IRCTC: इंडियन रेलवे में होता है इमरजेंसी रिजर्वेशन कोटा, जानें कौन और कैसे कर सकता है अप्लाई
IRCTC: भारतीय रेलवे (Indian Railways) यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई तरह के कोटे देता है। इन्हीं में से एक है इमरजेंसी कोटा (Emergency Quota - EQ)। यह कोटा आम यात्रियों के लिए नहीं होता, बल्कि खास परिस्थितियों और खास लोगों के लिए रखा जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इमरजेंसी कोटा क्या है और इसे पाने के नियम क्या हैं। लेकिन कुछ मौकों पर यह आम लोगों के लिए भी होता है।
इमरजेंसी कोटा क्यों शुरू किया गया?
रेल मंत्रालय के मुताबिक, इमरजेंसी कोटा उन यात्रियों की तत्काल यात्रा जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, जिनके पास हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन (HOR) होता है और जिनकी टिकट वेटिंग में होती है। यह कोटा खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए है, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है और जिनकी भूमिका प्रशासनिक या संवैधानिक रूप से अहम होती है।

किन लोगों को मिलता है इमरजेंसी कोटा?
रेलवे के नियमों के अनुसार, इमरजेंसी कोटा में शामिल किए जाने वाले प्रमुख लोग हैं-
• केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
• सुप्रीम कोर्ट के जज
• विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट के जज
• संसद सदस्य (MPs)
इन सभी को HOR धारक माना जाता है और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर इमरजेंसी कोटा दिया जाता है।
आम यात्रियों के लिए कब मिल सकता है इमरजेंसी कोटा?
इन विशिष्ट हस्तियों के अलावा, रेलवे कुछ अन्य आपात स्थितियों में भी इमरजेंसी कोटा पर विचार करता है। इसमें शामिल हैं-
• सरकारी ड्यूटी
• परिवार में किसी की मृत्यु (शोक की स्थिति)
• गंभीर बीमारी
• नौकरी का इंटरव्यू जैसी जरूरी यात्रा
यात्रा की तात्कालिकता और यात्री की स्थिति को देखते हुए, उपलब्ध सीटों में से कोटा जारी किया जाता है।
इमरजेंसी कोटा को कैसे दी जाती है मंजूरी?
रेल मंत्रालय को हर दिन अलग-अलग स्तरों से बड़ी संख्या में इमरजेंसी कोटा के अनुरोध मिलते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि इनकी मंजूरी कैसे मिलती है। रेलवे 'वॉरंट ऑफ प्रेसीडेंस' और पहले से तय नियमों के आधार पर प्राथमिकता तय करता है। यानी हर अनुरोध को एक तय क्रम में देखा जाता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सीटों के आवंटन के समय सबसे पहले हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन (HOR) धारकों और संसद सदस्यों को इमरजेंसी कोटा दिया जाता है। यह आवंटन वॉरंट ऑफ प्रेसीडेंस के अनुसार उनकी अंतर-सेवा वरिष्ठता को ध्यान में रखकर किया जाता है।
इसके बाद किन अनुरोधों पर होता है विचार?
रेल मंत्री ने आगे कहा कि HOR धारकों के बाद संसद सदस्यों समेत अन्य स्रोतों से आए अनुरोधों पर विचार किया जाता है। इसके बाद अगर कोटा बचता है, तो यात्रियों की आधिकारिक स्थिति और यात्रा की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए सीटें जारी की जाती हैं। इसमें सरकारी काम, शोक, बीमारी या नौकरी के इंटरव्यू जैसे कारण शामिल होते हैं।
इमरजेंसी कोटा की पुष्टि कैसे होती है?
इमरजेंसी कोटा की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए रेलवे ने इसके लिए सेल मंडल और क्षेत्रीय मुख्यालयों में बनाए हैं। इसके अलावा, कुछ महत्वपूर्ण गैर-मुख्यालय स्टेशनों पर भी यह व्यवस्था लागू की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर जल्दी फैसला लिया जा सके।
दुरुपयोग रोकने के लिए रेलवे के सख्त निर्देश
इस सुविधा के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने सभी आंचलिक रेलवे को साफ निर्देश दिए हैं। इमरजेंसी कोटे की सीटें सिर्फ लिखित अनुरोध के आधार पर ही जारी की जाएंगी। बिना आधिकारिक और प्रमाणित कारण के इमरजेंसी कोटा नहीं दिया जाएगा।
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