मिसाइल हमलों में फंसे 310 यात्री अबू धाबी से दिल्ली सुरक्षित पहुंचे, परिवार को देख छलके खुशी के आंसू
Abu Dhabi to Delhi flight: अबु धाबी से सोमवार को एतिहाद एयरवेज की एक उड़ान 310 यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंची। ये यात्री ईरान के खाड़ी देशों पर मिसाइल व ड्रोन हमलों के कारण वहीं फंसे थे। ईरान ने ये हमले शनिवार से हुए अमेरिका-इजरायल मिसाइल हमलों की जवाबी कार्रवाई में किए थे।
यह उड़ान सोमवार रात 8:30 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर उतरी। यात्रियों के बाहर आते ही उनके परिजन उन्हें गले लगाने के लिए दौड़ पड़े। हवाई अड्डे पर बेहद भावनात्मक माहौल था, जहां कई परिवारों का पुनर्मिलन हुआ।

बेटे को सामने देख पिता विनोद के छलके आंसू
55 वर्षीय विनोद शर्मा ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया, "मेरा बेटा शिव शनिवार को मैनचेस्टर से अबू धाबी के रास्ते लौट रहा था पर वहीं फंस गया। हम बेहद डरे थे, क्योंकि उसने बताया कि उसे होटल के ऊपर मिसाइलें इंटरसेप्ट होते दिखीं और सुनीं। हमने उड़ान लगातार ट्रैक की और भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही राहत महसूस की।"
जन्मदिन पर सही सलामत बेटी को देख खुशी से झूमी मां
टर्मिनल पर इंतजार कर रहीं 50 वर्षीय दानिश्ता परवीन ने अपनी बेटी (एतिहाद क्रू मेंबर) के बारे में बताया, "वह वैसे तो 28 फरवरी को आने वाली थी, पर आ नहीं सकी... उसने हमें बताया कि मिसाइलों के कारण हवाई अड्डे की दीवारें हिलती महसूस हुईं। कल उसका जन्मदिन है, तो मैं खुश हूँ कि वह लौट आई है और अब हमारे साथ इसे मना पाएगी।"
बेटे-बहू को सुरक्षित देख खुश हुईं मां शशि
अपने बेटे और बहू के साथ लौटीं 52 वर्षीय शशि परमार ने घर पहुंचकर खुशी जताई। उन्होंने कहा, "हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था क्या होगा, और हम बहुत लंबे समय तक वहीं फंसे रहने को लेकर चिंतित थे। बच्चों के साथ दिल्ली में आकर मुझे राहत मिली है, पिछले दो दिनों में पहली बार अब मैं सुरक्षित महसूस कर रही हूं।"
यात्री राहुल ने मिसाइल हमलों का खौफनाक मंजर बयां किया
42 वर्षीय राहुल कुमार को 28 फरवरी को उड़ान भरनी थी, हवाई अड्डे पर उन्हें बोर्डिंग पास भी मिल गया था। पर ईरान के मिसाइल हमलों के कारण अधिकारियों को विमानों को खड़ा करना पड़ा। कुमार ने बताया, "मुझे 28 तारीख को ही वापस लौटना था, मेरा बोर्डिंग पास भी तैयार था, पर फ्लाइट निलंबित कर दी गई। इसके बाद हमने आसमान में कई बार मिसाइलों को इंटरसेप्ट होते देखा। हमें अपने होटल पर उन्हीं से गिरता मलबा भी महसूस हुआ, जो मेरे परिवार और मेरे लिए बहुत डरावना था।"
कनाडा से लौट रहीं 50 वर्षीय हरपिंदर सिद्धू अबू धाबी में स्टॉपओवर पर फंस गई थीं। उनका कहना था, "हमने मिसाइलों की आवाज़ भी सुनी, पर अधिकारियों ने घबराहट को फैलने नहीं दिया।" अन्य यात्रियों ने भी मुश्किल हालात में सहजता बनाए रखने के लिए अधिकारियों की प्रशंसा की।
32 वर्षीय प्रज्वल वर्मा भी टोरंटो से दिल्ली की यात्रा कर रहे थे, पर उनकी उड़ान रद्द हो गई थी। उन्होंने साझा किया, "हमने कुछ बार मिसाइलों की आवाज़ सुनी और डर गए थे। पर अब मैं वापस आकर राहत महसूस कर रहा हूँ; मैं अकेला यात्रा कर रहा था, इसलिए परिवार से मिलने का इंतजार नहीं हो रहा है।"
60 वर्षीय अंजना गुप्ता अपने बेटे और बहू की वापसी से बेहद खुश थीं। उन्होंने कहा, "पिछले दो दिनों से, वे हमें आसमान में हुए धमाकों और उनके होटल की खिड़कियों के हिलने के वीडियो भेजते थे, जिससे हम बहुत डर जाते थे। इसलिए मैं खुश हूँ कि वे सकुशल वापस आ गए हैं।"












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