराष्ट्र के इतिहास में ज्यादातर घर पर ही रहा है, बिना बाहर कदम रखे। वो ऐसे सीएम के रूप में जाने जाएंगे, जिनका जनता के साथ कोई संपर्क नहीं था। 'बुधवार को बीजेपी नेता ने उद्धव की ओर उंगली उठाई और उसी दिन विदर्भ के कांग्रेस नेता आशीष देशमुख ने भी उन्हें एक सुझाव दे दिया। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें उद्धव से उम्मीद है कि कम से कम बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई जायजा तो ले लें। बता दें कि महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस इस समय विदर्भ इलाके का दौरा कर रहे हैं।

शिवसेना कोरोना प्रोटोकॉल का दे रही है हवाला

शिवसेना कोरोना प्रोटोकॉल का दे रही है हवाला

लेकिन, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बचाव में उनकी पार्टी शिवसेना की अपनी दलील है। पार्टी नेता संजय राउत के मुताबिक सीएम अभी कोविड प्रोटोकॉल के मुताबिक काम कर रहे हैं। राउत का कहना है कि, 'इस समय उद्धव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों एक ही तरह से काम कर रहे हैं। उनके (उद्धव) राजनीतिक विरोधियों को पता होना चाहिए कि पीएम और गृहमंत्री दिल्ली में बैठे हुए हैं और काम कर रहे हैं। सभी मुख्यमंत्री इसी तरह से काम कर रहे हैं।'

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